जनवरी में इन म्यूचुअल फंड स्कीम में बना सबसे ज्यादा पैसा! आप भी उठा सकते हैं फायदा

साल 2019 के पहले महीने (जनवरी) में सभी कैटेगिरी को मिलाकर सबसे ज्यादा रिटर्न (मुनाफा) देने वाले इंटरनेशनल म्यूचुअल फंड है. यहां औसतन 9.11 फीसदी का रिटर्न (मुनाफा) मिला है.

News18Hindi
Updated: February 10, 2019, 4:46 AM IST
जनवरी में इन म्यूचुअल फंड स्कीम में बना सबसे ज्यादा पैसा! आप भी उठा सकते हैं फायदा
जनवरी में इन म्यूचुअल फंड स्कीम में बना सबसे ज्यादा पैसा! आप भी उठा सकते हैं फायदा
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Updated: February 10, 2019, 4:46 AM IST
लंबे समय के निवेश के लिए म्यूचुअल फंड एक अच्छा प्रोडक्ट है. म्यूचुअल फंड में निवेश एसआईपी के जरिए किया जा सकता है. लेकिन साल 2018 इक्विटी म्यूचुअल फंड के हिसाब से अच्छा नहीं रहा. पिछले 1 साल में 76 फीसदी इक्विटी म्यूचुअल फंड स्कीम (इक्विटी और इंडेक्स फंड वाली स्कीम) ने निगेटिव रिटर्न दिया है. इसका मतलब साफ है कि निवेशकों के लगे पैसे की वैल्यू बढ़ी नहीं बल्कि घट गई है. लेकिन साल 2019 के पहले महीने (जनवरी) में सभी कैटेगिरी को मिलाकर सबसे ज्यादा रिटर्न (मुनाफा) देने वाले इंटरनेशनल म्यूचुअल फंड है. यहां औसतन 9.11 फीसदी का रिटर्न (मुनाफा) मिला है.

इन फंड्स ने दिया सबसे ज्यादा मुनाफा- वैल्यूरिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, इंटरनेशल कैटेगिरी में सबसे ज्यादा 20.96 फीसदी  रिटर्न एचएसबीसी ब्राजील फंड ने दिया है.

फ्रैंकलिन इंडिया फीडर फ्रैंकलिन-यूएस ऑपर्चुनियटी फंड  ने 12.28 फीसदी का रिटर्न दिया है. वहीं, प्रिंसिपल ग्लोबल  ऑपर्चुनियटी फंड  ने 12.21 फीसदी का रिटर्न दिया है. (ये भी पढ़ें-इन म्यूचुअल फंड स्कीम में पैसा लगाने वालों को हुआ नुकसान! अब क्या करें निवेशक)



क्या होते है इंटरनेशनल म्युचूअल फंड-विदेश बाजारों में निवेश करने वाली म्यूचुअल फंड स्कीम को इंटरनेशनल फंड्स कहा जाता है. इस श्रेणी के तहत कोई विशेष लघु वर्ग नहीं है. इस तरह के फंड मुख्यत: किसी विशेष मुल्क या किसी विशेष कमोडिटी में या किसी विशेष थीम (सेक्टर) पर आधारित होते हैं.

डॉलर में मजबूती का फायदा इंटरनेशलन फंड में मिलता है. ये फंड किसी खास विदेशी बाजार में डॉलर में इन्वेस्टमेंट करते है. फंड का रिटर्न (मुनाफा) इस बात पर निर्भर करता है कि विदेशी शेयरों या बॉन्ड की कीमतों में कैसे और कितना बदलाव होता है. लेकिन, इसमें डॉलर-रुपये के बीच एक्सचेंज रेट की भी खासा भूमिका होती है.(ये भी पढ़ें-नौकरी करने से पहले आपका बच्चा बना जाएगा करोड़पति! जानिए प्लान की पूरी जानकारी)

इंटरनेशनल फंड के अंतिम एनएवी को डॉलर एसेट (शेयर, बॉन्ड इत्यादि) के मूल्य को स्थानीय मुद्रा में बदलकर निकाला जाता है. लिहाजा, फंड के रिटर्न प्रोफाइल में एक्सचेंज रेट के उतार-चढ़ाव का विशेष महत्व होता है. डॉलर के मुकाबले कमजोर रुपया फंड के वास्तविक रिटर्न को बढ़ा देता है. वहीं, मजबूत भारतीय मुद्रा से फंड का प्रदर्शन कमजोर होता है. हाल में इंटरनेशनल फंडों के रिटर्न प्रोफाइल में यह चलन देखने में आया है.

