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हर महीने रद्द होते हैं 8 लाख ऑनलाइन रेलवे टिकट, व्यस्त रूटों पर ट्रेनों की भारी कमी

भाषा
Updated: January 19, 2020, 1:45 PM IST
हर महीने रद्द होते हैं 8 लाख ऑनलाइन रेलवे टिकट, व्यस्त रूटों पर ट्रेनों की भारी कमी
IRCTC

एक RTI जवाब में रेलवे ने जानकारी दी है कि चालू वित्त वर्ष के शुरुआती आठ महीनो में चार्ट बनते समय कन्फर्म न हो पाने के कारण करीब 65.69 लाख ऑनलाइन टिकट अपने आप रद्द हो गए.

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नई दिल्ली. देश में रेलगाड़ियों पर यात्रियों के भारी बोझ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मौजूदा वित्त वर्ष के शुरुआती आठ महीनों में चार्ट बनते समय कन्फर्म न हो पाने के कारण करीब 65.69 लाख ऑनलाइन टिकट अपने आप रद्द हो गये. यानी हर महीने औसतन आठ लाख से ज्यादा ऑनलाइन टिकट कन्फर्म नहीं हो पाने से रद्द हो रहे हैं जिससे यात्रियों को जाहिर तौर पर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

RTI के तहत मिली जानकारी
प्रदेश के नीमच निवासी आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने रविवार को बताया कि भारतीय रेलवे की सहायक कंपनी इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) ने उन्हें सूचना के अधिकार के तहत यह जानकारी दी है. गौड़ को आठ जनवरी को भेजी गयी जानकारी के मुताबिक जारी वित्त वर्ष में अप्रैल से नवंबर 2019 तक ऑनलाइन बुक कराये गये 65,68,852 टिकट चार्ट बनते समय कन्फर्म न हो पाने से IRCTC की वेबसाइट पर अपने आप रद्द हो गये.

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रद्द टिकटों से रेलवे को होने वाली कमाई के बारे में मांगी थी जानकारी
आरटीआई के तहत दिये गये जवाब में बताया गया, "ऑनलाइन बुक हुआ रेल टिकट चार्ट बनते समय कन्फर्म न हो पाने के कारण स्वत: रद्द हो जाता है. रेलवे द्वारा रद्दीकरण शुल्क काटकर शेष राशि IRCTC को दी जाती है एवं IRCTC यह राशि उपभोक्ता को जस की तस वापस दे देती है." गौड़ ने कन्फर्म नहीं हो पाने के कारण प्रतीक्षा सूची में ही रह गये यात्री टिकटों को रद्द करने के बदले रेलवे के वसूले गये शुल्क का ब्योरा भी मांगा था. लेकिन यह जानकारी फिलहाल उन्हें नहीं मिल पायी है.

यात्री गाड़ियों पर भारी बोझ
IRCTC ने इस बारे में उनके सवाल पर जवाब दिया,"चूंकि टिकट रद्दीकरण शुल्क IRCTC द्वारा एकत्र नहीं किया जाता है. इसलिये इसकी जानकारी के लिये आपके आवेदन को रेलवे को भेज दिया गया है." बहरहाल, देश में रेल टिकटों के लिये मारामारी का किस्सा नया नहीं है और खुद रेल मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) यात्री गाड़ियों पर भारी बोझ की बात हाल ही में कबूल चुके हैं.

गाड़ियों की कमी को दूर करने का प्रयास कर रहा रेलवे
गोयल ने इंदौर में 12 जनवरी को मीडिया से कहा था कि गुजरे सालों के दौरान पर्याप्त निवेश नहीं होने से रेलवे के सरकारी तंत्र को बड़ा भार सहन करना पड़ रहा है और "कुछ यात्री गाड़ियों में तो टिकटों की मांग 150 प्रतिशत से भी ज्यादा है. व्यस्त मार्गों पर यात्री गाड़ियों की कमी दूर करने के प्रयासों के तहत रेलवे ने आईआरसीटीसी के जरिये प्रीमियम श्रेणी की तेजस एक्सप्रेस ट्रेनों के परिचालन की पिछले साल से शुरुआत की थी. लखनऊ और दिल्ली के बीच ऐसी पहली ट्रेन को अक्टूबर 2019 में हरी झंडी दिखायी गयी थी.

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First published: January 19, 2020, 1:45 PM IST
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