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ओमिक्रॉन का भय: P-Notes के जरिए विदेशियों ने घटाया भारतीय बाजार में निवेश

ओमिक्रॉन का भय: P-Notes के जरिए विदेशियों ने घटाया भारतीय बाजार में निवेश

भारतीय पूंजी बाजार में पार्टिसिपेटरी नोट्स (P-notes) के जरिए निवेश अक्टूबर में 43 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद नवंबर के अंत तक घटकर 94,826 करोड़ रुपए रह गया.

भारतीय पूंजी बाजार में पार्टिसिपेटरी नोट्स (P-notes) के जरिए निवेश अक्टूबर में 43 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद नवंबर के अंत तक घटकर 94,826 करोड़ रुपए रह गया.

भारतीय पूंजी बाजार में पार्टिसिपेटरी नोट्स (P-notes) के जरिए निवेश अक्टूबर में 43 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद नवंबर के अंत तक घटकर 94,826 करोड़ रुपए रह गया. P-notes को भारतीय बाजारों में रजिस्टर्ड फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर्स (FPI) की तरफ से उन विदेशी निवेशकों को जारी किया जाते हैं.

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    नई दिल्ली. भारतीय पूंजी बाजार में पार्टिसिपेटरी नोट्स (P-notes) के जरिए निवेश अक्टूबर में 43 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद नवंबर के अंत तक घटकर 94,826 करोड़ रुपए रह गया.
    P-notes को भारतीय बाजारों में रजिस्टर्ड फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर्स (FPI) की तरफ से उन विदेशी निवेशकों को जारी किया जाते हैं, जो खुद को यहां रजिस्टर किए बिना सीधे भारतीय शेयर बाजार में निवेश करना चाहते हैं. हालांकि, P-notes जारी करने से पहले FPI को कई जरूरी मंजूरियां लेनी होती हैं. इसका कारण ओमिक्रॉन के चलते पैदा हुई अनिश्चितताओं की वजह से ऐसा हो रहा है.

    मार्केट रेगुलेटर SEBI के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय बाजारों में नवंबर के अंत तक P-notes के जरिए निवेश (इक्विटी, डेट और हाइब्रिड सिक्योरिटी) 94,826 करोड़ रुपये था, जबकि अक्टूबर के अंत मे यह आंकड़ा 1,02,553 करोड़ रुपये था. अक्टूबर महीने में P-notes के जरिए निवेश पिछले 43 महीनों यानी मार्च 2018 के बाद से सबसे अधिक था. मार्च 2018 में P-Notes के जरिए भारतीय बाजार में 1,06,403 करोड़ रुपये निवेश आया था.

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    दिसंबर में भी निगेटिव नंबर दिखेगा!

    पाइपर सेरिका (Piper Serica) के फाउंडर और फंड मैनेजर अभय अग्रवाल ने कहा कि नवंबर में P-notes धारकों ने इक्विटी सेग्मेंट में 8,000 करोड़ रुपए से अधिक की शुद्ध बिक्री की, जबकि अक्टूबर में 5,000 करोड़ रुपए से अधिक की शुद्ध खरीदारी की थी. FPI की तरफ से भी पिछले एक महीने से ऐसी ही बिकवाली देखी जा रही है. अभय अग्रवाल ने बताया, “दिसंबर के महीने में भी हमें एक निगेटिव नंबर देखने को मिल सकता है. डेट सेगमेंट के निवेश में मामूली बढ़ोतरी है और यह इतना कम है कि इसका ओवरऑल इम्पैक्ट पर कोई असर नहीं पड़ेगा.”

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    कोरोना के नए वेरिएंट का संकट

    फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPI) ने कोरोना वायरस के नए स्वरूप ओमिक्रॉन (Omicron) के चलते पैदा हुई अनिश्चितता और अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) द्वारा उम्मीद से पहले बॉन्ड खरीद बंद करने के बीच दिसंबर में अब तक भारतीय बाजारों से 17,696 करोड़ रुपए निकाले हैं. आंकड़ों के मुताबिक, एफपीआई ने 1-17 दिसंबर के बीच इक्विटी से 13,470 करोड़ रुपए, डेट सेगमेंट से 4,066 करोड़ रुपए और हाइब्रिड इंस्ट्रूमेंट्स से 160 करोड़ रुपए निकाले. एफपीआई ने नवंबर में भारतीय बाजारों में 2,521 करोड़ रुपए की शुद्ध बिक्री की थी.

    Tags: Foreign investment, FPI

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