Corona Impact: विदेश पढ़ने जाने से कतरा रहे हैं भारतीय, 61% ने एक साल के लिए टाली योजना

Corona Impact: विदेश पढ़ने जाने से कतरा रहे हैं भारतीय, 61% ने एक साल के लिए टाली योजना
कोरोना वायरस के डर से विदेश पढ़ने जाने वाले आधे से ज्‍यादा इंडियन स्‍टूडेंट्स ने फिलहाल अपनी योजना टाल दी है.

हर साल वर्ल्‍ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग का ऐलान करने वाली ब्रिटिश एजेंसी क्‍वैकरेली सायमंड्स (QS) के सर्वे के मुताबिक, सिर्फ 8 फीसदी छात्रों ने विदेश में पढ़ने (Studying Abroad) के फैसले को बरकरार रखा. वहीं, 7 फीसदी ने विदेश जाने की योजना पूरी तरह रद्द कर दिया है. हायर एजुकेशन के लिए विदेश जाने वाले छात्रों में 48 फीसदी को ऑनलाइन एजुकेशन में रुचि ही नहीं है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 23, 2020, 5:45 AM IST
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नई दिल्‍ली. कोरोना वायरस के कारण दुनियाभर में स्‍कूल-कॉलेजों पर भी बुरा असर पड़ा है. एक तरफ स्‍कूल-कॉलेज में अभी तक क्‍लासेस पूरी तरह शुरू नहीं हुई हैं. वहीं, स्‍टूडेंट्स भी संक्रमण के डर से स्‍कूल-कॉलेज जाने से कतरा रहे हैं. इसी कड़ी में 90 से अधिक देशों में पढ़ने वाले लाखों भारतीय स्‍टूडेंट्स (Indian Students) ने विदेश में अपनी हायर एजुकेशन (Studying Abroad) के प्‍लान को कुछ समय के लिए टाल दिया है. हर साल वर्ल्‍ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग जारी करने वाली ब्रिटिश एजेंसी क्‍वैकरेली सायमंड्स (QS) के सर्वे के मुताबिक, 61 फीसदी इंडियन स्‍टूडेंट्स ने विदेश में पढ़ाई की योजना को कम से कम एक साल के लिए स्‍थगित किया है.

7 फीसदी भारतीय छात्रों ने पूरी तरह रद्द कर दी है योजना
क्‍यूएस के सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय स्‍टूडेंट्स ने वैश्विक महामारी (Pandemic) के मामले में हालात बेहतर होने तक अपनी योजना टाल दी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि 8 फीसदी इंडियन स्‍टूडेंट्स ने विदेश में पढ़ने के फैसले को बरकरार रखा है. वहीं, 7 फीसदी ने अपनी योजना पूरी तरह रद्द कर दी है. क्‍यूएस का सर्वे अभी पूरा नहीं हुआ है. सर्वे में पता लगाया जाएगा कि छात्रों की योजनाओं पर महामारी का किस-किस तरह से असर पड़ा है. रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक सर्वे में 66,959 स्‍टूडेंट्स ने हिस्‍सा लिया है. इनमें से 11,310 भारतीय हैं.

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सिर्फ 17% भारतीयों की ही है ऑनलाइन एजुकेशन में रुचि


सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, 49 फीसदी इंडियन स्‍टूडेंट्स की योजना एमबीए (MBA), मास्टर्स और ग्रेजुएट डिप्लोमा करने की थी. इसके अलावा 19 फीसदी मास्टर्स व पीएचडी और 29 फीसदी ग्रेजुएशन में पढ़ना चाहते थे. बाकी छात्र फाउंडेशन कोर्स, वोकेशनल एजुकेशन और ट्रेनिंग इंग्लिश लेंग्वेज की प्लानिंग कर रहे थे. लगभग आधे भारतीय छात्र या 48 फीसदी अपने प्रोग्राम को ऑनलाइन नहीं पढ़ना (Online Education) चाहते हैं. इस समय कई यूनिवर्सिटी इसी पर काम कर रही हैं. केवल 17 फीसदी स्‍टूडेंट्स ही ऑनलाइन प्रोग्राम में ज्यादा रुचि रखते हैं.

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82% भारतीय ऑनलाइन एजुकेशन में चाहते हैं कम फीस
सर्वे में कहा गया है कि करीब 8 फीसदी भारतीय छात्र देश में रहकर ही पढ़ाई करेंगे. रिपोर्ट के मुताबिक, 82 फीसदी भारतीय छात्रों के अलावा दुनिया के अन्य देशों के छात्रों ने भी ऑनलाइन एजुकेशन के लिए फीस में कमी (Reduced Fees) की बात कही है. हालांकि, 5 फीसदी भारतीय छात्रों को फीस से कोई शिकायत नहीं है. वहीं, 12 फीसदी ने फीस से जुड़े सवाल पर कोई जवाब नही दिया. करीब 24 फीसदी छात्र कॉलेज फीस में 50 फीसदी, 19 फीसदी छात्र 40 फीसदी और 20 फीसदी छात्र 30 फीसदी छूट (Discounts) चाहते हैं.

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रोजगार और वेतन को लेकर परेशान हैं इंडियन स्‍टूडेंट्स
सर्वे के मुताबिक, ज्यादातर छात्रों का कहना था कि यूनिवर्सिटीज को सोशल डिस्टेंसिंग (Social Distancing) के साथ क्लासेस शुरू करनी चाहिए. कोरोना बचाव के नियमों का फैकल्‍टीज को भी पालन करना चाहिए. जुलाई 2018 में भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, 90 से अधिक देशों में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 7.53 लाख थी. सबसे ज्यादा भारतीय अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और न्यूजीलैंड पढ़ने जाते हैं. भारतीय छात्र विदेश यात्रा, वहां स्वास्थ्य सुरक्षा और रहने की व्यवस्था को लेकर दुविधा में हैं. लॉकडाउन से बिगड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्था के कारण वे रोजगार और वेतन को लेकर भी चिंतित हैं.
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