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    दिल्‍ली से कानपुर के बीच नए ट्रैक पर दौडेंगी ट्रेन, पुराने ट्रैक पर भी बढ़ेगी रफ्तार

    दिल्‍ली से कानपुर के बीच नए ट्रैक पर अगले महीने से ट्रेनें दौड़ना शुरू होंगी.
    दिल्‍ली से कानपुर के बीच नए ट्रैक पर अगले महीने से ट्रेनें दौड़ना शुरू होंगी.

    भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने बताया कि दिल्‍ली-कानपुर के बीच डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) का नया सेक्‍शन अलग महीने से शुरू हो जाएगा. इससे किसी भी मालगाड़ी (Goods Trains) को पटना से हावड़ा पहुंचने में अब के मुकाबले 2 घंटे कम लगेंगे. इससे पुराने ट्रैक पर पैसेंजर ट्रेनों (Passenger Trains) की रफ्तार भी बढ़ेगी. साथ ही नई ट्रेनें (New Trains) भी चलाई जा सकेंगी.

    • News18Hindi
    • Last Updated: November 21, 2020, 2:43 PM IST
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    चंदन जजवाड़े

    नई दिल्‍ली. भारतीय रेलवे (Indian Railways) कोरोना वायरस के कारण लगाए गए लॉकडाउन में लगातार बढ़ाई जा रही ढील के बाद भी अभी सीमित ट्रेनें (Limited Trains) ही चला रहा है. रेलवे जरूरत के मुताबिक नई स्‍पेशल ट्रेनें (Special Trains) शुरू कर रहा है ताकि यात्रियों की मांग भी पूरी की जा सके और बेवजह की परिचालन लागत (Operation Cost) से भी बचा जा सके. इस दौरान ट्रैक पर कम ट्रेनें दौड़ने का फायदा उठाते हुए रेलवे ने लंबे समय से अधर में लटकी कई परियोजनाएं (Pending Projects) पूरी कर ली हैं. इसी कड़ी में पूरे किए गए दिल्‍ली से कानपुर (Delhi-Kanpur) के बीच नए ट्रैक पर अगले महीने से ट्रेनें दौड़नी शुरू हो जाएंगी. वहीं, इससे पुराने ट्रैक पर ट्रेनों की रफ्तार भी बढ़ जाएगी.

    दिल्‍ली से पटना/हावड़ा पहुंचने में लगेंगे 2 घंटे कम
    इंडियन रेलवे के मुताबिक, दिल्‍ली से कानपुर के बीच तैयार किया गया नया डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) अगले महीने से शुरू हो जाएगा यानी अब गुड्स ट्रेनें इस नए ट्रैक पर रफ्तार भरेंगी. इससे दिल्‍ली से बिहार के पटना और पश्चिम बंगाल के हावड़ा पहुंचने में किसी भी मालगाड़ी को अब से 2 घंटे कम लगेंगे. यही नहीं, मौजूदा ट्रैक से मालगाड़ी के हटने के कारण यात्री ट्रेनों की रफ्तार में भी इजाफा होगा. साथ ही रेलवे नई ट्रेनें भी चला सकेगा. माना जा रहा है कि नए डीएफसी के शुरू होने के बाद रेलवे की आमदनी में बड़ा मुनाफा होगा. वहीं, पैसेंजर ट्रेनों की रफ्तार बढ़ने के कारण सफर में कम समय लगने से यात्रियों को भी फायदा होगा. रेलवे के मुताबिक, अगले महीने कानपुर से खुर्जा के बीच डीएफसी पर गुड्स ट्रेनें शुरू हो जाएंगी.
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    सेक्‍शन पर अप-डाउन में 160 ट्रेनों का है लोड
    रेलवे ने बताया कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का 350 किमी सेक्शन दिसंबर 2020 में शुरू होने वाला है. यह कानपुर के पास भावपुर से खुर्जा के बीच का सेक्शन है. यह सेक्शन डीएफसीसी के ईस्टर्न कॉरिडोर पर मौजूद है. इस सेक्शन पर फिलहाल 40 मालगाड़ियां और 40 पैसेंजर ट्रेनें चलती हैं यानी 80-80 ट्रेनों का लोड अप व डाउन दोनों लाइनों पर है. इस सेक्शन के शुरू होते ही मालगाड़ियों को पुरानी लाइन से हटाकर नए ट्रैक पर शिफ्ट कर दिया जाएगा. इस तरह से रेलवे की पुरानी लाइन पर ट्रैफिक का लोड कम हो जाएगा और ट्रेनें भी समय पर चलना शुरू हो जाएंगी. साथ ही उनकी स्पीड बढ़ाना आसान हो जाएगा. यह दोनों कॉरिडोर साल 2022 तक पूरा कर लिया जाएगा.

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    रेलवे दो डेडिकेटेड कॉरिडार का कर रहा निर्माण
    डीएफसीसी को भारतीय रेल में बदलाव के लिहाज से बहुत बड़ा काम माना जाता है. रेलवे फिलहाल मालगाड़ियों के लिए डेडिकेटेड दो कॉरिडार का निर्माण कर रहा है. इसका ईस्टर्न कॉरिडोर लुधियाना से कोलकाता के पास दानकुनी तक 1856 किमी लंबा है. वेस्टर्न कॉरिडोर दिल्ली के पास दादरी से मुंबई के जवाहर लाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट तक जाता है. यह कॉरिडोर 1506 किमी लंबा है. नया डीएफसी न केवल माल यातायात को रफ्तार देगा बल्कि मुसाफिरों को भी राहत मिलने वाली है. भारत में माल यातायात के लिए कुल 6 गलियारे बनने हैं. डीएफसी का इस्टर्न कॉरिडोर पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब को जोड़ेगा. वहीं, वेस्टर्न कॉरिडोर से पूरे एनसीआर, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र को फायदा मिलेगा.

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    रेलवे, यात्रियों और पयार्वरण को होगा बड़ा फायदा
    डीएफसी ट्रैक पर फिलहाल 100 किमी की अधिकतम रफ्तार से मालगाड़ियां दौड़ सकेंगीं. इसकी औसत रफ्तार 70 किमी प्रति घंटा होगी. मौजूदा समय में यह महज 26 किमी प्रति घंटे की औसत रफ्तार से चल पाती हैं. अभी दिल्ली से कोलकाता या मुंबई जाने में 2-3 दिन लग जाता है, जबकि डीएफसी पर 24 घंटे में यह दूरी तय कर ली जाएगी. ईस्टर्न कॉरिडोर के लिए वर्ल्ड बैंक मदद कर रहा है, वहीं वेस्टर्न कॉरिडोर के लिए जापान ने कर्ज दिया है. दोनो कॉरिडोर करीब 90 हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए जा रहे हैं. डीएफसी से न केवल माल यातायात और मुसाफिरों को फायदा होगा बल्कि एक मालगाड़ी के चलने पर सड़क से 1300 ट्रक का लोड कम होगा. इससे हर साल 560 मिलियन टन कार्बन डायऑक्साइड का उत्सर्जन कम होगा.
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