केंद्र को GST ट्रिब्यूनल जल्‍द गठन का निर्देश देने की मांग, SC में PIL दायर

इस याचिका में जल्‍द से जल्‍द जीएसटी ट्रिब्यूनल (GST Tribunal) गठित करने का निर्देश दिए जाने की मांग सुप्रीम कोर्ट से की गई है. (FILE PIC)

वकील और सामाजिक कार्यकर्ता अमित साहनी (Lawyer and Activist Amit Sahni) द्वारा दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि 2016 में जीएसटी विधेयक संसद के दोनों सदनों में पारित हुआ और 1 जुलाई से केंद्रीय वस्तु एवं सेवा अधिनियम, 2017 (GST) लागू हुआ. अधिनियम की धारा 109 एक जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण के गठन को अनिवार्य करती है, जो अधिनियम के अस्तित्व में आने के 4 साल बाद भी गठित नहीं हुआ.

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नई दिल्‍ली : सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में एक जनहित याचिका दायर कर केंद्र को जीएसटी ट्रिब्यूनल (GST Tribunal) गठित करने का निर्देश देने की मांग की गई है. वकील और सामाजिक कार्यकर्ता अमित साहनी (Lawyer and Activist Amit Sahni) द्वारा दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि 2016 में जीएसटी विधेयक संसद के दोनों सदनों में पारित हुआ और 1 जुलाई से केंद्रीय वस्तु एवं सेवा अधिनियम, 2017 (GST) लागू हुआ. अधिनियम की धारा 109 एक जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण (GST Appellate Tribunal) के गठन को अनिवार्य करती है, जो अधिनियम के अस्तित्व में आने के 4 साल बाद भी गठित नहीं हुआ.

याचिका में कहा गया है, "सीजीएसटी अधिनियम, 2017 (CGST Act, 2017) की धारा 109 के तहत अपीलीय न्यायाधिकरण की राष्ट्रीय और अन्य पीठों का गठन समय की बेहद जरूरत है और प्रतिवादी अनिश्चितकाल के लिए इसके गठन को खींच नहीं सकते हैं."

12 जुलाई को दायर की गई यह याचिका कानूनी कहावत 'न्याय में देरी, न्याय से वंचित रखना है' (Justice Delayed is Justice Denied) का भी उल्लेख करती है और अपीलीय न्यायाधिकरण की अनुपस्थिति में लोग उचित अवधि के भीतर न्याय प्राप्त करने में सक्षम नहीं हैं और इससे देशभर में वादियों को अत्यधिक कठिनाई हो रही है.

वकील प्रीति सिंह के माध्यम से दायर इस याचिका में कहा गया है कि नोटबंदी के तुरंत बाद (नवंबर 2016 में), जिसने आम आदमी के व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव डाला, प्रतिवादियों ने एक तरफ जल्दबाजी में जीएसटी लागू कर दिया, जबकि इसके विपरीत जानबूझकर जीएसटी ट्रिब्यूनल का गठन नहीं किया है. जबकि इस अधिनियम के तहत ट्रिब्यूनल गठित किया जाना चाहिए. इसके अलावा, जीएसटी को विभिन्न केंद्रीय और राज्य स्तरों पर कई कर कानूनों को एक में शामिल करके भारत में कराधान कानूनों को सरल बनाने और आम नागरिकों के कंधे से कई करों के भुगतान के बोझ को कम करने के उद्देश्य से पेश किया गया था.

सामाजिक कार्यकर्ता एवं वकील अमित साहनी ने इससे पहले वित्त मंत्रालय और जीएसटी परिषद को एक अभ्यावेदन दिया था, जिसमें अनुरोध किया गया था कि अपीलीय न्यायाधिकरण का गठन करने के लिए केंद्रीय वस्तु और सेवा अधिनियम, 2017 की धारा 109 के तहत अनिवार्य रूप से उचित और शीघ्र कदम उठाए जाने चाहिए.

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