बजट 2020-21: शिक्षा क्षेत्र की ये हैं उम्मीदें, छात्रों के रिसर्च के लिए फंड सहित इस पर भी रहेगी नजर

अभिभावकों के पास बच्चों के स्कूल फीस देने के पैसे नहीं हैं. (प्रतिकात्मक तस्वीर)

अभिभावकों के पास बच्चों के स्कूल फीस देने के पैसे नहीं हैं. (प्रतिकात्मक तस्वीर)

कोरोना काल के बाद से डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर अधिक जोर दिया जा रहा है. पढ़ाई के लिए डिजिटल उपकरण काफी जरूरी हो गए हैं. इसलिए डिजिटल उपकरण सस्ते हों इसको लेकर भी लोगों की बड़ी उम्मीदें हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 2, 2021, 1:12 AM IST
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नई दिल्ली. देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) अब से कुछ ही देर बाद बजट पेश करने जा रही हैं. कुछ ही देर में देश का बजट भी सामने आ जाएगा. बजट को लेकर हर सेक्टर की अपनी-अपनी उम्मीदें हैं. इस बजट में स्कूल संचालक, शिक्षाविद और अभिभावकों ने भी बड़ी उम्मीदें पाल रखी हैं. कोरोना काल में इस सेक्टर को बहुत नुकसान पहुंचा था. लॉकडाउन के बाद इस सेक्टर के लोग भी आर्थिक तंगी का हवाला दे कर वित्त मंत्री से राहत पैकेज की मांग कर रहे हैं. अभिभावकों के पास बच्चों के स्कूल फीस देने के पैसे नहीं हैं. इसी तरह शिक्षण संस्थानों को भी कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. इसलिए शिक्षा के क्षेत्रों से जुड़े लोगों की बड़ी उम्मीदें हैं.

शिक्षा के क्षेत्र में लोगों की बजट से क्या है उम्मीदें

कोरोना काल के बाद से डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर अधिक जोर दिया जा रहा है. पढ़ाई के लिए डिजिटल उपकरण काफी जरूरी हो गए हैं. इसलिए डिजिटल उपकरण सस्ते हों इसको लेकर भी लोगों की बड़ी उम्मीदें हैं. हाई स्पीड इंटरनेट सुविधा के लिए भी ठोस पहल की जा सकती है. ग्रामीण इलाकों में डिजिटाइजेशन पर फोकस दिया जा सकता है.

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रिसर्च के लिए चाहिए फंड

इसके साथ छात्रों के रिसर्च के लिए फंड भी मुहैया कराई जा सकती है. कई लोगों को लगता है कि अब शिक्षा में भी एफडीआई का ऐलान हो सकता है. विशेषज्ञों मानना है कि शिक्षा क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी नहीं कि सारी फंडिंग सरकार ही करे, बल्कि इसके लिए एफडीआई को भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए.

नई शिक्षा नीति को लेकर क्या होगा बजट में



पिछले ही साल केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नई शिक्षा नीति को मंजूरी दी थी. नई शिक्षा नीति में शिक्षा का अधिकार कानून के दायरे को व्यापक बनाया गया है. इस लिहाज से देखें तो इस बार के बजट में काफी कुछ किया जा सकता है. अब 3 साल से 18 वर्ष के बच्चों को शिक्षा का अधिकार कानून, 2009 के अंदर लाया जाएगा. अब शिक्षा में कुल जीडीपी का 6 फीसदी खर्च किया जाएगा. अभी तक राज्य और केंद्र को मिलाकर करीब 4 फीसदी होता है.

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इसके साथ ही इस बार के बजट में फीस की अधिकतम सीमा तय की जा सकती है. नई नीति में शिक्षण संस्थाओं को ग्रेडेड ऑटोनॉमी दिए जाने का प्रावधान है. जितनी अच्छी ग्रेड, उतनी Autonomy दी जाएगी. उच्च शिक्षा के लिए सिर्फ एक ही रेगुलेटर होगा. डीम्ड और सेंट्रल यूनिवर्सिटी के लिए एक मानदंड होगा.
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