भारतीय रुपये में आ सकती है बड़ी गिरावट, आप पर सीधा होगा ये असर!

भारतीय रुपये में आ सकती है बड़ी गिरावट, आप पर सीधा होगा ये असर!
जुलाई से 5 फीसदी टूटा रुपया

रुपये में कमजोरी का असर अर्थव्यवस्था से लेकर आम आदमी तक पर पड़ता है. जानें आप पर क्या होगा असर?

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 25, 2019, 12:24 PM IST
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नई दिल्ली. एशिया की एकमात्र उभरती करेंसी भारतीय रुपये (India's Rupee) में इस तिमाही कमजोरी आ सकती है. क्योंकि इस सप्ताह एक रिपोर्ट में आर्थिक वृद्धि के छह साल के निचले स्तर पर पहुंचने का अनुमान है. रुपया इस साल जुलाई के अपने हाई से करीब 5 फीसदी टूट चुका है और सार्वजनिक कर्ज के बढ़ते स्तर और नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFC) में कर्ज संकट के कारण इस पर बिकवाली का दबाव है. अगर ऐसा होता है तो देश में महंगाई बढ़ सकती है. ऐसे में आम आदमी के लिए मुश्किलें बढ़ जाएंगी.

मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने इस महीने देश की क्रेडिट रेटिंग आउटलुक को घटाकर निगेटिव कर दिया है. मूडीज ने यह कहते हुए आउटलुक में कटौती की है कि आर्थिक सुस्ती गहरी और अनुमान से काफी लंबी थी. एनडीटीवी में छपी खबर के मुताबिक, मुंबई में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक लिमिटेड के मुख्य अर्थशास्त्री इंद्रनील पान ने कहा, 'इस समय भारत के लिए सबसे बड़ा उभरता जोखिम ग्रोथ में कमजोरी है. राजकोषीय जोखिमों की वजह से शायद रुपये में कमजोरी आएगी. खराब ग्रोथ की स्थिति की वजह से कम पूंजी प्रवाह हो सकता है और यह करेंसी के लिए नकारात्मक हो सकता है.

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भारत की जीडीपी ग्रोथ 4.2 फीसदी रहने का अनुमान- देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने दूसरी तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ (GDP Growth) 4.2 फीसदी रहने का अनुमान जताया है. एसबीआई (SBI) ने कहा है कि ऑटोमोबाइल बिक्री में गिरावट, एयर ट्रैफिक मूवमेंट में कमी, कोर सेक्‍टर ग्रोथ के घटने और कंस्‍ट्रक्‍शन व इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर में निवेश घटने के कारण देश की जीडीपी ग्रोथ में कमी देखने को मिलेगी. बता दें कि जून तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ पहले ही घटकर 6 साल के निचले स्तर 5 फीसदी पर आ गई थी.
रुपया इस महीने गिरकर 72.2425 प्रति डॉलर के स्तर पर आ गया, जो सितंबर में नौ महीने के सबसे निचले स्तर 72.4075 से दूर है.

आम आदमी पर क्या होगा असर?

>> पेट्रोल-डीजल होगा महंगा- भारत अपनी जरूरत का करीब 80 फीसदी पेट्रोलियम प्रोडक्‍ट आयात करता है. रुपये में गिरावट से पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का आयात महंगा हो जाएगा. तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल की घरेलू कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती हैं.
बढ़ेगी महंगाई- डीजल के दाम बढ़ने से माल ढुलाई बढ़ जाएगी, जिसके चलते महंगाई में तेजी आ सकती है. इसके अलावा, भारत बड़े पैमाने पर खाद्य तेलों और दालों का भी आयात करता है. रुपये के कमजोर होने से घरेलू बाजार में खाद्य तेलों और दालों की कीमतें बढ़ सकती हैं.

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>> विदेश में पढ़ना और घूमना हो जाएगा महंगा- विदेश में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों पर रुपये की कमजोरी का खासा असर पड़ेगा. इसके चलते उनका खर्च बढ़ जाएगा. उन्हें चीजों के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी. इसके अलावा विदेश यात्रा पर जाने वाले भारतीयों को भी ज्यादा खर्च करना पड़ेगा.
> इनको होगा फायदा- उधर, रुपये में कमजोरी भारतीय आईटी कंपनियों के लिए अच्छी खबर है. इससे उनकी कमाई में इजाफा होगा. इसी तरह निर्यातकों को फायदा होगा, जबकि आयातकों को नुकसान होगा.

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