अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया सबसे निचले स्तर पर, आम आदमी पर होगा ये असर

एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया अब तक के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है. इससे आपका क्या नुकसान होगा. आइए जानें...

  • Last Updated: July 20, 2018, 5:41 PM IST
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भारतीय रुपये में जारी गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही है. शुक्रवार को  एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया अपने अब तक के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है. रुपया 69.03 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला. इससे पहले गुरुवार को रुपया  पैसे की कमजोरी के साथ 69.05 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ था. आपको बता दें कि अर्थव्यवस्था में आ रहे तेज सुधार के चलते अमेरिकी करेंसी डॉलर में मजबूती देखने को मिल रही है. इसीलिए दुनियाभर की करेंसी में गिरावट है.

 केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद रुपया डॉलर के मुकाबले सबसे निचले स्तर पर है. रुपया टूटकर 69 का आंकड़ा छू गया. रुपए के टूटने के बाद विपक्षी दलों सहित हर कोई इस पर सवाल उठा रहे हैं. लेकिन क्या आप जानिए कि रुपया कमजोर होगा तो आपका क्या नुकसान होगा?

क्यों आई रुपये में गिरावट-ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि अमेरिकी सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व के चेयरमैन ने अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक बयान दिया है. इसी वजह से डॉलर में तेजी आई है और दुनियाभर की करेंसी के साथ-साथ भारतीय रुपया भी लुढ़क गया है.



 अंतरराष्ट्रीय बाजार में रुपए के टूटने के दो प्रमुख कारण हैं. पहला क्रूड ऑयल यानि कच्चे तेल के बढ़ते दाम. दूसरा चीन-अमेरिका सहित देशों के बीच बढ़ते ट्रेड वॉर के चलते. इसका सीधा असर देश में आयात होने वाले सामानों पर पड़ेगा. मतलब कंप्यूटर, इम्पोर्टेड मोबाइल और सोना महंगा होगा.



रुपये की चाल पर एक नजर- गुरुवार को डॉलर की तुलना में रुपए ने 69 का स्तर तोड़ दिया था. रुपया 43 पैसे कमजोर होकर 69.05 के स्तर पर बंद हुआ था. यह रुपए का आलटाइम लो क्लोजिंग था. यह रुपए में 29 मई के बाद एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट थी. इससे पहले 28 जून को रुपए ने दिन के कारोबार के दौरान प्रति डॉलर 69.10 का ऑल टाइम लो टच किया था, हालांकि बाद आरबीआई के दखल के बाद इसमें कुछ सुधार दर्ज किया गया था.

 रुपए के गिरने के पीछे दो प्रमुख कारणों में एक कच्चे तेल के बढ़ते दाम हैं. इसका सीधा मतलब की तेल कंपनियां देश में पेट्रोल के दाम बढ़ाएंगी और असर आपकी जेब पर होगा.

अब आगे क्या- इस साल रुपया 10 फीसदी लुढ़का है. वहीं रुपये में गिरावट से घरेलू कमोडिटी बाजार पर बड़ा असर देखने को मिल रहा है. बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि रुपये पर घरेलू नहीं पर ग्लोबल असर ज्यादा है. डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत 68.5 के आसपास रह सकती है. वहीं, एसबीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि थोड़े समय के लिए डॉलर की कीमत 70 रुपये तक जा सकती है. एडेलवाइस का भी मानना है कि डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत 70 तक जा सकती है. रेलिगेयर ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि क्रूड और युआन से रुपये की चाल तय होगी. डॉलर की कीमत ज्यादा से ज्यादा 69.5 रुपये तक जा सकती है. हाल फिलहाल डॉलर की कीमत 70 रुपये तक जाने की संभावना है. इस साल के अंत तक डॉलर की कीमत 72 तक जा सकती है और 2019 के अंत तक डॉलर की कीमत 71 तक संभव है.

आम आदमी पर क्या होगा असर
> भारत अपनी जरूरत का करीब 80 फीसदी पेट्रोलियम प्रोडक्‍ट आयात करता है.
> रुपये में गिरावट से पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का आयात महंगा हो जाएगा.
> तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल की घरेलू कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती हैं.
> डीजल के दाम बढ़ने से माल ढुलाई बढ़ जाएगी, जिसके चलते महंगाई में तेजी आ सकती है.
> इसके अलावा, भारत बड़े पैमाने पर खाद्य तेलों और दालों का भी आयात करता है.
> रुपये के कमजोर होने से घरेलू बाजार में खाद्य तेलों और दालों की कीमतें बढ़ सकती हैं.

 अगर रुपया डॉलर के मुकाबले ज्यादा गिरेगा तो आरबीआई ब्याज की दरों में इजाफा कर सकती है. इसका सीधा असर लोगों को लोन और होम लोन पर बढ़ेगा. उनकी ईएमआई बढ़ेगी.
First published: July 20, 2018, 10:50 AM IST
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