अब तक के सबसे निचले स्तर पर रुपया, एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 71 रुपये

अब तक के सबसे निचले स्तर पर रुपया, एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 71 रुपये
कारोबार के शुरुआत कुछ मिनटों में ही रुपये ने 71 रुपये/डॉलर के स्तर को भी छू लिया.

महीने के अंत में डॉलर की खरीदारी से रुपये पर दबाव बढ़ रहा है. साथ ही ग्लोबल चिंताओं से भी रुपये पर दबाव बना है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 31, 2018, 11:21 AM IST
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भारतीय रुपये में गिरावट का दौर जारी है. हफ्ते के आखिरी कारोबारी सत्र शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 21 पैसे की गिरावट के साथ 70.95 के स्तर पर खुला. कारोबार के शुरुआत कुछ मिनटों में ही रुपये ने 71 रुपये/डॉलर के स्तर को भी छू लिया. वहीं, गुरुवार के कारोबारी सत्र में रुपया 70.74 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ था. आपको बता दें कि इस साल अभी तक भारतीय रुपया 10 फीसदी से ज्यादा कमजोर हो चुका है. ऐसे में आम आदमी और सरकार दोनों की मुश्किलें बढ़ गई है. रुपये में कमजोरी से देश में पेट्रोल-डीजल समेत कई चीजें महंगी हो रही है. आपको बता दें कि एक्सपर्ट्स का मानना है कि रुपये में और बड़ी गिरावट की आशंका नहीं है. भारतीय रुपये के 72 प्रति डॉलर के नीचे जाने की आशंका नहीं है.

भारतीय रुपया गिरा! जानिए आपको कितना नुकसान होगा?


क्यों गिर रहा है भारतीय रुपया-महीने के अंत में डॉलर की खरीदारी से रुपये पर दबाव बढ़ रहा है. साथ ही ग्लोबल चिंताओं से भी रुपये पर दबाव बना है. दक्षिण अफ्रीका और तुर्की की करेंसी भी गिरी हैं. वहीं जुलाई व्यापार घाटा 18 अरब डॉलर होने से स्थिति बिगड़ी है. ट्रेडर्स, हेज फंड्स ने जुलाई तक लॉन्ग पोजीशन बनाई है.



कितना और गिरेगा रुपया? बिजनेस न्यूज चैनल सीएनबीसी-आवाज़ ने देश के कई बड़े बैंक अधिकारियों से बात-चीत की है, उनकी बातचीत में 40 फीसदी बैंकर्स का मानना है कि डॉलर के मुकाबले रुपया 72 तक टूट सकता है, जबकि 20 फीसदी बैंकर्स के मुताबिक डॉलर के मुकाबले रुपया 71.5 तक गिर सकता है. वहीं, 20 फीसदी बैंकर्स ने कहा कि डॉलर के मुकाबले रुपया 74 तक लुढ़क सकता है, जबकि 20 फीसदी बैंकर्स की मानें तो डॉलर के मुकाबले रुपया 73 के स्तर तक आ सकता है. -यह भी पढ़ें:  रुपये में गिरावट पर सरकार ने कहा, ‘चिंता की कोई बात नहीं ’



आम आदमी पर क्या होगा असर
> भारत अपनी जरूरत का करीब 80 फीसदी पेट्रोलियम प्रोडक्‍ट आयात करता है.
> रुपये में गिरावट से पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का आयात महंगा हो जाएगा.
> तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल की घरेलू कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती हैं.
> डीजल के दाम बढ़ने से माल ढुलाई बढ़ जाएगी, जिसके चलते महंगाई में तेजी आ सकती है.
> इसके अलावा, भारत बड़े पैमाने पर खाद्य तेलों और दालों का भी आयात करता है.
> रुपये के कमजोर होने से घरेलू बाजार में खाद्य तेलों और दालों की कीमतें बढ़ सकती हैं.
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