Indian Railways: अब इन ट्रेनों में टिकट के लिए नहीं करना होगा इंतजार, मिलेगी कंफर्म सीट! ये है रेलवे की नई प्लानिंग?

SER ने HOG तकनीक से और अधिक ट्रेनों के संचालन की योजना बनाई है.

Indian Railways News: रेल यात्रियों को अधिक से अधिक कंफर्म सीटें उपब्लध कराने के साथ ही ट्रेनों को चलाने का खर्च बचाने के लिए भारतीय रेलवे (Indian Railway) अपनी सभी प्रीमियम ट्रेनों को हेड ऑन जनरेशन (HOG) तकनीक के जरिए चलाने की योजना पर काम कर रही है.

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    नई दिल्ली. अगर आप ट्रेन (Train) से सफर करने वाले हैं तो आपके लिए भारतीय रेलवे (Indian Railway) एक खास तोहफा लेकर आ रहा है. भारतीय रेलवे के दक्षिण पूर्व रेलवे (SER) जोन ने फैसला किया है कि वह पैसेंजर कोचों में बिजली प्रदान करने के लिए इस्तेमाल होने वाले बिजली के डिब्बों (जनरेटर कारों) में से एक को हटा देगा और इसे एक सामान्य कोच से बदल देगा. जनरल कोच के जुड़ने से भारतीय रेलवे की इन पैसेंजर ट्रेनों में यात्रा करने वाले अधिक लोगों को मदद मिलेगी. रेल यात्रियों को अधिक से अधिक कंफर्म सीटें उपब्लध कराने के साथ ही ट्रेनों को चलाने का खर्च बचाने के लिए भारतीय रेलवे अपनी सभी प्रीमियम ट्रेनों को हेड ऑन जनरेशन (HOG) तकनीक के जरिए चलाने की योजना पर काम कर रही है. कुछ ट्रेनों को पहले से इस तकनीक के तहत चलाया जा रहा है. SER जोन ने कहा कि छह ट्रेनें अब दो कारों के बजाय केवल एक पावर कार के साथ चलेंगी और यह HOG तकनीक से संचालित होंगी. बता दें कि इससे बड़े पैमाने पर डीजल की बचत होगी.

    ये छह ट्रेनें चलेंगी HOG तकनीक से
    SER से HOG तकनीक पर चलने वाली छह ट्रेनें
    02883/02884 दुर्ग-निजामुद्दीन-दुर्ग (02883/02884 Durg-Nizamuddin-Durg), एक्सप्रेस स्पेशल (Express special), 08201/08202 दुर्ग-नौतनवा-दुर्ग एक्सप्रेस स्पेशल (08201/08202 Durg-Nautanwa-Durg Express Special), 08203/08204 दुर्ग-कानपुर-दुर्ग एक्सप्रेस स्पेशल (08203/08204 Durg-Kanpur-Durg Express Special)हैं.
    रेलवे इस ट्रेनों में क्रमशः 25, 26 और 28 मार्च तक द्वितीय श्रेणी के सामान्य कोच (second class general coach)जोड़ेगा. भारतीय रेलवे द्वारा सामान्य सेवाएं फिर से शुरू किए जाने के बाद SER ने HOG तकनीक से और अधिक ट्रेनों के संचालन की योजना बनाई है.

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    जानें, कैसे काम करेगा HOG तकनीक
    रेलगाड़ियों में चलने वाले इलेक्ट्रिक इंजन को चलाने के लिए ओवरहेड वायर से बिलजी की सप्लाई की जाती है. इसी बिजली से ताकत लेकर इंजन चलता है. सामान्य एसी गाड़ियों में दो पावर कार लगी होती हैं. जो बड़े जनरेटर होते हैं और इनसे मिलने वाली बिजली से गाड़ी के सभी डिब्बों को जरूरत के अनुरूप बिजली की आपूर्ति की जाती है. वहीं HOG तकनीक के तहत इंजन को ओवरहेड वायर से मिलने वाली बिजली को रेलगाड़ी के हर डिब्बे तक इंजन के जरिए ही पहुंचाया जाता है. ऐसे में डिब्बों में पंखे, एसी, लाइट आदि जलाने के लिए इंजन से ही बिजली की सप्लाई भेजी जाती है.

    जानें, HOG तकनीक के बेनेफिट्स

    • ईंधन के रूप में डीजल की खपत में कमी जो राजस्व बचाने में मदद करती है.

    • वायु प्रदूषण में कमी.

    • जनरेटर कारों को हटाने के कारण ध्वनि प्रदूषण में कमी.

    • एक यात्री कोच के अतिरिक्त रेलवे द्वारा अधिक यात्रियों को ले जाया जा सकता है. यात्रियों को कंफर्म सीटें मिलेंगी.

    • ट्रेनों में आग संबंधित घटनाएं कम होने की संभावना होगी.


    यात्रियों को मिलेगा कंफर्म टिकट
    HOG तकनीक के प्रयोग से ट्रेन के डिब्बों में बिजली की सप्लाई इंजन के जरिए होने के चलते पावर कार की जरूरत खत्म हो जाएगी. एक AC ट्रेन में सामान्य तौर पर दो पावर कार लगाई जाती हैं जिनकी जरूरत हेड ऑन जनरेशन (एचओजी) तकनीक के प्रयोग के दौरान नहीं होती है. ऐसे में इन पावर कार को हटा कर इनकी जगह पर सामान्य यात्री डिब्बे लगाए जा सकते हैं. यदि किसी ट्रेन में दो डिब्बे बढ़ा दिए जाते हैं तो लगभग 140 यात्रियों को रेलगाड़ी में आसानी से सीट उपलब्ध उपलब्ध कराई जा सकेगी. सभी प्रीमियम ट्रेनों में HOG तकनीक के प्रयोग से हर दिन इन ट्रेनों में लगभग 4 लाख तक अतिरिक्त सीटें उपलब्ध होने की संभावना जताई जा रही है. इस तकनीक की वजह से रेलवे को ईंधन में सालाना 6000 करोड़ रुपए की बचत होगी.

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