Indian Railways का एक और कारनामा! भारत-पाक के बीच चलने वाली 92 साल पुरानी ट्रेन को किया अपग्रेड

इंडियन रेलवे ने महात्‍मा गांधी की 151वीं जयंती पर मुंबई सेंट्रल और अमृतसर के बीच चलने वाली गोल्‍डन टेंपल मेल को नए स्‍वरूप में पेश किया है.
इंडियन रेलवे ने महात्‍मा गांधी की 151वीं जयंती पर मुंबई सेंट्रल और अमृतसर के बीच चलने वाली गोल्‍डन टेंपल मेल को नए स्‍वरूप में पेश किया है.

भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने मुंबई सेंट्रल-अमृतसर गोल्‍डन टेम्‍पल मेल (Mumbai Central–Amritsar Golden Temple Mail) के सभी चार कंवेंशनल रैक्‍स (Conventional Rakes) को एलएचबी रैक्‍स (LHB Rakes) से बदल दिया है. आजादी से पहले ये ट्रेन फ्रंटियर मेल (Frontier Mail) के नाम से वर्तमान पाकिस्‍तान के पेशावर शहर (Peshawar City) तक जाती थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 5, 2020, 7:40 PM IST
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नई दिल्‍ली. भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने 92 साल पुरानी गोल्‍डन टेंपल मेल (Golden Temple Mail) के पारंपरिक रैक्‍स को आधुनिक एलएचबी रैक्‍स (LHB Rakes) से तब्‍दील कर नया कारनामा कर डाला है. आजादी से पहले इस ट्रेन को फ्रंटियर मेल (Frontier Mail) के नाम से पहचाना जाता था. रेलवे ने महात्‍मा गांधी (Mahatma Gandhi) की 151वीं जयंती के मौके पर गोल्‍डन टेंपल मेल के 92 गौरवशाली वर्षों की यात्रा को याद किया. बंटवारे से पहले फ्रंटियर मेल वर्तमान पाकिस्‍तान के पेशावर शहर (Peshawar City) तक जाती थी.

फ्रंटियर मेल से जुड़ी हैं ऐतिहासिक यादें, अब इसमें होंगे 22 कोच
रेलवे ने कहा कि फ्रंटियर मेल ब्रिटिश इंडिया (British India) की सबसे प्रतिष्ठित ट्रेनों में शामिल थी. इस ट्रेन के साथ कई ऐतिहासिक यादें जुड़ी हुई हैं. राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी ने दांडी यात्रा (Dandi March) समेत कई मौकों पर फ्रंटियर मेल से सफर किया था. रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि इस समय स्‍पेशल ट्रेन के तौर पर चलाई जा रही ट्रेन संख्‍या 12903/12904 के चारों कंवेंशनल रैक्‍स बदल दिए गए हैं. अब इसमें 22 बोगियां (Coaches) होंगी, जिनमें फर्स्‍ट क्‍लास, एसी 2-टियर, एसी 3-टियर, स्‍लीपर, सेकेंड क्‍लास और एक पैंट्री कार शामिल है.

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लोगों को ज्‍यादा आरामदायक और सुरक्षित यात्रा का मिलेगा अनुभव


अधिकारी ने कहा कि एलएचबी रैक्‍स से ना सिर्फ पैसेंजर्स को ज्‍यादा आरामदायक सफर का लुत्‍फ मिलेगा बल्कि ये ज्‍यादा सुरक्षित (More Safe) भी होगा. उन्‍होंने बताया कि कोविड-19 (COVID-19) के कारण पेश आने वाली कई चुनौतियों के बीच सावधानी बरतते हुए सभी बोगियों को कम समय में तैयार किया गया. बता दें कि एलएचबी कोचेज पारंपरिक रैक्‍स के मुकाबले हल्‍के होते हैं. वहीं, ये तेज रफ्तार के साथ ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों को ले जाने में सक्षम (Carrying Capacity) होते हैं. सुरक्षा के नजरिये से देखा जाए तो दुर्घटना होने पर एलएचबी कोच एक दूसरे के ऊपर नहीं चढ़ते (Anti-Climbing Features) हैं.

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इंडियन रेलवे को इनके रखरखाव पर नहीं करना पड़ेगा ज्‍यादा खर्च
एलएचबी कोच का इंटीरियर आईसीएफ कोच से बेहतर होता है. इनके रखरखाव (Maintenance) की भी कम जरूरत पड़ती है यानी रेलवे को इस पर ज्‍यादा खर्च नहीं करना होगा. लंबी दूरी की यात्रा के दौरान एलएचबी कोच के सभी फीचर्स के कारण लोगों को ज्‍यादा आरामदायक और सुरक्षित सफर (Safe Journey) का अनुभव मिलेगा. ये कोच भारतीय रेलवे की ओर से ग्राहकों की मांग और अपेक्षाओं को पूरा करने के प्रयास में लगातार सुधार की राह आसान बनाते हैं. गोल्‍डन टेंपल मेल में किए गए ये बदलाव कोरोना संकट के मुश्किल दौर में पश्चिमी रेलवे के लिए एक और मील का पत्थर है.
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