Family Pension को लेकर सरकार द्वारा लिए गए अहम फैसले को आसानी से समझें...

फैमिली पेंशन को लेकर Central Civil Services (Pension) Rules, 1972 के नियम 54 के उप-नियम (11-C) में संशोधन किया गया है. (फाइल फोटो)

Family Pension : सरकार के इस फैसले से वे फैमिली पेंशनधारक (Family Pensioner) परिवार लाभान्वित होंगे, जिनकी पेंशन आपराधिक मामलों में लिप्‍त होने की वजह से रूक जाया करती थी.

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नई दिल्‍ली : सरकार की तरफ से फैमिली पेंशन (Family Pension) को लेकर एक अहम फैसला लिया गया, जोकि हितधारकों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा. इससे बड़ी संख्‍या में वे फैमिली पेंशनधारक (Family Pensioner) परिवार लाभान्वित होंगे, जिनकी पेंशन आपराधिक मामलों में लिप्‍त होने की वजह से रूक जाया करती थी और उन्‍हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता था. सरकार के कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय (Ministry of Personnel, Public Grievances & Pensions) की तरफ से इस ओर ध्‍यान दिया गया और केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम की समीक्षा की गई. जिसके बाद Central Civil Services (Pension) Rules, 1972 के नियम 54 के उप-नियम (11-C) में संशोधन किया गया है.

आइये आसान भाषा में समझते हैं सरकार के इस फैसले को...

-भारत सरकार के उप सचिव संजोय शंकर की ओर से एक ऑफि‍स मेमोरेंडम जारी कर इस नए बदलाव के बारे में अवगत कराया गया.

यह था बरसों पुराना नियम
-अभी तक Central Civil Services (Pension) Rules, 1972 के नियम 54 के उप-नियम (11-C) के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति जो सरकारी कर्मचारी या पेंशनभोगी की मृत्यु पर पारिवारिक पेंशन प्राप्त करने के लिए पात्र होता था, पर सरकारी कर्मचारी/पेंशनभोगी की हत्या करने या इस तरह के अपराध के लिए उकसाने का आरोप लगता था तो इस संबंध में उस आपराधिक कार्यवाही का फैसला आने तक पेंशन को निलंबित कर दिया जाता था.

-ऐसे केसों में ऐसे आपराधिक मामलों में लिप्‍त व्‍यक्ति के अलावा परिवार के किसी अन्‍य पात्र सदस्‍य को पेंशन का भुगतान रोक दिया जाता था, तब तक की उस क्राइम प्रोसिडिंग पर फैसला ना आ जाए. साथ ही इन आपराधिक मामलों का दोष साबित हो जाने पर उस व्‍यक्ति को फैमिली पेंशन पाने से बेदखल कर दिया जाता था. उस स्थिति में, सरकारी कर्मचारी की मृत्यु की तारीख से परिवार के अन्य पात्र सदस्य को पारिवारिक पेंशन देय हो जाती थी. हालांकि अगर संबंधित व्यक्ति बाद में आरोप से मुक्त कर दिया जाता था, तो उस व्यक्ति को सरकारी कर्मचारी की मृत्यु की तारीख से परिवार पेंशन देय हो जाती थी.

कार्मिक विभाग ने की प्रावधान की समीक्षा...
-इसको लेकर कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय (Ministry of Personnel, Public Grievances & Pensions) द्वारा उपरोक्त प्रावधानों की समीक्षा कानूनी मामलों के विभाग के परामर्श से की गई. इस समीक्षा में पाया गया कि परिवार के किसी अन्य सदस्य {जिनमें आश्रित बच्चे, माता-पिता आदि) और जिन पर अपराध का आरोप नहीं है, को परिवार पेंशन के भुगतान से इनकार करना उचित नहीं है. क्‍योंकि आपराधिक कार्यवाही काफी लंबी चलती है और मृतक के पात्र बच्चे/माता-पिता परिवार पेंशन के रूप में वित्तीय सहायता के अभाव में पीड़ित होते हैं. यानि उन्‍हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है.

समीक्षा के बाद लिया गया यह फैसला...
-समीक्षा के बाद फैसला लिया गया है कि फैमिली पेंशन पाने वाले व्‍यक्ति पर सरकारी कर्मचारी की हत्‍या या उसके लिए उकसाने का आरोप लगने पर परिवार के ही अन्‍य किसी पात्र सदस्‍य को तक तब फैमिली पेंशन देनी शुरू की जाएगी, जब तक की आरोपी पर कोई अंतिम फैसला ना जाए.

-अगर सरकारी कर्मचारी की पत्‍नी पर ही ऐसा आपराधिक आरोप लगता है और परिवार में अन्‍य पात्र सदस्‍य उसका अवयस्क बच्चा (Minor Child) है तो विधिवत नियुक्त अभिभावक के माध्‍यम से उसे पेंशन का भुगतान किया जाएगा. साथ ही बच्‍चे के आरोपी माता या पिता फैमिली पेंशन निकालने के लिए अभिभावक के तौर नहीं माने जाएंगे.

-अगर संबंधित व्‍यक्ति आरोपों से बरी हो जाता है तो उसे केस से बरी होने की तारीख से पेंशन देय हो जाएगी और परिवार के दूसरे सदस्‍य को उस तारीख से पेंशन देनी बंद हो जाएगी.

-इस आदेश को मेमोरेंडम जारी होने की तारीख से प्रभाव में ला दिया गया है.

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