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Investment Tips: इक्विटी में निवेश की शुरुआत कैसे करें, जानिए इससे जुड़ी सभी जरूरी बातें?

Investment Tips: इक्विटी में निवेश की शुरुआत कैसे करें, जानिए इससे जुड़ी सभी जरूरी बातें?

 लांग टर्म में रिटर्न के नजरिए से इक्विटी निवेश का सबसे बेहतर विकल्प हो सकता है.

लांग टर्म में रिटर्न के नजरिए से इक्विटी निवेश का सबसे बेहतर विकल्प हो सकता है.

अगर आप डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट खुलवाए हुए हैं तो इक्विटी में आप सीधे (डायरेक्ट) निवेश कर सकते हैं. लेकिन निवेश की शुरुआत में डायरेक्ट निवेश का तरीका बेहतर नहीं है. क्योंकि इसके लिए आपको बाजार की समझ होनी चाहिए.

    Investment Tips: अगर आप लांग टर्म आर्थिक जरूरतों की पूर्ति के लिए फंड जनरेट करना चाहते हैं तो इक्विटी में निवेश जरूर शुरू कर दीजिए. क्योंकि लांग टर्म में रिटर्न के नजरिए से इक्विटी निवेश का सबसे बेहतर विकल्प हो सकता है. सरकार की छोटी बचत योजनाओं, एफडी व अन्य फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश से हालांकि आपको सुनिश्चित रिटर्न मिलता है. लेकिन इन्फ्लेशन (महंगाई) और टैक्स को माइनस/एडजस्ट करने के बाद यह रिटर्न बेहद कम हो जाता है.

    आइए इक्विटी में निवेश शुरू करने से पहले कुछ जरूरी बातों को जानते हैं:

    डायरेक्ट या म्यूचुअल फंड के माध्यम से 
    अगर आप डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट खुलवाए हुए हैं तो इक्विटी में आप सीधे (डायरेक्ट) निवेश कर सकते हैं. लेकिन निवेश की शुरुआत में डायरेक्ट निवेश का तरीका बेहतर नहीं है. क्योंकि इसके लिए आपको बाजार की समझ होनी चाहिए. साथ ही यह भी जरूरी है कि आप निवेश की बारीकियों से वाकिफ हों. जो पहली बार इक्विटी में निवेश करने वालों लोगों के पास आमतौर पर नहीं होता है.

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    अगर आप बिना समझ के निवेश करेंगे तो आपको नुकसान झेलना पड़ सकता है. इसलिए आम निवेशकों के लिए म्यूचुअल फंड इक्विटी में निवेश का सबसे आसान और सुरक्षित जरिया है. क्योंकि म्यूचुअल फंड में फंड मैनेजर अपनी बेहतर समझ से आपकी रकम को अलग अलग कंपनी के शेयरों में इन्वेस्ट/निवेश करता है.

    निवेश की अवधि
    इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश आपके लिए तभी बेहतर होगा जब आप इसमें लांग टर्म यानी कम से कम 10 से 15 साल के लिए निवेश कर रहे हों. क्योंकि बाजार मे उतार-चढाव की वजह से शार्ट और मीडियम टर्म में बेहतर रिटर्न की गुंजाइश कम बनती है. उल्टे नुकसान हो सकता है.

    किस तरह के फंड में निवेश?
    इक्विटी म्यूचुअल फंड भी अलग-अलग तरह के होते हैं. मसलन लार्ज कैप, मिड कैप, स्मॉल कैप फंड. जैसा कि नाम से स्पष्ट है लार्ज कैप फंड में एक्सपोजर लार्ज कैप कंपनियों (मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से एक से 100 नंबर तक की लिस्टेड कंपनियां) में होता है. उसी तरह मिड कैप फंड में मिड कैप कंपनियों (मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से 101 से 250वें नंबर तक की कंपनियां) में और स्मॉल कैप फंड में एक्सपोजर स्मॉल कैप कंपनियों (मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से 250वें नंबर के बाद की सारी कंपनियां) में होता है.

    लार्ज कैप फंड में उतार-चढाव यानी जोखिम/रिस्क स्मॉल कैप और मिड कैप फंड की तुलना में कम होता है. लेकिन रिटर्न के नजरिए से स्मॉल और मिड कैप फंड ज्यादा बेहतर हो सकते हैं. इसलिए निवेश की शुरुआत से पहले आप यह देख लें कि आप कितना जोखिम उठा सकते हैं.

    अगर आप कम जोखिम उठा सकते हैं तो वैसे फंड में ही निवेश करना चाहिए जहां अधिकतम एक्सपोजर लार्ज कैप कंपनियों में हो. या फिर मल्टी कैप फंड में जहां निवेश लार्ज कैप, मिड कैप व स्माल कैप तीनो तरह की कंपनियों में होता है. तीनो तरह की कंपनियों में एक्सपोजर की वजह से मल्टीकैप फंड में लार्ज कैप फंड की तुलना में रिटर्न की गुंजाइश ज्यादा होती है. हालांकि वैसे निवेशक जो कम उम्र में निवेश शुरू कर रहे हैं वह मिड व स्मॉल कैप फंड में निवेश कर सकते हैं.

    टैक्स में छूट
    अगर आप इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश पर टैक्स में भी छूट चाहते हैं तो आपको ईएलएसएस (इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम) में निवेश करना चाहिए. लेकिन 80C के तहत टैक्स में यह छूट तभी मिलेगी जब आप इसमें कम से कम 3 वर्ष के लिए निवेश करें. हालांकि ईएलएसएस पर लांग टर्म कैपिटल गेन (एलटीसीजी) टैक्स, अन्य इक्विटी म्यूचुअल फंड की तरह हीं लगता है. मेरी सलाह है कि ईएलएसएस में भी निवेश आप लांग टर्म के लिए हीं करें और तीन वर्ष के बाद रिडीम करने से बचें. क्योंकि बेहतर रिटर्न के लिए निवेश की अवधि लंबी होनी ही चाहिए. मतलब इसमें निवेश सिर्फ टैक्स बचाने के लिए नहीं बल्कि बेहतर रिटर्न के नजरिए से भी हो.

    एसआईपी या लंप सम ?
    शुरुआती निवेशकों के लिए एसआईपी (सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) म्यूचुअल फंड में निवेश का बेहतर तरीका है. एसआईपी से आपको एवरेजिंग का फायदा मिलता है. यानी लंबी अवधि में निवेश करने पर उतार-चढाव का एवरेजिंग हो जाता है. मतलब गिरावट के दौर में एक समान निवेश पर ज्यादा यूनिट और तेजी के दौर में कम यूनिट मिलता है . दूसरी बात अगर आप एसआईपी के जरिए निवेश करते हैं तो यह आपको निवेश और बचत के मामले में अनुशासित भी करता है.

    Tags: Investment, Investment and return, Investment in equity and debt, Investment scheme, Investment tips, Most trusted investment options, Systematic Investment Plan (SIP)

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