भारत के साथ जारी तनातनी के बीच भी चीन जमकर खरीद रहा है इंडिया से स्टील, जानिए क्यों?

भारत के साथ जारी तनातनी के बीच भी चीन जमकर खरीद रहा है इंडिया से स्टील, जानिए क्यों?
भारत का स्टील एक्सपोर्ट अप्रैल और जुलाई के बीच दोगुने से भी ज़्यादा हो गया है. यह पिछले छह साल में के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है.

कोरोना संकट के इस माहौल में भारत की अर्थव्यवस्था (Indian Economy) संकटग्रस्त है लेकिन स्टील का निर्यात (Indias Steel Exports) अप्रैल और जुलाई के बीच दोगुने से भी ज़्यादा हो गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 29, 2020, 4:15 PM IST
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नई दिल्ली. भारत और चीन में तनाव (India-China Tension) भरा माहौल बना हुआ है. लेकिन, इन सबके बावजूद चीन भारत से जमकर स्टील खरीद रहा है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, भारत का स्टील एक्सपोर्ट अप्रैल और जुलाई के बीच दोगुने से भी ज़्यादा हो गया है. यह पिछले छह साल में के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है. स्टील एक्सपोर्ट में जबरदस्त उछाल चीन के कारण है. देश की सबसे बड़ी स्टील कंपनी टाटा स्टील (Tata Steel) और जेएसडब्ल्यू स्टील (JSW Steel) उन कंपनियों में शामिल हैं जिन्होंने अप्रैल से जुलाई के बीच कुल 40.64 लाख टन बना स्टील और अर्धनिर्मित स्टील प्रोडक्ट विश्व बाज़ार में बेचे.

चीन क्यों खरीद रहा है भारत से स्टील- न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को  कारोबारियों ने बताया कि स्टील का एक्सपोर्ट बढ़ने का कारण कम कीमत है. भारत की स्टील कंपनियों के पास उत्पादन की बड़ी खेप मौजूद थी क्योंकि कोरोना वायरस के चलते घरेलू मांग में भारी गिरावट आई है. जिसकी वजह से सामान नहीं बिका. लिहाजा इस मौका का फायदा उठाने के लिए भारतीय स्टील कंपनियों ने अपने सरप्लस से छुटाकारा पाने के लिए सस्ते दाम पर स्टील बेचना शुरू कर दिया है. इससे कंपनियों को बड़ा फायदा हुआ है. उनकी सेल्स बढ़ गई है. रॉयटर्स के मुताबिक़ इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने उसे बताया है कि बड़े स्टील निर्माताओं ने प्रति टन 50 डॉलर की छूट दी है.

आंकड़ों पर एक नज़र- पिछले साल इस वक्त में सिर्फ 10.93 लाख टन ही स्टील की बिक्री हुई थी.  जबकि,  अप्रैल और जुलाई के बीच इस साल 40.64 लाख टन स्टील बेचा गया है. इसमें चीन और वियतनाम ने 10.37 लाख स्टील ख़रीदा हैं.



आपको बता दें कि वियतनाम भारतीय स्टील का नियमित ख़रीदार है लेकिन चीन के बड़े ख़रीदार के तौर पर उभार से भारत के पारंपरिक मार्केट इटली और बेल्जियम पीछे छूट गए हैं. यह सबके लिए चौंकाने वाला है. वह भी ऐसा तब हो रहा है जब भारत के साथ चीन के रिश्ते ऐतिहासिक रूप से ख़राब हैं.
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