डॉलर को रुपये की चिट्ठी: हमारे बीच बढ़ी दूरियां दोस्‍ती को खत्‍म कर रही है

डॉलर को रुपये की चिट्ठी: हमारे बीच बढ़ी दूरियां दोस्‍ती को खत्‍म कर रही है
डॉलर के मुकाबले रुपए लगातार गिरे जा रहा है. जिससे कई ज्यादातर चीजें महंगी हो रही हैं. चाहे वह पेट्रोल-डीजल हो या गोल्ड रुपया के गिरने के कारण इन चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं. आम लोग जहां इससे परेशान है तो वहीं कुछ लोगों को इससे फायदा भी हो रहा है. आज हम आपको बता रहे हैं उन सेक्टर्स के बारे में जिन सेक्टर्स को रुपया गिरने से फायदा मिल रहा है..

मेरी सरकार और केंद्रीय बैंक हमारे रिश्ते को बचाने के लिए मीटिंग कर रहे हैं, लेकिन तुम जानते हो कि मैं यह नहीं समझ सकता कि जब क्रूड ऑयल के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं तो वे क्या कर सकते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 4, 2018, 8:30 PM IST
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(दिनेश उन्नीकृष्णन) 

मेरे प्रिय डॉलर

आज मुझे यह कहने में नफरत हो रही है लेकिन मुझे कहना है. हमारी दोस्ती अलग हो रही है. मुझे 40 और 50 के वो दशक याद है जब हम दोनों काफी नजदीक थे. हम मजेदार तरीके से झगड़ा किया करते थ, वह हमारे रिश्ते के अप्स एंड डाउन थे. लेकिन अफसोस यह लंबे वक्त तक नहीं चल सकता, कम से कम आने वाले भविष्य में तो नहीं. हमें अलग होना होगा. दूरियां दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है. सच कहूं तो अब मैंने गिनती बंद कर दी है.



जब मैं यह लिख रहा हूं तो मैं तुमसे 71.37 पॉइंट दूर हूं और इससे ज्यादा दूर होता जा रहा हूं. यह एक आभासी गिरावट है और यह थम नहीं रही है. मेरे डॉलर, तुम्हे सच बताऊं इस दूरी से मैं तुम्‍हे देख भी नहीं पा रहा हूं. मेरी आंखें धुंधला रही हैं और जब मैं ऐसा कह रहा हूं तब भी मैं नीचे गिर रहा हूं. क्या हालात 80 या फिर 90 के दशक जैसे हो सकते हैं? इस दूरी पर तुम मेरे लिए केवल यादभर बन जाओगे. डॉलर-रुपये की तुलना प्रासंगिकता खो देगी. मैंने तुम्हे नाईजीरियाई नाइरा, तुर्की की लीरा और यहां तक कि पाकिस्तानी रुपये से बहुत बुरी तरह से अलग होते हुए देखा है. क्या यहीं अंजाम हमारा होने वाला है? मेरे प्यारे दोस्त तुम्हे जाने देना मेरे लिए बहुत दुखद होगा.
लेकिन मुझे पता है, मुझे पता है कि चीजें कहा गलत हुई.

जब मैं यह लिख रहा था, मेरी सरकार और केंद्रीय बैंक हमारे रिश्ते को बचाने के लिए मीटिंग कर रहे हैं, लेकिन तुम जानते हो कि मैं यह नहीं समझ पा रहा हूं कि जब क्रूड ऑयल के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं तो वे क्या कर सकते हैं. मैं तुम्हें जानता हूं, तुम जहां रहते हो वहां तेल बहुत अधिक चिंता का विषय नहीं है. लेकिन मेरे देश के लिए ऐसा नहीं है, यह मेरे देश के लिए चीजों के बहुत कठिन बनाता है क्योंकि हम घरेलू खपत का 80 प्रतिशत तेल आयात करते हैं. क्या तुम कल्पना करोगे कि पिछले पखवाड़े में कच्चे तेल की कीमत में 7 डॉलर की वृद्धि हुई और इस वक्त क्रूड ऑयल के 75 डॉलर प्रति बैरल जाने की बात हो रही है. इसका नियंत्रण पूरी तरह से अरब के हाथों में है और ओपेक पर हमारा थोड़ा ही नियंत्रण है. मुझे अच्छे संकेत नहीं दिख रहे. मेरे दोस्त मेरे चारों तरफ बहुत अधिक अस्थिरता है.

