लॉकडाउन ने की रेलवे की हालत खस्ता, पेंशन व सैलरी देने के लिए वित्त मंत्रालय से मांगी मदद

लॉकडाउन ने की रेलवे की हालत खस्ता, पेंशन व सैलरी देने के लिए वित्त मंत्रालय से मांगी मदद
वर्तमान में रेलवे में करीब 13 लाख अधिकारी और कर्मचारी काम करते हैं.

लॉकडाउन का बुरा असर अब इंडियन रेलवे (Indian Railway) के वित्तीय हालत पर दिखने लगा है. रेल मंत्रालय (Ministry of Railway) ने वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) को एक लेटर लिखकर तत्काल हस्तक्षेप करने को कहा है ताकि इस वित्त वर्ष में रिटायर हुए कर्मचारियों को पेंशन दिया जा सके.

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नई दिल्ली. कोरोना वायरस के मद्देनजर मार्च के अंतिम सप्ताह में लॉकडाउन लगाने के बाद से ही इंडियन रेलवे (Indian Railway) का पहिया थमा हुआ है. हालांकि, कुछ श्रमिक स्पेशल ट्रेनें (Sharmis Special Trains) और माल गाड़ियां सुचारु रुप से चल रही है. लेकिन, अभी भी सभी ट्रेनों को नहीं शुरू किया गया है. इस बीच अब खबर आ रही है रेलवे आर्थिक तंगी से भी जूझ रहा है. एक अंग्रेजी अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, रेल मंत्रालय (Ministry of Railway) ने अब वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) को एक लेटर लिखकर तत्काल हस्तक्षेप करने को कहा है. रेलवे के पास इतनी भी पूंजी नहीं बची है कि वो चालू वित्त वर्ष में रिटायर हुए कर्मचारियों को पेंशन दे सके.

15 लाख कर्मचारियों को पेंशन देता है रेलवे
इस रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान में रेलवे के पास करीब 13 लाख अधिकारी और कर्मचारी हैं. साथ ही, रेलवे करीब 15 लाख रिटायर्ड कर्मचारियों को पेंशन देता है. बता दें कि इंडियन रेलवे पूरी तरह से केंद्र सरकार की ही ईकाई है, लेकिन कर्मचारियों और अधिकारियों की सैलरी देने की जिम्मेदारी रेल मंत्रालय की ही होती है. मंत्रालय ही अपने फंड से इसपर खर्च करता है.

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पश्चिम रेलवे को 1800 करोड़ रुपये का घाटा


कुछ अन्य मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष में रेलवे को पेंशन के लिए करीब 53,000 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ेंगे. यही कारण है कि फंड की कमी होने के बाद अब रेल मंत्रालय ने नॉर्थ ब्लॉक का रुख किया है. हाल ही में एक रिपोर्ट आई थी, जिसमें पश्चिम रेलवे ने लॉकडाउन की वजह से 1,784 करोड़ रुपये के घाटे के बारे में जानकारी दी थी. इसमें सबअर्बन सेक्शन में 263 करोड़ रुपये और नॉन-सबअर्बन सेक्शन में 1,521 करोड़ रुपये के घाटे के बारे में जानकारी थी.

श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से 430 करोड़ रुपये का रेवेन्यू
गौरतलब है कि लॉकडान के बीच प्रवासी मजदूरों को उनके गृह राज्य पहुंचाने के लिए इंडियन रेलवे श्रमिक स्पेशल ट्रेनों को शुरू किया था. रेल मंत्रालय ने जानकारी दी है कि 9 जुलाई तक इन श्रमिक स्पेशन ट्रेनो से किराये से आने वाला रेवेन्यू 429.90 करोड़ रुपये रहा है. हिंदुस्तान टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि गुजरात से सबसे अधिक 102 करोड़ रुपये, महाराष्ट्र से 85 करोड़ रुपये, तमिलनाडु से 34 करोड़ रुपये का राजस्व आया है.

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इसी रिपोर्ट में एक अधिकारी के हवाले से ​कहा गया है कि श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के किराये से जितना रेवेन्यू मिला है, उसकी तुलना में रेलवे ने ज्यादा खर्च किया है. श्रमिक ट्रेनों के संचालन पर रेलवे ने कुल 2,400 करोड़ रुपये खर्च किया है.
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