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Investment Tips: सरकार को उधार दें, ब्रोकरेज बचाकर 40 साल तक कमाएं मोटा मुनाफा

Investment Tips: सरकार को उधार दें, ब्रोकरेज बचाकर 40 साल तक कमाएं मोटा मुनाफा

Investment Tips:  एक्सचेंज और ब्रोकर के जरिये बॉन्ड खरीदते हैं तो आपको ब्रोकरेज शुल्क देना पड़ता है. लेकिन आरडीएस में ऐसा नहीं है.

Investment Tips: एक्सचेंज और ब्रोकर के जरिये बॉन्ड खरीदते हैं तो आपको ब्रोकरेज शुल्क देना पड़ता है. लेकिन आरडीएस में ऐसा नहीं है.

Investment Tips: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI, आरबीआई) ने हाल ही में रिटेल डायरेक्ट स्कीम (RDS, आरडीएस) की शुरुआत की. इसके जरिए रिटेल इन्वेस्टर को गवर्नमेंट सिक्युरिटी या सरकारी प्रतिभूतियों (GSec)में निवेश करने के लिए सीधा रास्ता हासिल हो रहा है.

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    नई दिल्ली. सरकार विकास कार्यों और अपने घाटे की पूर्ति के लिए अक्सर बाजार से पैसा उठाती है. इसमें बड़े निवेशक या फंड हाउस ही निवेश करते हैं, लेकिन अब सरकार ने रिटेल यानी सभी के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं. इससे गवर्नमेंट सिक्युरिटी (Government Decurity) यानी जीसेक (G-Sec) में पैसा लगाना आसान हो गया है.

    भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने हाल ही में रिटेल डायरेक्ट स्कीम (RDS, आरडीएस) की शुरुआत की. इसके जरियए रिटेल इन्वेस्टर को सरकारी प्रतिभूतियों (GSec) में निवेश करने के लिए सीधा रास्ता हासिल हो रहा है. इन प्रतिभूतियों (Securities) में केंद्र सरकार की प्रतिभूतियां, ट्रेजरी, राज्य विकास ऋण (एसडीएल) और सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड शामिल हैं. इनमें पैसा लगाकर 40 साल तक एक जैसा ब्याज पा सकते हैं.
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    यह है आरडीएस के फायदे
    विशेषज्ञ कहते हैं कि आरडीएस में निवेशकों को बेहतर तरलता हासिल हो जाएगी. निवेश सलाहकार हरिगोपाल पाटीदार कहते हैं कि इस योजना का इस्तेमाल करने से रिटेल इन्वेस्टर के लिए खरीदी गई गवर्नमेंट सिक्युरिटी बेचना आसान हो जाएगा. पहले ब्रोकर और एक्सचेंज की प्रणाली में सेकेंडरी मार्कट (secondary market) की तरलता काफी कम थी. सीए वीरेंद्र खटीक कहते हैं कि जब आप एक्सचेंज और ब्रोकर के जरिये बॉन्ड खरीदते हैं तो आपको ब्रोकरेज शुल्क (Brokerage Fee) देना पड़ता है. गिल्ट म्युचुअल फंड (Gilt Mutual Fund) में भी एक्सपेंस रेश्यो की शक्ल में हर साल कुछ शुल्क भरना पड़ता है. मगर सीधे निवेश की योजना आरडीएस में कुछ भी नहीं देना पड़ता.

    मनचाहे वक्त तक के लिए कर सकते हैं निवेश
    जी-सेक में आम तौर पर 10, 15, 30 या 40 साल की मैच्योरिटी अवधि (Maturity Period) होती है. लेकिन कोई व्यक्ति जी-सेक में बची हुई अवधि जैसे 11, 16 या ऐसे ही साल के लिए भी रकम लगाने की इच्छा रख सकता है तो उसे यह प्रतिभूतियां (Securities) सेकेंडरी मार्केट से ही खरीदनी पड़ेंगी.

    10 साल से ज्यादा के वक्त में सबसे अच्छी स्टेबल इनकम वाली स्कीम
    स्थिर आय वाली बहुत कम योजनाओं की अवधि 10 साल से ज्यादा होती है. उनमें से कुछ लंबी अवधि के लिए दरें रोकने या लॉक-इन करने की सुविधा देते हैं. शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से बचने वाले निवेशक लंबी अवधि के लिए ब्याज दरें लॉक-इन करने के उद्देश्य से इन प्रतिभूतियों का इस्तेमाल कर सकते हैं. इस तरह उन्हें बाजार की तयशुदा गिरावट से बचने का मौका मिल जाता है. लिहाजा, जी-सेक का इस्तेमाल ब्याज दरों को 40 साल तक के लिए लॉक-इन करने में किया जा सकता है.

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    तोहफे में भी दे सकते हैं जी-सेक
    जो लोग रिटायरेमेंट प्लान बना रहे हैं या जो लोग पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं, वे इनका फायदा उठा सकते हैं. जी-सेक में छमाही भुगतान मिलता है और उन निवेशकों के लिए ये कारगर साबित होंगे, जो नियमित रूप से कैश फ्लो चाहते हैं. जी-सेक तोहफे में भी दी जा सकती हैं. आज से दो दशक बाद यदि ब्याज दरें नीचे चली गईं तो आपकी संतानें आपका धन्यवाद अदा करेंगी क्योंकि उस समय भी उन्हें ऊंची दर पर ब्याज देने वाले सरकारी बॉन्ड आपकी तरफ से तोहफे में मिले होंगे.

    मैच्योरिटी से पहले जी-सेक भुनाने में जोखिम
    आम धारणा यही है कि जी-सेक में किसी तरह का जोखिम नहीं होता. लेकिन असल में यह धारणा पूरी तरह भ्रामक है. क्वांटम म्युचुअल फंड में फंड प्रबंधक पंकज पाठक बताते हैं कि जी-सेक में किसी तरह का क्रेडिट जोखिम नहीं होता मगर मार्क-टु-मार्केट जोखिम इसमें बिल्कुल होता है.’ मान लीजिए कि आप 15 साल की अवधि के बॉन्ड खरीदते हैं मगर तीन साल बाद ही इन्हें बेचकर बाहर निकलने का फैसला लेते हैं. बेशक उस समय ब्याज दरें पहले के मुकाबले ऊपर चल रही हों मगर आपको जो कीमत मिलेगी, उससे पिछले दो साल में आपके पास जमा हुई ब्याज आय पूरी तरह साफ हो जाएगी. आपको किसी भी लक्ष्य के लिहाज से जितने साल के लिए निवेश करना है उसके आसपास की ही परिपक्वता अवधि रखें. इस तरह आप रुक-रुक कर लगने वाले मार्क-टु-मार्केट झटकों से बच जाएंगे.

    Tags: Investment, Investment scheme, Investment tips, RBI

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