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दुघर्टना और आपदा में छोटे दुकानदारों को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए सरकार उठाएगी बड़ा कदम! चेक करें डिटेल्‍स

दुघर्टना और आपदा में छोटे दुकानदारों को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए सरकार उठाएगी बड़ा कदम! चेक करें डिटेल्‍स

5 करोड़ लोगों का रोजगार देने वाले रिटेल सेक्‍टर का जीडीपी में 12 फीसदी योगदान है.

5 करोड़ लोगों का रोजगार देने वाले रिटेल सेक्‍टर का जीडीपी में 12 फीसदी योगदान है.

सरकार प्रस्‍तावित राष्‍ट्रीय खुदरा व्‍यापार नीति (national retail trade policy) में किराना व्‍यापारियों जैसे छोटे कारोबारियों के लिये बीमा योजना भी ला सकती है. इसका मकसद छोटे कारोबारियों के नुकसान की भरपाई करना है. 5 करोड़ लोगों का रोजगार देने वाले रिटेल सेक्‍टर का जीडीपी में 12 फीसदी योगदान है.

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नई दिल्‍ली. किराना दुकानदार जैसे छोटे कारोबारियों के लिये सरकार एक बीमा योजना लाने पर विचार कर रही है. उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) जल्द ही इसके लिये आम राय लेनी शुरू करेगा. सरकार द्वारा प्रस्‍तावित राष्ट्रीय खुदरा व्यापार नीति (national retail trade policy)में बीमा योजना को भी शामिल किया जा सकता है. राष्ट्रीय खुदरा व्यापार नीति देश में छोटे व्‍यापारियो की मदद कर उन्‍हें प्रोत्‍साहन देने के उद्देश्‍य से लायी जा रही है. देश का खुदरा क्षेत्र करीब 5 करोड़ लोगों को रोजगार उपलब्‍ध कराता है.

नई खुदरा व्‍यापार नीति में नीति में सस्ते कर्ज की सुविधा, डिजिटलीकरण और इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने जैसे कामों की घोषणा होगी. देश के खुदरा कारोबारियों की शिकायत रही है कि उन्हें बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है.

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बुरे वक्‍त में सहायता के लिये बीमा

बिजनेस स्‍टैंडर्ड की एक खबर के मुताबिक सरकार की नई खुदरा नीति में किराना दुकानदार जैसे छोटे कारोबारियों के लिए बीमा योजना (Insurance cover for traders) लायेगी. इसका मकसद दुर्घटना या किसी प्राकृतिक आपदा में छोटे व्‍यापारियों को होने वाले नुकसान की भरपाई करना है. देश के छोटे कारोबारियों की शिकायत है कि बड़ी ई-कामॅर्स कंपनियों के अवैध कारोबारी हथकंडों से उनके लिये व्‍यापार दिन प्रतिदिन मुश्किल होता जा रहा है. इसलिए सरकार को हितों के लिये कुछ करना चाहिए. इसी मांग को देखते हुए सरकार अब खुदरा व्‍यापार नीति ला रही है.

जीडीपी में खुदरा कारोबार का 12 फीसदी योगदान

भारतीय उद्योग परिसंघ (CCI) और वैश्विक सलाहकार कंपनी कार्नी द्वारा तैयार रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय अर्थव्यवस्था में खुदरा तीसरा सबसे बड़ा क्षेत्र है, जिसका सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 12 फीसदी से अधिक सकल मूल्य योगदान है। यह क्षेत्र पांच करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देता है। पिछले साल केंद्र ने थोक और खुदरा कारोबार को सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उपक्रम (MSME) की श्रेणी में शामिल किया. ऐसा इ‍सलिये किया गया था ताकि छोटे कारोबारी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के वर्गीकृत प्राथमिक क्षेत्रों के तहत कर्ज हासिल करने के हकदार हो सकें.

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RAI ने खुदरा नीति को बताया महत्‍वपूर्ण

रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (RAI) के सीईओ कुमार राजगोपालन का कहना है कि राष्ट्रीय खुदरा व्यापार नीति एक सुविधा योजना है.  यह देश में आंतरिक व्यापार के विभिन्न पहलुओं में मदद करेगी। डीपीआईआईटी इस नीति के अलावा ओपन नेटवर्क डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) को शुरू करने की अगुआई कर रहा है, जिसका मकसद डिजिटल एकाधिकारों पर अंकुश लगाना और खुदरा उद्यमों को लाभ मुहैया कराना है.

Tags: Business news in hindi, E-commerce industry, Insurance scheme, Retail segment

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