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भारत से बोरिया-बिस्तर समेट रही है Bitcoin, सरकारी शिकंजे से पलायन को मजबूर

बोरिया बिस्तर समेट रही है बिटक्वाइन

बोरिया बिस्तर समेट रही है बिटक्वाइन

बिटक्वाइन ब्लॉकचेन ईकोसिस्टम में डेवलेपर्स, सर्विस प्रोवाइडर्स और अन्य कंपनियां शामिल हैं. जो अब थाईलैंड, एस्टोनिया और स्विटज़रलैंड जैसे क्रिप्टो-फ्रेंडली देशों की ओर रुख कर रही हैं.

  • News18Hindi
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    भारत एक बार फिर ब्रेन ड्रेन का सामना करने की कगार पर दिख रहा है. केंद्र सरकार ने हाल ही में कई सख्त नियम लागू किए हैं, जिसके बाद शिकंजा कसता देख बिटक्वाइन कम्यूनिटी ने अपना बोरिया बिस्तर समेटना शुरू कर दिया है. इससे पहले इंटरनेट बूम के बाद बड़े स्तर पर पलायन हुआ था. तब भारत के तकनीकी विशेषज्ञ बेहतर अवसरों की तलाश में दूसरे देश चले गए थे.

    बिटक्वाइन ब्लॉकचेन ईकोसिस्टम में डेवलेपर्स, सर्विस प्रोवाइडर्स और अन्य कंपनियां शामिल हैं, जो अब थाईलैंड, एस्टोनिया और स्विटज़रलैंड जैसे क्रिप्टो-फ्रेंडली देशों की ओर रुख कर रही हैं. देश में क्रिप्टोकरेंसी पर कड़े नियम लागू किए जाने के बाद इस पलायन को बल मिला है.

    कई एक्सचेंज ओनर्स ने न्यूज़18 को बताया कि उन्होंने देश से बाहर सही जगहों पर जाने की पूरी तैयारी कर ली है और शेयर मालिकों को भी इसकी जानकारी दे दी है.

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    भारत में क्रिप्टो-एक्सचेंज के फाउंडर ने पहचान न जाहिर करने की शर्त पर कहा, "भारत के ब्लॉकचेन कम्यूनिटी में कई टैलेंटेड लोग हैं, जो लगातार अचानक से बंद हो जाने के डर में जी रहे हैं. यह उन्हें जाने के लिए मजबूर कर रहा है. ऐसा क्यों नहीं हो? बिजनेस हमेशा प्रोडक्ट-फ्रेंडली जगहों पर ही फलता फूलता है."

    ये पलायन कई स्टार्ट-अप्स और कंपनियों के सिंगापुर और आयरलैंड जैसे देशों की ओर रुखने की तरह ही हैं. ये देश टैक्स, स्टार्टअप फंडिंग और अन्य वजहों से इन कंपनियों और स्टेकहोल्डर्स के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं.

    दुनिया में कुछ ब्लॉकचेन डेस्टिनेशंस हैं, जो भारतीयों को अपनी तरफ खींच रहे हैं. इन सभी के कुछ सकारात्मक तो कुछ नकारात्मक पक्ष हैं. सिंगापुर, एस्टोनिया, यूके, स्विटज़रलैंड और जापान कुछ ऐसे नाम हैं जो ब्लॉकचेन कम्यूनिटी के अंतर्गत आते हैं. इनमें से एस्टोनिया काफी लोकप्रिय है. इसकी वजह है कि यहां क्रिप्टो और टेक-फ्रेंडली रेगुलेटरी माहौल है. इसके अलावा ये ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस के मामले में भी काफी सरल है.

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    गौरतलब है आरबीआई ने 6 अप्रैल को 'वर्चुअल करेंसी में डीलिंग पर प्रतिबंध' नाम से एक नोटिस जारी किया था, जिसमें बैंकों, ई-वॉलेट्स, पेमेंट गेटवे प्रोवाइडर्स से क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज और वर्चुअल करेंसी के अन्य बिजनेसेज़ को सपोर्ट ना करने का आदेश दिया था.

    इसके बाद बैंकों ने क्रिप्टोज़ के अपने अकाउंट्स में डीलिंग करना बंद कर दिया. आरबीआई के इस कदम के बाद वर्चुअल करेंसी एक्सचेंजेज़ ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई है.

    वित्तमंत्री अरुण जेटली ने भी 1 फरवरी को दिए अपने बजट भाषण में कहा था, "सरकार क्रिप्टो एसेट्स और इनकी अवैध गतिविधियों को खत्म करने के सभी प्रयास करेगी."

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