2.5 लाख से ज्‍यादा है PF कॉन्ट्रिब्यूशन तो ब्याज पर लगेगा टैक्‍स, 1 अप्रैल से लागू नए नियम को ऐसे समझें

कर्मचारी भविष्य निधि

कर्मचारी भविष्य निधि

केंद्र सरकार ने बजट 2021 (Budget 2021) में घोषणा की थी अगर आपके ईपीएफ खाते (EPF Account) में 2.5 लाख रुपये से ज्‍यादा का निवेश हो रहा है तो आपको अतिरिक्त निवेश से मिलने वाले ब्याज पर टैक्स चुकाना होगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 15, 2021, 5:36 PM IST
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नई दिल्ली. रिटायरमेंट के बाद अपने भविष्य को वित्तीय रूप से सुरक्षित रखने के लिए मार्केट में कई ऑप्शन मौजूद हैं. इनमें निवेश के जरिए रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी का खर्च उठाया जा सकता है. इनमें कर्मचारी भविष्य निधि यानी ईपीएफ (Employees’ Provident Fund) एक बेहतर विकल्प माने जाते हैं. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने बजट 2021 में ऐलान किया था कि पीएफ (PF) में सालाना 2.5 लाख रुपये तक के निवेश पर मिलने वाला ब्याज टैक्स फ्री होगा, लेकिन इसके ऊपर किए गए निवेश पर जो भी ब्याज मिलेगा उस पर टैक्स देना होगा

पीएफ के नए नियम

>> यह नया प्रस्ताव 1 अप्रैल 2021 को या उसके बाद होने वाले पीएफ कॉन्ट्रिब्यूशन पर लागू होगा.

>> यह नया प्रस्ताव 31 मार्च 2021 तक होने वाले पीएफ कॉन्ट्रिब्यूशन पर लागू नहीं होगा.
>> आपने 2.5 लाख रुपये सालाना से ज्यादा पीएफ कॉन्ट्रिब्यूशन पर टैक्स देना होगा.

उदाहरण- 

मान लीजिए XYZ की बेसिक एनुअल सैलरी (बेसिक) 25 लाख रुपये है. पीएफ में उनका कॉन्ट्रिब्यूशन वित्त वर्ष 2021-22 में 12 फीसदी के हिसाब से 3 लाख रुपये है. ईपीएफ पर ब्याज दर 8.5% प्रति वर्ष मान ली जाए तो उनकी टैक्स लायबिलिटी की गणना निम्नलिखित तरीके से की जाएगी.



फंड में उनका कॉन्ट्रिब्यूशन = 25 लाख * 12% = 3 लाख रुपये

2.5 रुपये की लिमिट के साथ अतिरिक्त कॉन्ट्रिब्यूशन = 50 हजार रुपये

अतिरिक्त कॉन्ट्रिब्यूशन पर ब्याज = 50,000 * 8.5% = 4250 रुपये. यह राशि कर्मचारी की टैकसेबल इनकम में जोड़ दी जाएगी.

छोटे टैक्सपेयर्स को फर्क नहीं पड़ेगा 

2.5 लाख रुपये की फ्री लिमिट का फायदा ज्यादातर लोगों को होगा, जो कि सब्सक्राइबर्स हैं और उन्हें मिलने वाला ब्याज बिल्कुल टैक्स फ्री होगा. इसलिए छोटे और मध्यम वर्ग के टैक्सपेयर्स को नए नियम से कोई फर्क नहीं पड़ेगा. यह मुख्य रूप से उच्च आय वाले कर्मचारियों को प्रभावित करेगा.

क्या है ईपीएफ (EPF)

कर्मचारी भविष्य निधि के तहत कर्मचारियों को अपनी सैलरी से कम से कम 12 फीसदी वेतन जमा करनी होती है. नियोक्ता भी कर्मचारी के ईपीएफ में इतनी ही रकम डालता है. यह योगदान कर्मचारी के रिटायरमेंट फंड में होता है. 58 साल की उम्र के बाद ईपीएफ फंड की पूरी रकम निकाली जा सकती है. हालांकि, मेडिकल खर्च, घर बनाने, शिक्षा आदि के लिए इसमें से आंशिक रकम भी निकालने का प्रावधान है.

PF पर 5 लाख तक टैक्स छूट में है ये पेंच

हाल ही में केंद्र सरकार ने पीएफ पर पांच लाख रुपये तक के सालाना कॉन्ट्रिब्यूशन पर मिलने वाले ब्याज को एक खास वर्ग के लिए टैक्स फ्री कर दिया है. लेकिन इसका फायदा सिर्फ उन्हीं लोगों को होगा जिसमें एम्प्लॉयर की तरफ से कोई कॉन्ट्रिब्यूशन नहीं दिया जाता है.
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