आप भी करते हैं शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में निवेश? जानिए कितना देना होगा टैक्स

सेल इनकम और डिविडेंड इनकम पर टैक्स देयता ​अलग-अलग है.
सेल इनकम और डिविडेंड इनकम पर टैक्स देयता ​अलग-अलग है.

Tax on Share Market Investment: शेयर बाजार में निवेश करने के साथ स्टॉक्स व म्यूचुअल फंड्स (Mutual Funds) से जुड़े ​टैक्स नियमों के बारे में भी जानना जरूरी है. सेल इनकम पर टैक्स स्टॉक्स या म्यूचुअल फंड की संख्या व फ्रिक्वेंसी जैसी बातों पर निर्भर करता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 22, 2020, 1:01 PM IST
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नई दिल्ली. तकनीक अपग्रेडेशन और जीरो ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म्स की वजह से आज के समय में हर कोई स्टॉक मार्केट में आसानी से निवेश कर सकता है. लेकिन स्टॉक मार्केट (Stock Market) में निवेश करने से पहले जैसे अन्य बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है, वैसे ही इससे जुड़े टैक्स नियमों की भी जानकारी रखनी चाहिए. म्यूचुअल फंड (Mutual Funds) या स्टॉक्स की खरीद-बिक्री ही कमाई (इसे सेल इनकम भी कहते हैं) का एक मात्र जरिया नहीं है. बल्कि इन पर मिलने वाले डिविडेंड्स से भी कमाई होती है. सेल इनकम और डिविडेंड इनकम (Dividend Income) पर टैक्स देयता ​अलग-अलग है. सेल इनकम पर टैक्स स्टॉक्स या म्यूचुअल फंड की संख्या व फ्रिक्वेंसी जैसी बातों पर निर्भर करता है. आइए जानते हैं इनके बारे में...

डिविडेंड इनकम पर टैक्स का प्रावधान: यह बेहद सरल है. डिविडेंड को 'अन्य स्त्रोत से होने वाली कमाई' की श्रेणी में डाला जाता है और इसके बाद इसपर उचित दर पर टैक्स काटा जाता है. डिविडेंड देने वाली कंपनी ही टैक्स एट सोर्स की कटौती करती है. यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस तरह के निवेशक हैं.

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सेल इनकम पर टैक्स का प्रावधान:
(A) एक्टिव ट्रेडिंग इन्वेस्टर्स के लिए सेल इनकम 'बिजनेस से होने वाली इनकम' की श्रेणी में आता है. अगर बिना डिलीवरी की ही ट्रेडिंग की गई है तो इसे 'स्पेक्युलेटिव बिजनेस इनकम' की श्रेणी में डाला जाता है. मुनाफे में से ब्रोकर का कमिशन, इंटरनेट चार्ज, डिमैट अकाउंट चार्जेज आदि को घटा लिया जाता है. ऐसे में टैक्स केवल कुल मुनाफे पर ही देना होता है. अगर यह रकम 5 करोड़ रुपये से ज्यादा की होती है तो इसके लिए टैक्स ऑडिट भी की जा सकती है.

(B) अगर कोई ऐसी स्थिति है कि कोई व्यक्ति इन्वेस्टमेंट तो करता है लेकिन एक्टिव ट्रेडिंग में शामिल नही है तो इसे कैपिटल गेन्स की श्रेणी में डाला जाता है. म्यूचुअल फंड्स/स्टॉक्स की बिक्री पर कैपिटल गेन्स इस बात पर निर्भर करता है कि सेल से पहले इसे कितने दिन के लिए होल्ड किया गया.

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लिस्टेड कंपनियों के शेयर बायबैक: जब कोई भारतीय कंपनी शेयर बायबैक करती है तो शेयरहोल्डर्स को मिलने वाली रकम पर टैक्स नहीं देना होता है. लिस्टेड कंपनी की तरफ से ही यह टैक्स जमा कर दिया गया होता है.
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