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अब कोरोना वायरस की वजह से कमजोर हुआ भारतीय रुपया, इससे आम आदमी पर होगा सीधा असर

News18Hindi
Updated: March 3, 2020, 7:21 PM IST
अब कोरोना वायरस की वजह से कमजोर हुआ भारतीय रुपया, इससे आम आदमी पर होगा सीधा असर
मंगलवार को रुपया 56 पैसे की भारी गिरावट के साथ 73.29 के स्तर पर बंद हुआ.

चीन के कोरोना वायरस की वजह से आई शेयर बाजार में गिरावट रुपये की कमजोरी की मुख्य वजह है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर रुपये में और गिरावट बढ़ती है तो सरकार के साथ-साथ आम आदमी की मुश्किलें भी बढ़ जाएंगी.

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नई दिल्ली. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये (Indian Rupee Weakness) में लगातार कमजोरी आ रही है. मंगलवार को रुपया 56 पैसे की भारी गिरावट के साथ 73.29 के स्तर पर बंद हुआ. इस कमोजरी के पीछे चीन के कोरोना वायरस की वजह से भारतीय शेयर बाजार लुढ़का है. पिछले एक महीने से निवेशकों ने कोरोना वायरस से डरकर अपने पैसों को सेफ इन्वेस्टमेंट कहे जाने वाले सोने में लगाया है. इसीलिए शेयर बाजार लगातार गिर रहे है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि फरवरी महीने में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 12,684.30 करोड़ रुपये और मार्च में अभी तक 1,354.72 करोड़ रुपये निकाले है. अगर रुपये में और गिरावट बढ़ती है तो सरकार के साथ-साथ आम आदमी की मुश्किलें भी बढ़ जाएंगी. क्योंकि भारत अपनी जरुरत का 80 फीसदी कच्चा तेल और कई चीजें विदेशों से खरीदता है. ऐसे में इंपोर्ट करना महंगा हो जाएगा. लिहाजा भारतीय सरकार को ज्यादा खर्च करना पड़ेगा. वहीं, कच्चा तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीज़ल के दाम अब बढ़ सकते है.

आम आदमी पर क्या होगा असर
>> भारत अपनी जरूरत का करीब 80 फीसदी पेट्रोलियम प्रोडक्‍ट आयात करता है.
>> रुपये में गिरावट से पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का आयात महंगा हो जाएगा.



>> तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल की घरेलू कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती हैं.
>> डीजल के दाम बढ़ने से माल ढुलाई बढ़ जाएगी, जिसके चलते महंगाई में तेजी आ सकती है.


>> इसके अलावा, भारत बड़े पैमाने पर खाद्य तेलों और दालों का भी आयात करता है.
>> रुपये के कमजोर होने से घरेलू बाजार में खाद्य तेलों और दालों की कीमतें बढ़ सकती हैं.

क्यों होता भारत की अर्थव्यवस्था पर असर- इकोनॉमिक सर्वे में बताया गया था कि एक अमेरिकी डॉलर के भाव में एक रुपये की वृद्धि से तेल कंपनियों पर 8,000 करोड़ रुपये का बोझ पड़ता है. इससे उन्हें पेट्रोल और डीजल के भाव बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ता है. पेट्रोलियम उत्पाद की कीमतों में 10 फीसदी वृद्धि से महंगाई करीब 0.8 फीसदी बढ़ जाती है. इसका सीधा असर खाने-पीने और परिवहन लागत पर पड़ता है.

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कैसे होता है कमज़ोर और मज़बूत होता है भारतीय रुपया - एक्सपर्ट्स बताते हैं कि रुपये की कीमत पूरी तरह डिमांड एवं सप्लाई पर निर्भर करती है.इस पर इंपोर्ट और एक्सपोर्ट का भी असर पड़ता है.
हर देश के पास दूसरे देशों की मुद्रा का भंडार होता है, जिससे वे लेनदेन यानी सौदा (आयात-निर्यात) करते हैं. इसे विदेशी मुद्रा भंडार कहते हैं. समय-समय पर इसके आंकड़े रिजर्व बैंक की तरफ से जारी होते हैं.



अगर आसान शब्दों में समझें तो मान लीजिए भारत अमेरिका से कुछ कारोबार कर रहा हैं. अमेरिका के पास 67,000 रुपए हैं और हमारे पास 1000 डॉलर.अगर आज डॉलर का भाव 67 रुपये है तो दोनों के पास फिलहाल बराबर रकम है. अब अगर हमें अमेरिका से भारत में कोई ऐसी चीज मंगानी है, जिसका भाव हमारी करेंसी के हिसाब से 6,700 रुपये है तो हमें इसके लिए 100 डॉलर चुकाने होंगे. अब हमारे विदेशी मुद्रा भंडार में सिर्फ 900 डॉलर बचे हैं. अमेरिका के पास 74,800 रुपये. इस हिसाब से अमेरिका के विदेशी मुद्रा भंडार में भारत के जो 67,000 रुपए थे, वो तो हैं ही, लेकिन भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में पड़े 100 डॉलर भी उसके पास पहुंच गए.

अगर भारत इतनी ही इनकम यानी 100 डॉलर का सामान अमेरिका को दे देगा तो उसकी स्थिति ठीक हो जाएगी. यह स्थिति जब बड़े पैमाने पर होती है तो हमारे विदेशी मुद्रा भंडार में मौजूद करेंसी में कमजोरी आती है. इस समय अगर हम अंतर्राष्ट्रीय बाजार से डॉलर खरीदना चाहते हैं, तो हमें उसके लिए अधिक रुपये खर्च करने पड़ते हैं. इस तरह की स्थितियों में देश का केंद्रीय बैंक RBI अपने भंडार और विदेश से खरीदकर बाजार में डॉलर की आपूर्ति सुनिश्चित करता है.

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First published: March 3, 2020, 6:29 PM IST
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