कोई भारतीय नागरिक इन स्कीम में भारतीय रुपयों में ही निवेश कर सकता है. किसी अन्य म्यूचुअल फंड की ही तरह आप स्कीम का चयन कर, आवेदन पत्र भर कर चेक जमा कर सकते हैं. इसके अलावा आप ऑनलाइन आवेदन भी कर सकते हैं.
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ये फंड्स भारतीय निवेशकों के प्रतिनिधि के रूप में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पैसा लगाते हैं. ये या तो सीधे विदेशी शेयरों में निवेश करते हैं या फिर किसी अन्य विदेशी म्यूचुअल फंड्स में निवेश करते हैं. किसी फंड द्वारा अन्य फंड्स में निवेश को फीडर रूट कहा जाता है. (ये भी पढ़ें-25 से 30 की उम्र में करेंगे ये काम, तो बन जाएंगे करोड़पति)

क्या मिलता है फायदा- ऐसे कई शेयर और सेक्टर हैं, जिनमे अभी भारत में निवेश नहीं किया जा सकता. इनका बाजार में सूचीबद्ध हो पाना भी मुश्किल है. कोला कंपनियां इसके उदाहरण हैं. ऐसे में भारतीय निवेशक ऑफशोर फंड में निवेश के जरिए इन कंपनियों की ग्रोथ का फायदा उठा सकते हैं. इसके अलावा इंटरनेशनल फंड्स आपको दुनियाभर के बाजार में निवेश कर मोटा रिटर्न देते है. साथ ही, जब भारतीय बाजार कमजोर पड़ते हैं, तो आप विदेशी बाजारों से कमाई कर सकते हैं.

इंटरनेशनल फंडों से जुड़ा जोखिम


(1) करेंसी का जोखिम- इंटरनेशल फंड का निवेश विदेशी मुद्राओं में होता है, जिससे करेंसी का जोखिम बढ़ जाता है. हाल ही में देखा गया है कि इमर्जिंग मार्केट की करेंसियों के मुकाबले अमेरिकी डॉलर में ज्यादा बढ़त आई है, वहीं रुपया निचले स्तरों तक आ गया था.

(2) देश से जुड़े राजनीतिक हालात- इंटरनेशनल फंडों की चाल हमेशा से उस देश पर आधारित होती है, जिसमें अर्थव्यवस्था और राजनीति की भूमिका काफी अहम होती है. कुछ इंटरनेशनल फंड केवल एक देश में ही निवेश करने पर ध्यानकेंद्रित करते हैं. लिहाजा अगर मान लीजिए कि उक्त देश में कोई संकट गहरा गया तो फंड के प्रदर्शन पर बुरा असर हो सकता है.

(3) टैक्स से जुड़ा जोखिम-इंटरनेशनल फंड जो 65 फीसदी भारतीय इक्विटी में निवेश करते हैं और बाकी का निवेश अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में होता है जिसे इक्विटी फंड के रूप में भी जाना जाता है. इन फंडों पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन के तहत 10 फीसदी की दर से वसूल जाता है लेकिन लॉन्ग टर्न कैपिटल गेन पूरी तरह टैक्स फ्री होता है.

इन सभी बातों पर गौर करने के बाद साफ जाहिर है कि इंटरनेशनल फंडों में निवेश करने पर निवेशकों का जोखिम कम होता ही है, साथ ही डाइवर्सिफिकेशन के जरिए रिटर्न भी अच्छे मिलने की उम्मीद बढ़ जाती है. निवेशक अपने जोखिम के हिसाब से इमर्जिंग मार्केट या फिर विकसित देशों के इंटरनेशनल फंडों में निवेश करने की योजना बना सकते हैं.

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