अप्रैल-जून तिमाही में देश की GDP ग्रोथ गिरकर 5% पर आई, पिछले साल इसी तिमाही में थी 8%

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Updated: August 30, 2019, 6:21 PM IST
अप्रैल-जून तिमाही में देश की GDP ग्रोथ गिरकर 5% पर आई, पिछले साल इसी तिमाही में थी 8%
अप्रैल-जून तिमाही में देश की GDP ग्रोथ गिरकर 5% पर आई, पिछले साल इसी तिमाही में थी 8%

दुनियाभर में जारी ग्लोबल स्लोडाउनल (Global Slowdown) का असर भारत पर भी दिखने लगा है. मौजूदा वित्त वर्ष 2019-20 की अप्रैल-जून तिमाही में देश की जीडीपी (Gross Domestic Products) ग्रोथ गिरकर 5 प्रतिशत पर आ गई है.

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  • Last Updated: August 30, 2019, 6:21 PM IST
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दुनियाभर में जारी ग्लोबल स्लोडाउनल (Global Slowdown) का असर भारत पर भी दिखने लगा है. मौजूदा वित्त वर्ष 2019-20 की अप्रैल-जून तिमाही में देश की जीडीपी (Gross Domestic Products) ग्रोथ गिरकर 5 प्रतिशत पर आ गई है. जबकि, इससे पहली तिमाही यानी वित्त वर्ष 2018-19 के जनवरी-मार्च में जीडीपी ग्रोथ 5.8 फीसदी थी. वहीं, इससे पिछले साल इसी तिमाही यानी अप्रैल-जून 2018-19 में जीडीपी ग्रोथ की दर 8 फीसदी थी. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि जीडीपी ग्रोथ के आंकड़ों में गिरावट का अनुमान पहले से था. लेकिन सरकार की ओर से उठाए कदमों का असर अगले तिमाही में दिखने लगेगा.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कुछ देर पहले देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कई बड़े ऐलान किए है. उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और बताया कि देश की इकॉनमी सही हालात में है. आपको बता दें कि जीडीपी किसी भी देश की आर्थिक सेहत को मापने का सबसे ज़रूरी पैमाना है. जीडीपी किसी ख़ास अवधि के दौरान वस्तु और सेवाओं के उत्पादन की कुल क़ीमत है. भारत में जीडीपी की गणना हर तीसरे महीने यानी तिमाही आधार पर होती है. ध्यान देने वाली बात ये है कि ये उत्पादन या सेवाएं देश के भीतर ही होनी चाहिए.

आंकड़ों पर एक नज़र- जीडीपी ग्रोथ में गिरावट पहली तिमाही में औद्योगिक उत्पादन वृद्धि के अनुकूल है, जो महज 3.6 फीसदी रही थी, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह आंकड़ा 5.1 फीसदी था. बार-बार आने वाले आर्थिक सूचकों, जैसे वाहनों की बिक्री, रेल फ्रेट, डॉमेस्टिक एयर ट्रैफिक ऐंड इंपोर्ट्स (नॉन ऑइल, नॉन गोल्ड, नॉन सिल्वर, नॉन प्रेसियस और सेमी प्रेसियस स्टोन्स) ने उपभोग खासकर निजी उपभोग में गिरावट का संकेत दिया था, जबकि महंगाई दर कम रही थी.



वित्त मंत्री ने बैंकों की अच्छी स्थिति के बारे में कहा कि इनके एनपीए (नॉन पफॉर्मिंग ऐसेट) कम हुए हैं और मुनाफा बढ़ा है जो अच्छी खबर है. वित्त मंत्री ने बताया कि कम समय में लोन रिकवरी बढ़ गई है और कर्ज वसूली रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है.

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एनपीए में कमी आई है और ये 8.65 लाख करोड़ रुपये से घटकर 7.90 लाख करोड़ रुपये हो गया है यानी अब 7.90 लाख करोड़ का एनपीए बचा है. 2019 में 1 लाख 21 हजार 76 करोड़ की रिकवरी हुई है जो काफी अच्छी कही जा सकती है. इसके अलावा 18 पब्लिक सेक्टर बैंकों में से 14 सरकारी बैंक फायदे में है, बैंकों का मुनाफा बढ़ा है.
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इस आधार पर तय होती है GDP
भारत में कृषि, उद्योग और सर्विसेज़ यानी सेवा तीन प्रमुख घटक हैं जिनमें उत्पादन बढ़ने या घटने के औसत के आधार पर जीडीपी दर होती है. ये आंकड़ा देश की आर्थिक तरक्की का संकेत देता है. आसान शब्दों में, अगर जीडीपी का आंकड़ा बढ़ा है तो आर्थिक विकास दर बढ़ी है और अगर ये पिछले तिमाही के मुक़ाबले कम है तो देश की माली हालत में गिरावट का रुख़ है.

दो तरह से पेश होती है GDP

जीडीपी को दो तरह से पेश किया जाता है. क्योंकि उत्पादन की लागत महंगाई के साथ घटती-बढ़ती रहती है, यह पैमाना है कॉस्टेंट प्राइस. इसके तहत जीडीपी की दर और उत्पादन का मूल्य एक आधार वर्ष में उत्पादन की कीमत पर तय होता है. मसलन अगर आधार वर्ष 2010 है तो उसके आधार पर ही उत्पादन का मूल्य में बढ़त या गिरावट देखी जाती है. जीडीपी को जिस दूसरे तरीके से पेश किया जाता है वो है करेंट प्राइस. इसके तहत उत्पादन मूल्य में महंगाई दर भी शामिल होती है.

सरकारी संस्ता सीएसओ करती है ये आंकड़े जारी
केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय यानी सीएसओ देशभर से उत्पादन और सेवाओं के आंकड़े जुटाता है इस प्रक्रिया में कई सूचकांक शामिल होते हैं, जिनमें मुख्य रूप से औद्योगिक उत्पादन सूचकांक यानी आईआईपी और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई हैं.

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First published: August 30, 2019, 5:44 PM IST
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