Women's Day: अब कंपनी की बागडोर संभालेंगी महिलाएं! जाॅब, वेतन, प्रमोशन और लीडरशिप पोस्ट में मिलेगी बराबरी

Religare ग्रुप की एक्ज़क्टिव चेयरपर्सन डॉ रश्मि सलूजा

Religare ग्रुप की एक्ज़क्टिव चेयरपर्सन डॉ रश्मि सलूजा

कोरोना वायरस (Corona virus pandemic) की वजह से कई नौकरियां चली गईं, लेकिन अब अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट रही है. रोजगार के मौके खुलने लगे हैं. अपने युवा पाठकों के लिए न्यूज18 ने देश के टॉप एचआर लीडर (HR Leader) के साथ खास सीरीज "नौकरी की बात" (Naukari ki bat) शुरू की है. इस बार हम खास महिलाओं के लिए रोजगार की बात करेंगे.

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नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Corona virus pandemic) की वजह से कई नौकरियां चली गईं, लेकिन अब अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट रही है. रोजगार के मौके खुलने लगे हैं. अपने युवा पाठकों के लिए न्यूज18 ने देश के टॉप एचआर लीडर (HR Leader) के साथ खास सीरीज "नौकरी की बात" (Naukari ki bat) शुरू की है. इस बार हम खास महिलाओं के लिए रोजगार की बात करेंगे. आज महिला दिवस (International women's Day) है, इस मौके पर हम बात करेंगे रेलीगेयर ग्रुप (Religare enterprises ltd.) की एक्ज़क्टिव चेयरपर्सन (executive chairperson) डॉ रश्मि सलूजा (Rashmi Saluja) से. बता दें कि डॉ सलूजा एक एंटरप्रेन्योर हैं. वे एमबीबीएस, एमडी और एमबीए (Finace) हैं. 25 साल से अधिक एडमिनिस्ट्रेटिव एक्सपीरियंस हैं और उन्होंने रेलीगेयर ग्रुप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. वह प्रमुख कॉर्पोरेट लीडर्स में से एक रही हैं. पेश हैं उनसे बातचीत के अंश-

सवाल: फाइनेंस सेक्टर में जेंडर डायवरसिटी के बारे में क्या सोचती हैं?
जवाबः खासतौर पर भारत में सफल महिला लीडर्स की बढ़ती संख्या इस बात को दर्शाती है कि एंटरप्रेन्योरशिप के क्षेत्र में हम रूढ़िवादी अवधारणाओं से बाहर निकल रहे हैं. मेरा मानना है कि हर महिला के अपने सपने होने चाहिए और इन सपनों को साकार करने के लिए उनमें दृढ़ विश्वास रखना चाहिए. आज ज्यादा से ज्यादा लोग महिलाओं की कैपेबिलिटी को समझ रहे हैं. उनकी यूनिक कैपेबिलिटी को पहचान रहे हैं जैसे कि मल्टीटास्किंग, पुरूषों की तुलना में ज्यादा धैर्य रखना और बेहतरीन बिजनेस लीडर्स बनना. यही वजह है कई कंपनियों में महिलाएं टॉप मैनेजमेंट में शामिल हैं.
सवाल: टॉप मैनेजमेन्ट में महिलाएं किस तरह बिजनेस में पाॅजिटिव बदलाव लेकर आती हैं?
जवाबः मेरा मानना है कि खासतौर पर महिला लीडर्स के रूप में हमें उन्हें भरोसा देना होता है, उन्हें बताना होता है कि आप यह कर सकते हैं और एक कंपनी के रूप में हम आपकी मदद के लिए हमेशा तैयार हैं. लेकिन इसमें भी दो-तरफा रिश्ता होना चाहिए. मैं अगली पीढ़ी की महिलाएं, जो मैनेजमेंट पोस्ट में आना चाहती हैं, उनसे कहना चाहूंगी कि वे मेंटर्स और स्पॉन्सर्स पर खास ध्यान दें. हालांकि, महिला लीडर्स के लिए सबकुछ इतना आसान भी नहीं है, उन्हें संस्थान में अपनी पहुंच बनानी होती है और अपने करियर की एम्बिशन को हासिल करने के लिए विश्वास रखना होता है. सीनियर पोस्ट पर मौजूद महिलाओं को अन्य महिलाओं के लिए रोल मॉडल की भूमिका निभानी होती है और उन्हें कोचिंग, मेंटरिंग एवं अपने करियर की शेयर करने के लिए हमेशा उपलब्ध रहना होता है.



