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Petrol की तरह इंटरनेशनल मार्केट तय कर रही है भारत में खाद्य तेलों के दाम! जानिए कैसे

बढ़ रही खाने के तेल की कीमतें

क्रूड ऑयल का दाम इंटरनेशनल मार्केट में होता है उसी के आधार पर पेट्रोल का भी दाम तय होता है. लेकिन अब भारत में खाद्य तेलों के दाम भी विदेशी बाजार तय कर रहा है.

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    नई दिल्ली. देश में बिकने वाले पेट्रोल (Petrol)-डीजल के दाम इंटरनेशनल मार्केट (International Market) तय करती है. क्रूड ऑयल का जो दाम इंटरनेशनल मार्केट में होता है उसी के आधार पर पेट्रोल का भी दाम तय होता है. लेकिन अब भारत में खाद्य तेलों के दाम भी विदेशी बाजार तय कर रहा है. भारत में बढ़ती खाद्य तेल (Edible oil) की डिमांड का फायदा भी विदेशी बाजार उठा रहा है. खाद्य तेल के महंगे होने की ऐसी एक नहीं अनेक वजह का जिक्र करते हुए यह बात अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शंकर ठक्कर ने कही हैं. साथ ही तीर और सुझाव देते हुए कहा है कि अगर ऐसा हो जाए तो खाद्य तेल सस्ता होने में एक दिन भी नहीं लगेगा.

    खाद्य तेल महंगा होने में ऐसे बढ़ रहा है विदेशी दखल

    राष्ट्रीय अध्यक्ष शंकर ठक्कर का कहना है, “एक सबसे बड़ा काम जो हम अभी तक नहीं कर पाए वो यह है कि 50 साल से हम पामोलिन का आयात कर रहे हैं. करीब 70 फीसद आयात तो हम अकेले मलेशिया और इंडोनेशिया से ही कर रहे हैं. लेकिन इस आयात को कम करने का कोई रास्ता नहीं निकाला गया. ऊपर से 7 साल में हमारी डिमांड और बढ़ गई. जैसे 7 साल पहले हम प्रति व्यक्ति 600 ग्राम तेल हर महीने इस्तेमाल करते थे. लेकिन आज की तारीख में 900 ग्राम इस्तेमाल कर रहे हैं.

    सिर्फ 30 फीसद तेल का उत्पादन हम अपने देश में कर रहे हैं. ऐसे में 900 प्रति व्यक्ति हर महीने के हिसाब से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि कितना तेल हमे आयात करना पड़ा है. यही एक सबसे बड़ी वजह है कि तेल का इंटरनेशनल मार्केट हमारे बाजार में खाद्य तेलों के दाम क्या होंगे इसमे दखल देने लगा है.”

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    ऐसा होने पर एक दिन भी नहीं लगेगा दाम कम होने में

    राष्ट्रीय अध्यक्ष शंकर ठक्कर बताते हैं, "भारतीय खाद्य तेलों के के बाजार को सबसे बड़ा झटका बीते साल उस वक्त लगा जब सरकार ने किन्हीं कारणों के चलते मलेशिया से तेल का आयात कम कर दिया. यह एक सीधा और बड़ा झटका खाद्य तेलों के बाजार को लगा था. मौजूदा बाजार को देखते हुए इसका हल निकालना बेहद जरूरी हो गया है.

    इसके साथ ही अगर सरकार खाद्य तेलों पर लगे कृषि सेस और 35 फीसद के भारी-भरकम आयात शुल्क को हटा ले, साथ ही बाजार में खाद्य तेलों के दाम सिर्फ सामान्य होने तक के लिए जीएसटी खत्म कर दे तो फिर तेल के दाम कम होने में एक दिन की देरी भी नहीं होगी और आम जनता को राहत मिलने लगेगी."