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आम आदमी को राहत! सब्जियों की कीमतें कम होने से घटी थोक महंगाई, प्‍याज 55 फीसदी हुई सस्‍ती

2020 के आखिरी महीने के दौरान लोगों को महंगाई से राहत मिली.
2020 के आखिरी महीने के दौरान लोगों को महंगाई से राहत मिली.

उद्योग व आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (DPIIT) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर 2020 में थोक आधार पर सब्जियों (Wholesale Prices) की कीमतों में 13 फीसदी से ज्‍यादा की कमी दर्ज की गई है. ऐसे में इस दौरान थोक महंगाई (WPI Based Inflation) घटकर 1.22 फीसदी पर आ गई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 14, 2021, 9:27 PM IST
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नई दिल्ली. उद्योग व आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (DPIIT) की ओर से महंगाई को लेकर जारी आंकड़े आम आदमी के लिए थोड़ी राहत पहुंचाने वाले हैं. डीपीआईआईटी के मुताबिक, सब्जियों की कीमतों (Vegetables Prices) में गिरावट के कारण 2020 के आखिरी महीने दिसंबर में थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर (WPI Based Inflation) घटकर 1.22 फीसदी पर आ गई. इससे पिछले महीने यानी नवंबर, 2020 में ये आंकड़ा 1.55 फीसदी और दिसंबर, 2019 में 2.76 फीसदी था.
सब्जियों के दाम में 13.2 फीसदी की कमी हुई

डीपीआईआईटी की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, डब्ल्यूपीआई खाद्य सूचकांक पर आधारित महंगाई दर (WPI Food Inflation) नवंबर, 2020 में 4.27 फीसदी थी, जो दिसंबर में घटकर 0.92 फीसदी रह गई. थोक आधार पर दिसंबर 2020 में सब्जियों के दाम 13.2 फीसदी घट गए. नवंबर 2020 में सब्जियां 12.24 फीसदी महंगी हुई थीं. साल 2020 के आखिरी महीने में प्याज की कीमतों में 54.69 फीसदी की गिरावट आई. नंवबर में प्याज 7.58 फीसदी सस्ता हुआ था. वहीं, दिसंबर में आलू के दाम 37.75 प्रतिशत घटे, जबकि नवंबर में आलू 115.12 फीसदी महंगा हुआ था.

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मोटा अनाज, धान, गेहूं और दालें भी हुईं सस्‍ती


दिसंबर 2020 में मोटा अनाज, धान, गेहूं और दालों की महंगाई भी नवंबर 2020 के मुकाबले घट गई. हालांकि, दिसंबर में फलों के थोक दाम नवंबर से ज्‍यादा रहे. समीक्षाधीन महीने में जहां खाद्य वस्तुओं की महंगाई घटी, वहीं विनिर्मित उत्पादों की मुद्रास्फीति बढ़कर 4.24 फीसदी हो गई. नवंबर में यह 2.97 फीसदी थी. दिसंबर 2020 में ईंधन और बिजली की थोक महंगाई में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई. दिसंबर में खुदरा महंगाई भी घटकर 4.59 फीसदी पर आ गई. खुदरा महंगाई भी खाद्य वस्तुओं के दाम घटने से नीचे आई. हालांकि, मुख्य मुद्रास्फीति 4.2 फीसदी के 24 माह के उच्चस्तर पर है. इससे आगे चलकर थोक मुद्रास्फीति को लेकर चिंता पैदा हो सकती है.
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