बड़ी खबर! अब अस्थायी कोविड-19 अस्पतालों में कोरोना का इलाज भी इंश्योरेंस में होगा कवर

बड़ी खबर! अब अस्थायी कोविड-19 अस्पतालों में कोरोना का इलाज भी इंश्योरेंस में होगा कवर
अस्थायी कोविड-19 अस्पतालों में इलाज खर्च के दावों का होगा निपटान

बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने एक सर्कुलर में कहा, यह सुनिश्चित करने के लिए कि पॉलिसी अनुबंध के नियम एवं शर्तों के तहत कोविड-19 के इलाज का खर्च कवर हो, केंद्र/राज्य सरकारों की मंजूरी वाले अस्थायी अस्पतालों को अस्पताल माना जाएगा और बीमा कंपनियां नियमों के तहत दावों का निपटान करेंगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: July 16, 2020, 11:19 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. बीमा नियामक इरडा (IRDAI) ने पॉलिसीधारकों को राहत देते हुए जनरल और हेल्थ बीमा कंपनियों से कोविड-19 (COVID-19) संक्रमित मरीजों के लिये बने अस्थायी अस्पतालों में इलाज से जुड़े दावों का भी निपटान करने को कहा. कोरोना वायरस (Coronavirus) मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए कई राज्य सरकारों ने अस्थायी अस्पताल बनाये हैं. बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) ने एक सर्कुलर में कहा, यह सुनिश्चित करने के लिए कि पॉलिसी अनुबंध के नियम एवं शर्तों के तहत कोविड-19 के इलाज का खर्च कवर हो, केंद्र/राज्य सरकारों की मंजूरी वाले अस्थायी अस्पतालों को अस्पताल माना जाएगा और बीमा कंपनियां नियमों के तहत दावों का निपटान करेंगी.

नियामक ने कहा कि जब कोविड-19 संक्रमित होने के बाद पॉलिसीधारक को चिकित्सक की सलाह पर ऐसे अस्थायी अस्पताल में भर्ती किया जाता है, भले ही पॉलिसी अनुबंध के नियम एवं शर्तों में अस्पताल की परिभाषा कुछ भी हो, इलाज पर होने वाले खर्च का निपटान बीमा कंपनियां करेंगी.

यह भी पढ़ें- Air India के पायलटों ने वेतन कटौती पर उठाए सवाल, पूछा- बॉस की सैलरी में केवल 3% की कटौती क्यों?



Cashless सुविधा करानी होगी उपलब्ध
इरडा ने यह भी कहा कि जहां किसी नेटवर्क प्रदाता ने ऐसे अस्थायी अस्पताल बनाये हैं, तो ऐसे अस्पतालों को नेटवर्क प्रदाता का विस्तार माना जाएगा और नकद रहित इलाज (Cashless) सुविधा उपलब्ध करानी होगी. नियामक ने जनरल और हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों से नियामकीय रूपरेखा के तहत ऐसे दावों के निपटान में तेजी लाने को भी कहा.

रेगुलेटर ने जनरल और हेल्थ बीमा कंपनियों को यह भी निर्देश दिया है कि ऐसे सभी क्लेम का उपयुक्त रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के मुताबिक जल्द सेटलमेंट किया जाए. बीमा कंपनियों को इन नियमों को क्लेम की गाइडलाइंस में भी शामिल करने और इसकी जानकारी तुरंत सभी थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर्स (TPAs) को देने का सुझाव दिया गया है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज