OECD के डिजिटल टैक्स सिस्टम के लिए भारत को अपनाना होगा ये रवैया!

डिजिटल टैक्स सिस्टम के खिलाफ अमेरिका
डिजिटल टैक्स सिस्टम के खिलाफ अमेरिका

डिजिटल टैक्स सिस्टम को अगले वर्ष 2021 के मध्य तक लागू करने पर विचार किया जा रहा है. हालांकि अमेरिका इसके सख्त खिलाफ है. ऐसे में भारत को भी चाहिए की वह इस मुद्दे पर सबकी सहमति से इसका हल निकालने की कोशिश करे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 17, 2020, 2:38 PM IST
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नई दिल्ली. आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) ने बीते महीने अंतरराष्ट्रीय कर नियमों (International Tax Rules) में बदलाव की बात रखी थी. इस संबंध में संगठन ने 135 से ज्यादा देशों के साथ डिजिटल टैक्स (Digital Taxation) पर सहयोग करने की भी अपील की थी. यूरोपीय संघ (European Union) के अन्य देश और फ्रांस (France) चाहते हैं कि अमेरिका (America) की दिग्गज कंपनी गूगल (Google) और अमेजोन (Amazon) जैसी कंपनियों को डिजिटल टैक्स सिस्टम के दायरे में लाया जाए. हालांकि अमेरिका इसके सख्त खिलाफ है. ऐसे में भारत को भी चाहिए की वह इस मुद्दे पर सबकी सहमति से इसका हल निकालने की कोशिश करे.

2021 के मध्य तक लागू करने का लक्ष्य
डिजिटल टैक्स सिस्टम को अगले वर्ष 2021 के मध्य तक लागू करने पर विचार किया जा रहा है. संगठन का मानना है कि डिजिटल टैक्स सिस्टम के लागू होने से सालाना 100 अरब डॉलर का कंपनी इनकम टैक्स जुटा सकते हैं, लेकिन अमेरिका इस पर राजी नहीं है. बता दें कि ओईसीडी का 'बेस इरोजन एंड प्रोफिट शिफ्टिंग पैकेज' अंतरराष्ट्रीय टैक्स नियमों में बदलाव की बात करता है, लेकिन राजनीतिक और तकनीकी मुद्दे इसके आड़े आ रहे हैं. हालांकि ओईसीडी का ब्लूप्रिंट डिजिटल टैक्स सिस्टम के लिए भविष्य में एक प्रभावी उपाय साबित होगा. वहीं, इसके सदस्य भी साल 2021 के मध्य तक इसे लागू करने के पक्ष में हैं.

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संगठन को बड़े सुधार की उम्मीद


बता दें कि ओईसीडी का ब्लूप्रिट टैक्स ढांचे में एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है जो डिजिटल बिजनेस मॉडल से अलग है. संगठन के प्रस्ताव उन सभी अंतरराष्ट्रीय टैक्स नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकते हैं जिनके तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिजनेस किया जा रहा है, लेकिन कुछ देश संगठन के नए टैक्स सिस्टम पर सवाल खड़ा कर इन्हें अर्थव्यवस्था के लिहाज से अप्रभावी बता रहे हैं. बता दें कि मौजूदा टैक्स सिस्टम मूल रूप से आर्थिक गतिविधियों के साथ-साथ टैक्स अधिकारों के बंटवारे पर केंद्रित है. अब संगठन को नये टैक्स सिस्टम से इसमें बड़े सुधार की उम्मीद है.

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सर्वसम्मति से समाधान जरूरी
बड़ी-बड़ी टैक्स चुनौतियों से निपटने के लिए मौजूदा नियमों में कमी बड़ी चिंता का सवाल है जिसमें साल 2015 से अबतक बेबुनियाद और एकतरफा रुप से कदम उठाए जा रहे हें. इसलिए जरूरी है कि इस मुद्दे पर सभी सदस्य देशों की सहमति से ही समाधान निकाला जाए. इसमें सभी हितधारकों को भी ध्यान में रखा जाए. वहीं, 2016 से भारत ने डिजिटलाइजेशन से पैदा हुईं टैक्स चुनौतियों को दूर करने के लिए कई एकतरफा कदम उठाए हैं. भारत के इस एकतरफा कदम उठाने के तरीके से मल्टी-नेशनल बिजनेस के लिए बड़ी समस्या पैदा होने की संभावना है और साथ ही नये डिजिटल टैक्स सिस्टम के रास्ते में बड़ी बाधा भी है. इसलिए जरूरी है कि भारत इस पर जल्द विचार करे जिससे सबकी सहमति से इसका हल निकालकर इस नए टैक्स सिस्टम को जल्द से जल्द लागू किया जा सके.
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