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adसवाल: महिला लीडर्स डिसरप्टिव इनोवेशन में मुख्य भूमिका निभा रही हैं, इस बारे में आपकी क्या राय है?
जवाबः अगर आसान शब्दों में कहें तो ऐसी कई चीजें हैं, जहां महिलाएं बेहतर परफोर्मेन्स देती हैं. एक्ज़क्टिव लीडरशिप के पदों पर मौजूद महिलाओं में अपने सहकर्मियों के प्रति सहानुभुति, आपसी सहयोग का भाव होता है. वे ह्यूमैनिटी और डिजिटलीकरण के साथ संस्थान के विकास में अहम भूमिका निभाती हैं. अपने फीमेल लीडरशिप बिहेवियर के जरिए से वे एक संस्थान में एनर्जी/ तेजी लेकर आती हैं. साथ ही एशिकल प्रैक्टिसेज को बनाए रखते हुए, ग्राहकों की जरूरतों को समझते हुए इनोवेट करती हैं. टॉप मैनेजमेन्ट में मौजूद महिलाओं की ये विशेषताएं आपसी सहयोग को बेहतर बनाकर समस्याओं को आसानी से सुलझाने में मदद करती हैं. महिलाएं ज़्यादा जानकारी को प्रोसेस करने के लिए आसानी से अपने आप को ढाल लेती हैं, महत्वपूर्ण चीज़ों को बेहतर याद रखती हैं, स्थिति को तथा अन्य लोगों को बेहतर समझती हैं.
सवाल: संस्थान में जेंडर गैप को लेकर आपकी क्या राय है?इसे कैसे खत्म किया जा सकता है?
जवाबः महिलाएं भले हर सेक्टर में अपनी पहचान बना रही हैं लेकिन बात जेंडर गैप, सैलरी स्क्ट्रचर में पुरुषों के मुकाबले काफी डिफ्रेंस होता है. हालांकि, अब वक्त बदल रहा है, चीजें बदल रही हैं. आने वाले समय में जेंडर गैप जैसी समस्याएं काफी कम होगी. लेकिन यह समझना भी जरूरी है कि समानता का अर्थ यह नहीं कि बोर्ड, एक्ज़क्टिव कमेटी और सीईओ में 50 फीसदी महिलाएं हों. इसके बजाए संस्थान को पुरूषों एवं महिलाओं को एक समान समर्थन देना चाहिए फिर चाहे जॉब रोल की बात हो या योग्यता के आधार पर वेतन की. कुल मिलाकार इसका अर्थ यह है कि रोजगार के अवसर, प्रोमोशन के अवसर, लीडरशिप के पद सभी के लिए एक समान रूप से उपलब्ध होने चाहिए. ये पेशेवर संभावनाएं उस हर व्यक्ति के लिए खुली हों जिसके पास कौशल, अनुभव और अपने काम के लिए सही दृष्टिकोण है. फिर चाहे वह महिला हो या पुरूष. इसके लिए ट्रांसपैरेंसी, बातचीत और भरोसे पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है. लीडर्स को डायवरसिटी एवं समावेशन को बढ़ावा देने के लिए अपने वादों पर खरा उतरना चाहिए. यानि महिलाओं की भर्ती के लिए स्पष्टता हो, उन्हें सहयोगपूर्ण भावी लीडर्स के रूप में पहचाना जाए. मैनेजमेंट को इस तरह का माहौल बनाना चाहिए जहां महिलाएं अपनी निजी एवं पेशेवर महत्वाकांक्षाओं के बीच संतुलन बना सकें. एक वर्क कल्चर ऐसा होना चाहिए जहां जहां लोग स्मूदली काम कर सकें.

