GST पेमेंट में की देरी तो सरकार को देना होगा ब्याज!

GST पेमेंट में की देरी तो सरकार को देना होगा ब्याज!
46,000 करोड़ रुपये तक ब्याज का बकाया

सीबीआईसी (CBIC) ने अपने क्षेत्रीय अधिकारियों को हाल में निर्देश दिया है कि वे विलम्ब से भुगतान किए गए माल एवं सेवाकर (GST) के भुगतानों पर बकाया ब्याज की वसूली शुरू करें. अनुमान है कि ब्याज का बकाया 46,000 करोड़ रुपये तक हो गया है.

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नई दिल्ली. केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (Central Board of Indirect Taxes and Customs, CBIC) ने स्पष्ट किया अब जीएसटी भुगतान (GST Payment) में देरी पर ब्याज की गणना नेट देनदारियों (Tax Liability) के आधार पर की जाएगी. इसके लिए जीएसटी कानूनों में संशोधन किए गए हैं. सीबीआईसी ने अपने क्षेत्रीय अधिकारियों को हाल में निर्देश दिया है कि वे विलम्ब से भुगतान किए गए माल एवं सेवाकर (GST) के भुगतानों पर बकाया ब्याज की वसूली शुरू करें. अनुमान है कि ब्याज का बकाया 46,000 करोड़ रुपये तक हो गया है. इस निर्देश से उद्योग जगत में चिंता बतायी जा रही है.

उद्योग जगत की चिंताओं के बीच सीबीआईसी ने एक के बाद एक कई ट्वीट जारी करके स्पष्ट किया है कि केंद्र और राज्य सरकारों ने जीएसटी संबंधी अधिनियमों में पिछली तिथि से प्रभावी संशोधन कर दिए हैं. इसके बाद अब ब्याज की गणना कर के शुद्ध बकाए के आधार पर की जाएगी. एक ट्वीट में बोर्ड ने कहा है, अभी जीएसटी के अधिनियमों में विलम्ब से किए जाने वाले जीएसटी भुगतान पर ब्याज की गणना सकल देनदारी के आधार पर करने की छूट है. ये भी पढ़ें: अप्रैल से सुकन्या और PPF खाते को लेकर होगा बड़ा बदलाव! अब भी नहीं चुकाना होगा इन 9 आय पर टैक्स





इस कानूनी स्थिति और तेलंगाना उच्च न्यायालय के ओदश के बावजूद केंद्र सरकार और कई राज्य सरकारों ने जीएसटी परिषद की सिफारिशों के आधार पर अपने-अपने सीजीएसटी/एसजीएसटी अधिनियमों में संशोधन कर लिए हैं ताकि विलम्ब से किए जाने वाले जीएसटी भुगतान पर शुद्ध देनदारी के आधार पर ब्याज लगाया जा सके.
आयातकों-निर्यातकों को देनी होगी ये जानकारी
15 फरवरी से आयातकों (Imorters) और निर्यातकों (Exporters) को दस्तावेजों में अनिवार्य तौर पर माल एवं सेवा कर (GST) पहचान संख्या (GSTIN) की जानकारी उपलब्ध करानी होगी. GSTIN पैन (PAN) आधारित 15 अंकों वाली विशिष्ट पहचान संख्या है और जीएसटी के तहत हर पंजीकृत निकाय को इसका आवंटन किया जाता है. आयातकों को सीमा शुल्क विभाग के पास एंट्री बिल जमा करना होता है जबकि निर्यातकों को शिपिंग बिल जमा करना होता है. ये भी पढ़ें: तीसरी प्राइवेट ट्रेन काशी महाकाल एक्सप्रेस- कराएगी तीन ज्योतिर्लिंगों के दर्शन, जानिए रूट और किराए के बारे में....



 

14 मार्च को होगी GST काउंसिल की बैठक
जीएसटी काउंसिल (GST Council) की अगली बैठक अब 14 मार्च को दिल्ली में होनी है. जीएसटी काउंसिल की इस बैठक में जीएसटी रेट और स्लैब (GST Slabs) की समीक्षा की जाएगी. जीएसटी रेट और स्लैब की समीक्षा इसलिए की जाएगी, ताकि जीएसटी वसूली बढ़ाने के उपायों को तलाशा जा सके.

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