भारत पर अभी टला नहीं है टिड्डियों का खतरा, अगस्त तक बनी रह सकती है समस्या

भारत पर अभी टला नहीं है टिड्डियों का खतरा, अगस्त तक बनी रह सकती है समस्या
अभी टला नहीं है टिड्डियों का खतरा (सांकेतिक चित्र)

आपस में मिल सकते हैं टिड्डियों के तीन समूह, जानिए, कहां पर अब भी सक्रिय हैं टिड्डी दल

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नई दिल्ली. पिछले लगभग दो माह से किसानों की परेशानी का सबब बनीं टिड्डियों का खतरा (locust threat) अभी तक टला नहीं है. यह संकट अभी अगस्त तक बने रहने का अनुमान है. खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के टिड्डी स्टेटस अपडेट के अनुसार, मानसून की बारिश से पहले भारत-पाक सीमा की ओर जाने वाले वसंत ऋतु में पैदा हुए टिड्डियों के कई झुंडों में से कुछ भारत के पूर्वी और उत्तरी राज्यों में पहुंचे हैं. कुछ समूह नेपाल तक पहुंच गए.

ऐसा पूर्वानुमान है कि मानसून की शुरुआत के साथ टिड्डियों का ये समूह राजस्थान लौटेगा और ईरान और पाकिस्तान से अब भी आ रहे अन्य टिड्डियों के समूहों (Tiddi dal) के साथ मिल जाएगा. इनके जुलाई के मध्य के करीब अफ्रीका के हॉर्न से आ रहे टिड्डियों के समूह के साथ भी मिल जाने की संभावना है.

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भारत-पाकिस्तान सीमा (Indo-Pak border) पर टिड्डियों में प्रजनन समय से पहले ही शुरू हो चुका है, जहां जुलाई में टिड्डियों के पर्याप्त बच्चे हो जाएंगे जो अगस्त के मध्य में गर्मियों के मौसम में पैदा होने वाले टिड्डियों के झुंड के रुप में सामने आएंगे.
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भारत में इस बार टिड्डडी दल का सबसे बड़ा हमला


कितने क्षेत्र पर नियंत्रण का दावा

केंद्र सरकार ने दावा किया है कि 11 अप्रैल, 2020 से अब तक राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब, गुजरात, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, हरियाणा और बिहार के लगभग 2.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में टिड्डी नियंत्रण करने का काम किया गया है.

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केंद्र सरकार की ओर से दावा यह भी किया गया है कि गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, बिहार और हरियाणा में टिड्डियों के आने से फसलों को कोई खास नुकसान नहीं हुआ है.

यहां सक्रिय हैं टिड्डी दल

राजस्थान राज्य के जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, जोधपुर, नागौर, दौसा तथा भरतपुर और उत्तर प्रदेश के झांसी और महोबा जिलों में अपरिपक्व गुलाबी टिड्डियों और वयस्क पीली टिड्डियों के झुंड अभी भी सक्रिय हैं.
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