अमेरिकी डॉलर के सामने भारत का रुपया हुआ कमजोर, अब आपकी जेब पर होगा ये असर

अमेरिकी डॉलर के सामने भारत का रुपया हुआ कमजोर, अब आपकी जेब पर होगा ये असर
अमेरिकी डॉलर के सामने भारत का रुपया हुआ कमजोर, अब आपकी जेब पर होगा ये असर

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपए में बड़ी कमजोरी से सरकार के साथ आपकी मुश्किलें भी बढ़ सकती हैंं. इससे पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ती हैं जिसका सीधा असर आपके बजट पर होता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 25, 2019, 6:38 PM IST
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भारतीय रुपये में फिर से कमजोरी आने लगी है. गुरुवार के सत्र में एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 38 पैसे की कमजोरी के साथ 70.25 के स्तर पर बंद हुआ है. माना जा रहा है कि रुपया 72 रुपये प्रति डॉलर का स्तर छू सकता है. लेकिन अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपए में बड़ी कमजोरी से सरकार के साथ आपकी मुश्किलें भी बढ़ सकती हैंं. इससे पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ती हैं जिसका सीधा असर आपके बजट पर होता है.

भारत का रुपया क्यों हुआ कमजोर- एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कच्चे तेल में आई तेजी से रुपए पर दबाव बढ़ गया है. डॉलर के मुकाबले रुपए में कमजोरी गहरा गई है. डॉलर की कीमत 70 रुपए के पार चली गई है जो पिछले करीब 7 हफ्ते का ऊपरी स्तर है.

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रूस की ओर से कच्चे तेल का उत्पादन घटा दिया गया है. इसी वजह से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर क्रूड की कीमतें इस साल के नए शिखर पर पहुंच गई है.
इसके अलावा अन्य करेंसी के मुकाबेल डॉलर में आई मजबूती से भी रुपया कमजोर हुआ है. इस साल डॉलर में करीब 2.5 फीसदी की मजबूती आ चुकी है. ऐसे में रुपए पर चौतरफा मार पड़ रही है.

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(1) रुपए में गिरावट से बढ़ सकती है महंगाई: भारत अपनी जरूरत का करीब 80 फीसदी पेट्रोलियम प्रोडक्‍ट आयात करता है. रुपए में गिरावट से पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का आयात महंगा हो जाएगा. तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल की घरेलू कीमतों में बढ़ोत्‍तरी कर सकती हैं. डीजल के दाम बढ़ने से माल ढुलाई बढ़ जाएगी, जिसके चलते महंगाई में तेजी आ सकती है. इसके अलावा, भारत बड़े पैमाने पर खाद्य तेलों और दालों का भी आयात करता है. रुपए के कमजोर होने से घरेलू बाजार में खाद्य तेलों और दालों की कीमतें बढ़ सकती हैं.

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एक अनुमान के मुताबिक डॉलर के मूल्य में एक रुपए की बढ़ोतरी से तेल कंपनियों पर 8,000 करोड़ रुपए का बोझ बढ़ जाता है. इससे उन्हें पेट्रोल और डीजल की कीमते बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ता है. पेट्रोलियम उत्पाद की कीमतों में 10 फीसदी बढ़ोतरी से महंगाई करीब 0.8 फीसदी बढ़ जाती है. इसका सीधा असर आपने खाने-पीने और परिवहन लागत पर पड़ता है.

(2) विदेश में पढ़ाई हो जाएगी महंगी: विदेश में पढ़ने वाले बच्चों पर खर्चा रुपए की गिरावट के साथ-साथ बढ़ता जाता है. भारतीय छात्रों के लिए यूएस, ब्रिटेन, कनाडा, सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया जैसी जगाहें पढ़ाई के लिहाज से सबसे पसंदीदा ऑप्शन्स हैं. विदेश की यूनिवर्सिटीज में ज्यादा ट्यूशन फीस होती है और अब रुपए की कमजोरी से इन देशों की करेंसी के मुकाबले ज्यादा रुपए आपको खर्च करने होंगे. इससे पढ़ाई का खर्चा बढ़ जाएगा

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(3) महंगी होगी विदेश यात्रा: अगर आप अपने परिवार के साथ विदेश यात्रा की तैयारी कर रहे हैं तो निश्चित तौर पर आपके लिए रुपए की गिरावट एक चिंता की बात है. ऐसा इसलिए क्योंकि अब रुपए के मुकाबले किसी भी करेंसी में बदलवाने पर आपको ज्यादा रुपए का भुगतान करना होगा. हालांकि आपने चाहें फ्लाइट या होटल की बुकिंग करा ली हो लेकिन विदेश में होने वाले खर्चों पर आपको अतिरिक्त रुपए देने होंगे.

(4) दवाओं के दाम पर असर: देश में कई जरूरी दवाएं बाहर से आती हैं. डॉलर के मुकाबले रुपए में गिरावट की वजह से दवाओं के आयात के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती है जिससे वह महंगी हो जाती हैं.

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(5) सरकारी खजाने पर भी दबाव: रुपए में कमजोरी आने से देश के खजाने पर बड़ा असर होता है, क्योंकि इससे सरकार का इंपोर्ट महंगा हो जाता है. जिसके लिए इंपोर्ट पर अधिक पैसे खर्च करने पड़े है. इससे देश के खजाने पर निगेटिव असर होता है. साथ ही उन कंपनियों पर भी निगेटिव असर होता है. जिन्होने डॉलर में कर्ज लिया हुआ है. ऐसे में ब्याज बोझ अधिक होता और कंपनी का मुनाफा गिर जाता है.

...लेकिन इनको होता है फायदा: रुपए में गिरावट का फायदा निर्यातकों खासकर आईटी, फार्मा, टेक्‍सटाइल, डायमंड, जेम्‍स एवं ज्‍वैलरी सेक्‍टर को मिलेगा. इसके अलावा देश से चाय, कॉफी, चावल, गेहूं, कपास, चीनी, मसाले का भी अच्‍छा खासा निर्यात होता है. यानी कृषि और इससे जुड़े उत्‍पाद के निर्यातकों को भी रुपए में गिरावट का लाभ होगा.
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