UPI मार्केट में सर्वत्र टेक्नोलॉजीज की 25% हिस्सेदारी, इन कंपनियों को देती है सर्विस

UPI मार्केट में सर्वत्र टेक्नोलॉजीज की 25% हिस्सेदारी, इन कंपनियों को देती है सर्विस
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भारत की तकनीकी अर्थव्यवस्था यूके सहित दुनिया भर के प्रमुख तकनीकी हब के विकास की राह पर साथ दौड़ रही है. इस परिवर्तनकारी डिजिटल क्रांति के बीच में, भारत देश की पहली होमग्रोन तकनीक के उदय और विकास का गवाह बना, जिसने दुनिया का ध्यान खींचा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 10, 2020, 2:41 PM IST
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नई दिल्ली. क्या आपने कभी अपनी व्यस्त जिन्दगी में एक मिनट रूककर यह सोचने की कोशिश की है कि कितनी आसानी से आप केवल एक क्यूआर कोड (QR Code) स्कैन कर के रेस्तरां बिल का भुगतान कर सकते हैं? या बहुत ही आराम से बिना कहीं गए घर पर बैठे आराम से अपने स्थानीय फार्मेसी से दवा बिल का भुगतान कर देते हैं? यह किसी चमत्कार से कम नहीं है. भारत टेक वर्ल्ड में थोड़ा देर से आया जरूर, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में, चीजें तेजी से बढ़ रही हैं और इसकी टेक्नोलॉजी विकास दुनिया की किसी भी अन्य अर्थव्यवस्था की तुलना में अधिक प्रभावशाली है.

दुनिया की सबसे बड़ी बायोमेट्रिक आईडी प्रणाली की रूपरेखा तैयार करने या देश के सबसे बड़े स्टार्टअप की मेजबानी करने के बाद, अब बारी मोबाइल क्रांति की है. भारत की तकनीकी अर्थव्यवस्था यूके सहित दुनिया भर के प्रमुख तकनीकी हब के विकास की राह पर साथ दौड़ रही है. इस परिवर्तनकारी डिजिटल क्रांति के बीच में, भारत देश की पहली होमग्रोन तकनीक के उदय और विकास का गवाह बना, जिसने दुनिया का ध्यान खींचा. चार साल हो गए, जब बैंकों ने भारत के महान संस्थागत और सार्वजनिक नीति नवाचारों में से एक - यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) तक सार्वजनिक पहुंच प्रदान की. इससे देश में वित्तीय समावेशन की प्रक्रिया को तेजी मिली. हाल ही में, गूगल के सरकारी मामलों और सार्वजनिक नीति के वाइस चेयरमैन मार्क इसकोविट्ज ने फेडरल रिजर्व को लिखा कि उन्हें अपने खुद के FedNow बनाने के लिए भारत में निर्मित यूपीआई आधारित डिजिटल प्रणाली के सफल मॉडल का पालन करना चाहिए.

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उन्होंने इस पाथ-ब्रेकिंग डिजाइन की सराहना की है. मोबाइल-आधारित रीयल-टाइम भुगतान प्लेटफ़ॉर्म उपयोगकर्ताओं को सुरक्षित, टू-फैक्टर अथॉन्टिकेशन सिस्टम के माध्यम से सीधे और किसी अन्य व्यक्ति के बैंक खाते में भुगतान करने की अनुमति देता है. यह बैंक खातों को ग्राहकों के डेबिट या क्रेडिट कार्ड के बिना सिंगल एप्लीकेशन में जमा करता है. इसका विशिष्ट “वर्चुअल पेमेंट एड्रेस” उपभोक्ताओं को किसी ऐसे व्यक्ति के साथ खुद की पहचान करने की अनुमति देता है, जिसके साथ बिना कार्ड या खाता विवरण प्रदान किए भुगतान करना चाहते है. इस प्रकार यह धोखाधड़ी के जोखिम को कम करता है.
यूपीआई की प्रसिद्धि का कारण है सेवा की आसान पहुंच, 24x7 इंटरऑपरेबल फीचर्स और डायरेक्ट ट्रांसफर की सुविधा. यूपीआई का डिज़ाइन इसे अत्यधिक स्केलेबल होने की अनुमति देता है. वर्टिकल और होरीजॉंटल दोनों तरीके से. इसके अतिरिक्त, मोबाइल-आधारित होने के नाते, यह ग्रामीण बाजारों में प्रवेश करने और लोगों को डिजिटल दुनिया में लाने के सरकारी एजेंडे को आगे बढ़ाता है. यूपीआई के जरिए, भारत कम लागत, बड़े मूल्य के ट्रांजेक्शन के माध्यम से मितव्ययी नवाचार के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षण कार्य कर रहा है. इसके विकास की कहानी नैसकॉम और केपीएमजी की रिपोर्ट में समाहित है, जो बताती है कि यूपीआई धन प्रबंधन, बीमा, और विशेष रूप से ऋण देने जैसे ऑफर्स को समायोजित करने के रास्ते पर है. गौरतलब है कि भारतीयों का एक बड़ा हिस्सा अभी भी क्रेडिट इतिहास से जूझ रहा है.

