इस वजह से रुपये में आई जोरदार तेजी, सरकार के साथ-साथ आम आदमी को मिलेगी बड़ी राहत

इस वजह से रुपये में आई जोरदार तेजी, सरकार के साथ-साथ आम आदमी को मिलेगी बड़ी राहत
गुरुवार को डॉलर के मुकाबले रुपये में 56 पैसे की तेजी

गुरुवार को दिनभर के कारोबार के बाद डॉलर के मुकाबले रुपये (Dollar Vs Rupee) में 56 पैसे की तेजी देखी गई है. इसके बाद रुपया 75.04 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ. रुपये में तेजी से कई तरह से भारत को लाभ मिलेगा.

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मुंबई. अमेरिकी मुद्रा (US Dollar) में नरमी तथा घरेलू शेयर बाजारों की तेजी के दम पर गुरुवार को अंतरबैंक मुद्रा बाजार (Forex Market) में रुपया शुरुआती आंकड़ों के आधार पर 56 पैसे की बढ़त लेकर 75.04 प्रति डॉलर पर रहा. कारोबारियों ने बताया कि घरेलू शेयर बाजारों (Share Market) के बढ़त में रहने तथा डॉलर में नरमी रहने से रुपये को समर्थन मिला. दवा कंपनी फाइजर द्वारा कोरोना वायरस के टीके के सकारात्मक परिणाम आने की जानकारी दिये जाने से भी निवेशकों की सेंटीमेंट को बल मिला.

बुधवार को 56 पैसे मजबूत हुआ रुपया
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 75.51 पर खुला और कारोबार के दौरान चढ़ता गया. कारोबार के समाप्त होने के बाद शुरुआती आंकड़ों के आधार पर यह 75.04 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जो पिछले दिवस की तुलना में 56 पैसे मजबूत है. बुधवार को रुपया 75.60 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था. कारोबार के दौरान काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला. इस दौरान रुपया 74.99 प्रति डॉलर के दिवस के उच्चतम स्तर और 75.53 प्रति डॉलर के निचले स्तर के दायरे में रहा.

विदेशी निवेशकों ने निकाले 1,696.48 करोड़ रुपये
इस बीच प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं के बास्केट में डॉलर का सूचकांक 0.26 प्रतिशत गिरकर 96.94 पर आ गया. इस बीच शेयर बाजारों से प्राप्त प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने बुधवार को 1,696.45 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की.



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आम आदमी पर क्या होगा असर?
>> भारत अपनी जरूरत का करीब 80 फीसदी पेट्रोलियम प्रोडक्‍ट आयात करता है. रुपये में मजबूती से पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का आयात सस्ता हो जाएगा.

>> तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल की घरेलू कीमतों में कमी कर सकती हैं. डीजल के दाम गिरने से माल ढुलाई बढ़ जाएगी, जिसके चलते महंगाई में कमी आ सकती है.

>> इसके अलावा, भारत बड़े पैमाने पर खाद्य तेलों और दालों का भी आयात करता है. रुपये के मजबूत होने से घरेलू बाजार में खाद्य तेलों और दालों की कीमतें घट सकती हैं.

कैसे मजबूत और कमजोर होता है भारतीय रुपया?
रुपये की कीमत पूरी तरह डिमांड एवं सप्लाई पर निर्भर करती है. इस पर इंपोर्ट और एक्सपोर्ट का भी असर पड़ता है. हर देश के पास दूसरे देशों की मुद्रा का भंडार होता है, जिससे वे लेनदेन यानी सौदा (आयात-निर्यात) करते हैं. इसे विदेशी मुद्रा भंडार कहते हैं. समय-समय पर इसके आंकड़े रिजर्व बैंक की तरफ से जारी होते हैं.

(1) अगर आसान शब्दों में समझें तो मान लीजिए भारत अमेरिका से कुछ कारोबार कर रहा हैं. अमेरिका के पास 67,000 रुपये हैं और हमारे पास 1000 डॉलर. अगर आज डॉलर का भाव 67 रुपये है तो दोनों के पास फिलहाल बराबर रकम है. अब अगर हमें अमेरिका से भारत में कोई ऐसी चीज मंगानी है, जिसका भाव हमारी करेंसी के हिसाब से 6,700 रुपये है तो हमें इसके लिए 100 डॉलर चुकाने होंगे.

(2) अब हमारे विदेशी मुद्रा भंडार में सिर्फ 900 डॉलर बचे हैं. अमेरिका के पास 74,800 रुपये. इस हिसाब से अमेरिका के विदेशी मुद्रा भंडार में भारत के जो 67,000 रुपये थे, वो तो हैं ही, लेकिन भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में पड़े 100 डॉलर भी उसके पास पहुंच गए.

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(3) अगर भारत इतनी ही इनकम यानी 100 डॉलर का सामान अमेरिका को दे देगा तो उसकी स्थिति ठीक हो जाएगी. यह स्थिति जब बड़े पैमाने पर होती है तो हमारे विदेशी मुद्रा भंडार में मौजूद करेंसी में कमजोरी आती है. इस समय अगर हम अंतरराष्ट्रीय बाजार से डॉलर खरीदना चाहते हैं, तो हमें उसके लिए अधिक रुपये खर्च करने पड़ते हैं. इस तरह की स्थितियों में देश का केंद्रीय बैंक RBI अपने भंडार और विदेश से खरीदकर बाजार में डॉलर की आपूर्ति सुनिश्चित करता है. (भाषा इनपुट के साथ)
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