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सवाल: वित्तीय क्षेत्र में महिला लीडर्स की भूमिका और चुनौतियां किस तरह की होती हैं?
जवाबः एक बात जो मुझे चुनौतीपूर्ण लगती है हालांकि इसमें रूढ़ीवादी अवधारणाओं को बदलने की क्षमता है, वह है लीडरशिप और सफलता जो फाइनेंस सेक्टर को प्रभावित करती है. ये अवधारणाएं हमारे रोज़मर्रा के हर काम तथा लीडरशिप के लिए आावश्यक विशेषताओं से जुड़ी हैं. भारत का फाइनेंस सेक्टर अर्थव्यवस्था में सबसे तेजी से विकसित हो रहा है. एक रूझान अवसरों को बढ़ावा देगा. एजुकेटेड महिलाएं जो भविष्य में फाइनेंस सेक्टर में काम करना चाहती हैं उन्हें ढ़ेरों मौके मिलेंगे. साथ ही, नई सोच वाले कई संस्थानों में अब लिंग समानता एक पाॅलिसी बन चुकी है, फिर चाहे बोर्डरूम में महिलाओं के लिए एक समान प्रतिनिधित्व की बात हो या अफसरों की भर्ती की. मेरा मानना है कि ये बदलाव सिर्फ फाइनेंस सेक्टर में ही नहीं सभी सेक्टर में महिलाओं को रोजगार के मौके मिलेंगे.
सवाल: फाइनेंस सेक्टर में महिलाओं खासकर युवाओं को सफल करियर के लिए कैसे प्रोत्साहित किया जा सकता है?
जवाबः एक आधुनिक और डायनामिक इंडस्ट्री के रूप में, फाइनेंस सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण है कि महिलाओं के लिए अधिक से अधिक अवसर उत्पन्न करे, ताकि उन्हें न केवल इस क्षेत्र में काम मिले बल्कि नेतृत्व के अवसर भी मिले. मार्डन पॉलिसी को शामिल किया जाए तथा सभी स्तरों पर महिलाओं के कौशल एवं लीडरशिप ट्रेनिंग/स्किल्स को बढ़ावा दिया जाए. इसे बढ़ावा देने के लिए लीडरशिप विकास प्रोग्राम, मेंटरिंग प्रोग्राम समेत जरूरी प्रोग्राम्स होने चाहिए. संस्थान में महिला परिषद (Women's councils) का निर्माण किया जाए जो महिलाओं के विकास को प्रोत्साहित करे.

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सवाल: आप एक संस्थान में लीडरशिप रोल में हैं, आप अपने वर्क और पर्सनल लाइफ को कैसे मैनेज करती हैं?
जवाबः काम और जीवन के बीच संतुलन हर महिला लीडर के सामने आने वाली बड़ी चुनौती होती है. कॉर्पोरेट की सीढ़ीयां चढ़ने, लीडर बनने के साथ-साथ परिवार और बच्चों के लिए समय निकालना आसान नहीं होता. ऐसे में काम और जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी है कि आप पर्सनल और वर्क लाइफ के प्रति प्रोपर अप्रोच रखें. अपनी प्राथमिकताएं तय करें, एक्शन प्लानिंग अपनाएं और इसे गंभीरता से लें. अपनी कैपेबलिटी और वैल्यू को समझें. हमेशा नया सीखने का प्रयास करें और अपने आस-पास सपोर्ट टीम बनाएं. इन्हीं सब चीजों के साथ मैं पर्सनल और वर्क लाइफ के बीच अच्छा तालमेल बना पाती हूं.
सवाल: कंपनी मे युवतियों के लिए क्या अवसर हैं और उन्हें काम के लिए कैसे तैयार होना चाहिए?
जवाबः अपने करियर की योजनाओं को लेकर स्पष्ट रहें, अपने लिए सफलता के मार्ग को पहचानें और सुनिश्चित करें कि आप इस दिशा में ठीक से काम कर रहीं हैं. आपको ट्रांसपैरेंसी रखनी चाहिए. आपमें अपनी कैपेबिलीटीज को शो करने के लिए और उपलब्धियों को हासिल करने के लिए लगातार प्रयास करते रहना चाहिए. नेटवर्किंग के तरीकों जैसे इवेंट्स, सम्मेलन और पीयर-मेंटरिंग ग्रुप के बारे में जानने के प्रयास करने चाहिए. नौकरी बेवसाइट्स पर एक्विव रहें. साथ ही सोशल भी एक्टिव रहें.
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