उपयोग में आसानी और शानदार यूजर इंटरफेस के अलावा, स्केलेबिलिटी इस प्लैटफॉर्म का एक और फायदा है. यूपीआई मॉडल ऐसा है कि इसे एक प्लेटफॉर्म में सेवा मॉडल (प्लेटफॉर्म एज ए सर्विस) के रूप में एकीकृत किया जा सकता है, जिसके तहत अर्ध-ग्रामीण/ ग्रामीण भारत में लघु वित्त बैंक और शहरी सहकारी बैंकों को भी साथ लाया जा सकता है. यह भारत में बैंकों के ग्रामीण उपभोक्ताओं को सहकारी बैंकों में अपने खातों को यूपीआई से जोड़कर गूगल पे जैसे विभिन्न यूपीआई पीएसपी एप्स का उपयोग करने में सक्षम करेगा.

यूपीआई की सफलता इस तथ्य पर भी आधारित है कि यह व्यापारियों को भी लाभान्वित करता है. 2018 में, यूपीआई 2.0 लॉन्च किया गया था, जो ज्यादा व्यापारी केंद्रित था. लेन-देन को पूर्व-अधिकृत करने की क्षमता और बाद में भुगतान करने का विकल्प ग्राहकों और व्यापारियों के लिए पारस्परिक रूप से फायदेमंद था. यूपीआई पर ओवरड्राफ्ट खातों को जोड़ने की क्षमता के अलावा, इससे अधिक लेनदेन को बढ़ावा मिलेगा. जबकि मजबूत सत्यापन प्रणाली धोखाधड़ी को कम करता है. रूपे और यूपीआई भुगतान के लिए एमडीआर शुल्क माफी की घोषणा के साथ ही उपभोक्ताओं को डिजिटल भुगतान का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है.

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इसकी शुरूआत के चार साल बाद, इसने 12 अरब लेन-देन को पार कर लिया है, जो 21 ट्रिलियन रुपये से अधिक है और भारत में सभी डिजिटल लेनदेन के 50% से अधिक. यह जीडीपी का 10% हिस्सा है. गूगल और फोनपे जैसे टेक दिग्गजों ने इसका फायदा उठाने के लिए खुद का यूपीआई इनेबल्ड भुगतान प्लेटफार्म लॉन्च किया, जिससे इसके व्यापक कार्यान्वयन को बढ़ावा मिला, खासकर पी2पी सेक्टर में. भारत में अब एक ऐसा अंतर्निहित बुनियादी ढांचा है, जिस पर कई फिनटेक फर्म आगे बढ सकती हैं और बहुत सारे नवाचार हो सकते हैं. ये लास्ट माइल टच प्वायंट के लिए फिनटेक कंपनियों के लिए एक अच्छी नींव प्रदान करते हैं. यह एक शानदार क्रांति हो सकती है जिसके बारे में आपने कभी नहीं सुना होगा. जैसे दुनिया चीन की डिजिटल प्रगति, उसके इंटरनेट बाजीगरी और पिछले दशक के नवाचार से प्रभावित हुई, अब आगे वक्त भारत का है. यहां बहुत सारे ऐसे टेक बेस्ड काम चल रहे हैं, जो बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय
सुर्खियों से दूर है. डिजिटलीकरण में एक समान स्तर का मैदान देने की संभावना है, जिसमें लैंगिक भेद और धन की कमी जैसी समस्याएं कम करने की क्षमता है, जिससे आने वाले समय में समाज पर अधिक सकारात्मक प्रभाव होगा. (मंदार अगाशे, संस्थापक और वाइस-चेयरमैन, सर्वत्र टेक्नोलॉजीज)
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