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सुंदर पिचाई ने बताई अपनी कहानी, पिता की एक साल की सैलरी खर्च कर खरीदा था अमेरिका का टिकट

सुंदर पिचाई
सुंदर पिचाई

एक वर्चुअल ग्रैजुएशन सेरेमनी में स्टूडेंट्स को संबोधित करते हुए गूगल के CEO सुंदर पिचाई  (Sundar Pichai) ने अपने संघर्ष के दिनों को याद किया. इस दौरान उन्होंने बताया कि कैसे पहली बार हो अमेरिका पहुंचे थे और यहां उनका पहला अनुभव कैसा था.

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नई दिल्ली. भारतीय मूल के सुंदर पिचाई (Sundar Pichai) को पूरी दुनिया आज गूगल के CEO के रूप में जानती है. हाल ही में एक वर्चुअल ग्रैजुएशन सेरेमनी के दौरान पिचाई ने स्टूडेंट्स को उम्मीद और अधीरता न छोड़ने की सलाह देते हुए अपने संघर्ष के दिनों को भी याद किया. इस ग्रैजुएशन सेरेमनी को यूट्यूब पर "Dear Class of 2020" के टाइटल के साथ लाइव स्ट्रीम किया गया था.

इसमें कई लीडर्स, स्पीकर्स, सेलेब्रिटी और यूट्यूब क्रिएटर्स को भी शामिल किया गया था. रविवार को हुए इस सेरेमेनी को संबोधित करते हुए सुंदर पिचाई ने कहा, टेक्नोलॉजी को लेकर बहुत सी ऐसी चीजें है जो आपको हताश करती हैं और अधीर बनाती हैं.

उन्होंने कहा कि इस अधीरता को कभी खत्म नहीं होने देना चाहिए. इसी से तकनीक की दुनिया में अगली क्रांति आएगी और आप उन चीजों को ​बनायेंगे, जिसे मेरी जेनरेशन के लोगा सोच भी नहीं सकते हैं.



पिचाई ने कहा, 'क्लाइमेट चेंज को लेकर आप हमारी जेनरेशन द्वारा उठाये गये कदम से हताश हो सकते हैं. अधीर बने रहिये. इसी की मदद से आप उस उन्नति तक पहुंच पायेंगे, जिसकी पूरी दुनिया को जरूरत है.'
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ये दिग्गज भी रहे शामिल
इस सेरेमनी में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बाराक ओबामा और उनकी पत्नी मिशेल ओबामा ने भी संबोधित किया. साथ ही, सिंगर लेडी गागा और नॉबेल पुरस्कार विजेता मलाला युसुफजई भी शामिल रहीं.

बताई पहली बार अमेरिका पहुंचने की कहानी
अपने संबोधन में सुंदर पिचाई ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कहा कि 27 साल की उम्र में वो भारत छोड़कर अमेरिका के स्टैनफोर्ड यूनिव​र्सिटी में पढ़ने आये थे. उन्होंने कहा, 'मेरे पिता ने अपनी एक साल की कमाई के बराबर रकम मेरे टिकट पर खर्च किया था ताकि मैं स्टैनफोर्ड में पढ़ सकूं. प्लेन में सफ़र करने का यह मेरा पहला अनुभव था.' उन्होंने बताया कि जब हो पहली बार कैलिफोनिर्या में लैंड किये तो वहां वैसी स्थिति नहीं थी, जिसकी उन्होंने कल्पना की थी.

एक मिनट के फोन कॉल के लिए 2 डॉलर खर्च किये
उन पुराने दिनों को याद करते हुए पिचाई ने कहा कि अमेरिका बहुत महंगा देश था. भारत में एक मिनट के फोन कॉल के लिये 2 डॉलर खर्च करने पड़ते थे. एक बैगपैक की कीमत मेरे पिता के महीने भर की सैलरी के बराबर थी. उन्होंने कहा कि अमेरिका में आने के बाद उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि उनकी दुनिया कैसे बदल जायेगी.

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दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक के CEO ने कहा, 'मुझे वहां से यहां तक जिस एक चीज लेकर आई है वो है मेरी किस्मत. मुझमें टेक्नोलॉजी को लेकर एक जुनून था और मैं दिमाग का व्यक्ति रहा.'

चेन्नई में पले-बढ़े हैं पिचाई
बता दें कि सुंदर पिचाई तमिलनाडु के चेन्नई में पले-बढ़े हैं और भारतयी प्रोद्यौगिकी संस्थान यानी आईआईटी से पढ़ाई की है. इसके बाद उन्होंने स्टैनफोर्ड यूनवर्सिटी से मास्टर्स किया और फिर व्हॉर्टन स्कूल से एमबीए किया है. साल 2004 में उन्होंने गूगल में नौकरी शुरू की थी. इस दौरान वो गूगल टूलबार और गूगल क्रोम के लीड डेवलपमेंट टीम में थे. अब यह दुनिया के सबसे पॉपुलर वेब ब्राउज़र के तौर जाना जाता है.

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