रेलवे का जबरदस्त प्लान तैयार! इस बार दिवाली पर आसानी से मिलेगी ट्रेन की कन्फर्म टिकट

रेलवे से यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए अच्छी खबर है. भारतीय रेलवे (Indian Railway) अक्टूबर से हर रोज 4 लाख एक्सट्रा बर्थ अलॉट करेगी. ऐसे में इस दिवाली पर कन्फर्म टिकट मिलने की उम्मीद बढ़ गई है. आइए जानें पूरा मामला

News18Hindi
Updated: July 10, 2019, 2:50 PM IST
रेलवे का जबरदस्त प्लान तैयार! इस बार दिवाली पर आसानी से मिलेगी ट्रेन की कन्फर्म टिकट
खुशखबरी! इस बार दिवाली पर आसानी से मिलेगी ट्रेन टिकट, रेलवे का जबरदस्त प्लान तैयार
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Updated: July 10, 2019, 2:50 PM IST
रेलवे से यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए अच्छी खबर है. भारतीय रेलवे (Indian Railway) अक्टूबर से हर रोज 4 लाख एक्सट्रा बर्थ अलॉट करेगी. दरअसल, रेलवे अक्टूबर से नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने जा रही है. जिसकी वजह से यात्रियों के लिए सीट उपलब्धा बढ़ जाएगी. अगर आसान शब्दों में कहे तो मतलब साफ है कि इस साल दिवाली पर पहले के मुकाबले आसानी से कन्फर्म ट्रेन टिकट मिलने की उम्मीद है. रेलवे अक्टूबर तक सभी एलएचबी कोच में होटल लोड जनरेशन सिस्टम लगाएगी. यह तकनीक ट्रेनों से पावर कार जनरेटर हटाएगी. उनके स्थान पर यात्रियों के लिए नए कोच लगेंगे.

नई तकनीक से 5000 एक्स्ट्रा कोच लगेंगे
एलएचबी कोच में होटल लोड जनरेशन (HOG) सिस्टम लागू होने से ट्रेन के इंजन से बिजली की आपूर्ति की जाएगी. इस बिजली आपूर्ति से कोच में एसी, लाइट व अन्य उपकरण चलाए जा सकेंगे. फिलहाल बिजली आपूर्ति के लिए ट्रेन के आगे-पीछे दो पावर कार जनरेटर लगाए जाते हैं.

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HOG तकनीक पावर कार जनरेटर हटा देगी. नई टेक्नोलॉजी से अक्टूबर 2019 से 5000 से ज्यादा कोच ट्रेनों में लगेंगे. इससे यात्रियों को प्रतिदिन 4 लाख से अधिक एक्स्ट्रा बर्थ का इंतजाम होगा.

6000 करोड़ रुपये सालाना की बचत होगी
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वहीं, इस तकनीक से रेलवे को सालाना 6000 करोड़ रुपये की बचत होगी. फ्यूल खर्च में 6000 करोड़ रुपये सालाना की बचत होगी. नॉन-एसी कोच में बिजली सप्लाई के लिए 40 लीटर प्रति घंटे डीजल जबकि एसी कोच में 65-70 लीटर प्रति घंटे डीजल की खपत होती है.

दिवाली पर आसानी से मिलेगी कन्फर्म ट्रेन टिकट!


एक लीटर में करीब 3 यूनिट बिजली उत्पन्न होती है और एक घंटे में नॉन-एसी कोच में 120 यूनिट बिजली खपत होती है. नई तकनीक इको-फ्रेंडली है. इससे न तो वायु प्रदूषण और न ही ध्वनि प्रदूषण होता है. इससे प्रत्येक साल 700 MT प्रति ट्रेन कार्बन उत्सर्जन घटेगी.

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शताब्दी एक्सप्रेस में पावर के लिए दो डीजल जनरेटर लगे हैं. एचओजी सिस्टम के इस्तेमाल के बाद सिर्फ एक पावर कार ट्रेनों में लगेंगे. लेकिन वो चलेंगे नहीं. एक पावर कार की जगह एक्सट्रा कोच लगाए जाएंगे वो भी ट्रेन की लंबाई बढ़ाए बिना. एक बार सभी LHB कोचर में यह सिस्टम लागू होने पर 4 लाख से ज्यादा एक्सट्रा बर्थ यात्रियों को मिलेंगे.

 

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First published: July 10, 2019, 2:28 PM IST
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