अर्थव्यवस्था को झटका! औद्योगिक उत्पादन दर 17 महीने में सबसे कम

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार आईआईपी की वृद्धि दर का यह 17 महीने का निचला स्तर है.

भाषा
Updated: January 11, 2019, 8:19 PM IST
अर्थव्यवस्था को झटका! औद्योगिक उत्पादन दर 17 महीने में सबसे कम
केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार आईआईपी की वृद्धि दर का यह 17 महीने का निचला स्तर है.
भाषा
Updated: January 11, 2019, 8:19 PM IST
औद्योगिक उत्पादन के मोर्चे पर सरकार को झटका लगा है. नवंबर महीने में आईआईपी ग्रोथ घटकर 0.50 फीसदी पर आ गई है. केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार आईआईपी की वृद्धि दर का यह 17 महीने का निचला स्तर है. विनिर्माण क्षेत्र विशेषरूप से उपभोक्ता और पूंजीगत सामान क्षेत्र का उत्पादन घटने से आईआईपी की वृद्धि दर काफी नीचे आ गई. एक साल पहले नवंबर, 2017 में औद्योगिक उत्पादन वृद्धि दर 8.5 प्रतिशत रही थी. इससे पहले जून, 2017 में औद्योगिक उत्पादन 0.3 प्रतिशत घटा था. अक्टूबर, 2018 की औद्योगिक उत्पादन वृद्धि दर संशोधित होकर 8.1 से 8.4 प्रतिशत हो गई.

अक्टूबर में डबल हो गई थी आईआईपी ग्रोथ
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 मासिक आधार पर अक्टूबर में इलेक्ट्रिसिटी सेक्टर की ग्रोथ 8.2 फीसद से बढ़कर 8.10 फीसदी पर पर पहुंच गई थी.
>> माइनिंग सेक्टर की ग्रोथ 0.2 फीसद से बढ़कर 7 फीसदी पर पहुंच गई थी.

>> मैन्यूफैक्चरिंग की ग्रोथ 4.6 फीसद से बढ़कर 7.9 पर आ गई थी.
>> प्राइमरी गुड्स की ग्रोथ भी 2.6 फीसद से बढ़कर 6 फीसद के स्तर पर पहुंच गई थी.

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क्या होता है आईआईपी-औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) का किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में खास महत्व होता है. इससे पता चलता है कि उस देश की अर्थव्यवस्था में औद्योगिक वृद्धि किस गति से हो रही है.आईआईपी के अनुमान के लिए 15 एजेंसियों से आंकड़े जुटाए जाते हैं. इनमें डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड प्रमोशन, इंडियन ब्यूरो ऑफ माइंस, सेंट्रल स्टेटिस्टिकल आर्गेनाइजेशन और सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी शामिल हैं.

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सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा जारी किए गए ताजा मानकों के मुताबिक किसी उत्पाद के इसमें शामिल किए जाने के लिए प्रमुख शर्त यह है कि वस्तु के उत्पादन के स्तर पर उसके उत्पादन का कुल मूल्य कम से कम 80 करोड़ रुपए होना चाहिए. इसके अलावा यह भी शर्त है कि वस्तु के उत्पादन के मासिक आंकड़े लगातार उपलब्ध होने चाहिए.

इंडेक्स में शामिल वस्तुओं को तीन समूहों-माइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रिसिटी में बांटा जाता है। फिर इन्हें बेसिक गुड्स, कैपिटल गुड्स, इंटरमीडिएट गुड्स, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स जैसी उप-श्रेणियों में बांटा जाता है.
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