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यह केवल तेल के बारे में नहीं है. जैसा कि तुम जानते हो कि जब कच्चे तेल की कीमत बढ़ती है तो चालू खाता घाटा (सीएडी) भी बढ़ जाता है. सीएडी पिछले साल के 1.9 प्रतिशत की तुलना में इस साल जीडीपी के 2.5 से 2.9 प्रतिशत तक बढ़ने की उम्मीद है. बढ़ता सीएडी हमेशा से हमारे रिश्ते के लिए एक झटके जैसा रहा है लेकिन क्या तुम्हें याद है कि झटका केवल यही नहीं है.

तुर्की एक ज्वलंत मुद्दा है. तुम्हारे देश ने व्यापार युद्ध शुरू किया और लीरा इस साल 40 प्रतिशत तक गिर गई. तुर्की ने इस साल ज्‍यादातर मुद्राओं की दोस्‍ती खराब की है. फिर दूसरी तरफ चीन है. किसी को पता नहीं है कि चीन तुम्हारे साथ अव्यवस्थित शीत युद्ध के दौर में क्या करना चाहता है और इसका दुनियाभर की मुद्राओं पर क्या असर होगा. इनके अलावा तुम्हारे देश के आर्थिक परिदृश्य में उछाल भी हमारी दोस्ती पर भारी पड़ रहा है.

मुझे इस वक्त आरबीआई से कोई खास उम्मीद नहीं है. हालांकि 2013 में ऐसी बात नहीं थी. आरबीआई यह सुनिश्चित करने के लिए आक्रामक था कि हम अलग नहीं होंगे. रघुराम राजन याद हैं? वह इंसान जिसे कुछ लोग रॉक स्टार बुलाते थे, जिसने हमारी दोस्ती को बचाने के लिए कुछ अलग हटकर किया था? निश्चित तौर पर वह दिलचस्प वक्त था. हमारे रिश्ते को बनाए रखने के लिए आरबीआई ने उपायों की एक श्रृंखला शुरू की जिससे हमें मदद मिली.

इस बार उर्जित पटेल की बारी है. लेकिन क्या तुम जानते हो कि मुझे लगता है कि उन्‍हें कुछ खास फर्क नहीं पड़ता और वह मुझे और गिराना चाहते हैं. अगर ऐसा नहीं तो फिर आरबीआई हमारी दुर्दशा पर कड़ा एक्शन क्यों नहीं ले रहा है? इस पर अभी आधिकारिक तौर पर कुछ भी नहीं कहा गया, क्या कहा गया? व्यापारियों ने मुझे बताया कि कहीं कोई आक्रमक हस्तक्षेप नहीं है, राज्य द्वारा संचालित बैंक की तरफ से ज्यादा डॉलर की बिक्री भी नहीं की जा रही.

लगता है कि आरबीआई ने मेरी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए और निर्यातकों को खुश करने के लिए मुझे गिराने का फैसला किया है. लेकिन आरबीआई ऐसा करके ज्‍यादा खुश नहीं हो सकती. मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी के सामने यह उर्जित पटेल की टीम को परेशान करेगा. शायद उन्हें मुद्रास्फीति दबाव से निपटना होगा और मजबूत नीति बनाने पर सोचना होगा.

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मुझे लगता है यह ऐसे ही है मेरे दोस्त. जैसे ही मैं यह पत्र लिखना समाप्त किया मैंने विशेषज्ञों की आवाज सुनी जो मेरे 72-73 के स्तर गिरने की भविष्यवाणी कर रहे हैं. जैसा कि मैंने पहले ही कहा था कि मैंने हम दोनों के बीच की दूरी को गिनना बंद कर दिया है. भारी मन के साथ मैं यह कहकर अपनी बात समाप्त कर रहा हूं कि मुझे एडम गिल्मर से नफरत है. वो वही हैं जिन्होंने 2014 में कहा था कि यदि नरेंद्र मोदी सत्ता में आते हैं तो हम दोनों पास आएंगे और मैं 40 रुपये प्रति डॉलर हो जाऊंगा. क्या यह एक मजाक था, हमें झूठी आशा दे रहा था? दोस्त मैं तुम्हें बताना चाहता हूं कि मैंने अभी पूरी उम्मीद नहीं खोई है. मेरी अर्थव्यवस्था एक बदलाव की ओर है. उम्मीद है जल्द ही पास-पास होंगे.
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