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Investment करते वक्त 10 बातें जानना जरूरी, निवेश पर पड़ता है सीधा असर, जानिए डिटेल

 बैंक में फिक्स पर कई तरह के टैक्स लाभ भी मिलते हैं.

बैंक में फिक्स पर कई तरह के टैक्स लाभ भी मिलते हैं.

निवेश करते वक्त हर कोई सोचता है कि उसको ज्यादा से ज्यादा रिटर्न मिले. साथ ही उसका निवेश सुरक्षित भी रहे. अच्छा रिटर्न और सुरक्षित निवेश के लिए कुछ महत्वपूर्ण बातोंं को जानना जरूरी है.

  • News18Hindi
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    FD: किसी भी योजना में निवेश करते वक्त हम अक्सर कुछ जरूरी बातों पर ध्यान नहीं देते. निवेश से जुड़ी कुछ प्रमुख बातों को जानना चाहिए. वरना हम अपने Investment पर ज्यादा रिटर्न पाने से चूक जाते हैं. म्यूचुअल फंड और तेजी से बढ़ते शेयर बाजार में निवेश के बीच आज ही एफडी (FD) निवेश का एक पसंदीदा विकल्प बना हुआ है. एफडी पर ब्याज दर भले ही कम हो लेकिन इसे निवेश और बचत का सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है.

    बैंक में फिक्स पर आयकर से लेकर कई तरह के टैक्स लाभ भी मिलते हैं. इसलिए एफडी में अगर आप निवेश कर रहे हैं तो आपको कुछ बुनियादी बातें जरुर जाननी चाहिए. ये आपके निवेश पर मिलने वाले रिटर्न को प्रभावित करती हैं.

    अवधि
    एफडी पर निवेश करने से पहले आपको इसकी अवधि को लेकर स्पष्ट रहना चाहिए. समान्य तौर पर यह अवधि 7 दिनों से लेकर 10 साल की होती है. इस अवधि को आप अपनी जरूरतों को ध्यान में रखकर चुनें. समय से पहले एफडी तोड़ने पर आपको ब्याज आमदनी पर नुकसान हो सकता है.

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    जमा राशि
    जमा की न्यूनतम राशि का ध्यान रखें. SBI, में यह राशि 1 हजार रुपए जबकि ICICI Bank में 10 हजार रुपए. HDFC Bank, ने इसकी सीमा 5 हजार रुपए तय की है.

    ब्याज दरें
    FD में अवधि के हिसाब से अलग-अलग ब्याज दरें प्राप्त होती हैं. जमा शुरू करने से पहले आपको इन ब्याज दरों की जांच कर लेनी चाहिए. आमतौर पर सीनियर सिटीजन को 50 बेसिस प्वाइंट अतिरिक्त ब्याज प्राप्त होता है.

    कर छूट
    इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार एफडी का रिटर्न टैक्स योग्य होता है. यदि ब्याज आमदनी 10 हजार रुपए से अधिक है तो बैंक इस पर टीडीएस काट सकता है. आपको टीडीएस नहीं कटवाना है तो बैंक में 15G/H फार्म जमा करना चाहिए. बैंक और पोस्ट ऑफिस में किए गए पांच सालों वाले एफडी पर कोई कर नहीं लगता.

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    समय से पहले निकासी
    आप परिपक्वता अवधि से पहले एफडी से निकासी कर सकते हैं, किंतु इसके लिए आपको कुछ राशि बतौर फाइन देना पड़ सकता है. समान्य रूप से यह कुछ राशि का 1 से 1.5 फीसदी के बीच होता है. कुछ बैंक एक निश्चित अवधि के बाद की गई निकासी पर कोई फाइन नहीं लेते.

    भुगतान विकल्प
    आप परिपक्वता अवधि पूरी होने के बाद पूरी निवेश राशि, ब्याज समेत, को ले सकते हैं. साथ ही इसे मासिक, तिमाही, औऱ वार्षिक आधार पर भी लेने का विकल्प होता है.

    लोन सुविधा
    एफडी पर ओवरड्राफ्ट भी प्राप्त किया जा सकता है. साथ ही एफडी के एवज में लोन भी मिलता है. ओवरड्राफ्ट की राशि एफडी की राशि से कम होती है, और इस पर ब्याज अधिक होता है. एफडी राशि का 90-95 फीसदी हिस्सा बतौर लोन प्राप्त किया जा सकता है.

    स्वत: नवीनीकरण
    FD हर साल स्वत: नवीनीकृत हो जाता है. आजकल, लगभग सभी बैंक एफडी खोलने और स्वत: नवीनीकरण के लिए ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं.

    नॉमिनी सुविधा
    एफडी पर आप किसी एक व्यक्ति या एक से अधिक व्यक्ति को नॉमिनी बना सकते हैं. एफडी खोलने से पहले नॉमिनी दर्ज कराना चाहिए. ऐसा न करने पर, यदि जमाकर्ता की अचानक मृत्यु हो जाए तो एफडी राशि प्राप्त करने में उसके परिवार को दिक्कत हो सकती है.

    सुरक्षा
    निवेश के वक्त यह भी एक महत्वपूर्ण बात है जिसे दिमाग में रखना चाहिए. किस बैंक में या किस स्कीम में आप पैसा जमा कर रहे हैं, इसकी जांच-पड़ताल जरूर कर लेनी चाहिए. जहां आप पैसा लगा रहे वो संस्थान या स्कीम कितनी सुरक्षित है ताकि आपकी मेहनत कमाई डूबे न.

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