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IRDAI में शिकायत करना होगा आसान, पॉलिसीधारकों को मिलेगा 13 क्षेत्रीय भाषाओं का विकल्प

IRDAI में शिकायत करना होगा आसान, पॉलिसीधारकों को मिलेगा 13 क्षेत्रीय भाषाओं का विकल्प

इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI)

इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI)

सूत्रों के मुताबिक 2011 में शुरू की गई इंटीग्रेटेड ग्रिवेंस रीड्रेसल सिस्टम (IGMS) को ग्राहकों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाने के मकसद से उन्नत किया जा रहा है.

हाइलाइट्स

इरडाई का नया पोर्टल ऑनलाइन शिकायतों को दर्ज करने और उन पर नजर रखने का एक जरिया होगा
2011 में शुरू की गई थी एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली
IGMS का नाम बदलकर ‘बीमा भरोसा’ रखा जाना है

नई दिल्ली. इंश्योरेंस रेगुलेटर इरडाई (Irdai) ग्राहकों की शिकायतों को सुनने और इसे हल करने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए एक नया शिकायत निवारण तंत्र शुरू करने जा रहा है.  इसमें ग्राहकों को क्षेत्रीय भाषाओं में अपनी शिकायत दर्ज कराने का विकल्प मिलेगा.

नए सिस्टम के तहत ऐसे होगा काम
सूत्रों ने कहा कि 2011 में शुरू की गई एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली (IGMS) को ग्राहकों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाने के मकसद से उन्नत किया जा रहा है. इसका नाम बदलकर ‘बीमा भरोसा’ रखा जाना है.

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सूत्रों ने कहा कि इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (इरडाई) का नया पोर्टल ऑनलाइन शिकायतों को दर्ज करने और उन पर नजर रखने का एक जरिया होगा. साथ ही यह इंश्योरेंस कंपनियों द्वारा शिकायतों के निपटान की निगरानी भी करेगा.

13 क्षेत्रीय भाषाओं में शिकायत दर्ज करा सकेंगे पॉलिसीधारक
उन्होंने कहा कि विभिन्न संस्थाओं के खिलाफ शिकायतों के रजिस्ट्रेशन से लेकर, विभिन्न चरणों के माध्यम से शिकायतों के प्रोसेसिंग और शिकायतों के अंतिम समाधान तक सभी सुविधाएं इस पोर्टल पर मौजूद होंगी. उन्होंने कहा कि पॉलिसीधारक इंश्योरेंस कंपनियों के खिलाफ अपनी शिकायतों के निवारण के लिए 13 क्षेत्रीय भाषाओं में शिकायत दर्ज करा सकेंगे.

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अब इरडा की मंजूरी के बिना तरजीही शेयर जारी कर पूंजी जुटा सकेंगी इंश्योरेंस कंपनियां
बता दें कि कारोबार सुगमता को बढ़ावा देने के लिए इरडा ने बीमा कंपनियों द्वारा तरजीही शेयरों और अधीनस्थ ऋण के माध्यम से पूंजी जुटाने के लिए पूर्व मंजूरी की आवश्यकता को खत्म करने का निर्णय लिया है. सूत्रों ने बताया कि हाल में हुई निदेशक मंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया. इसके अनुसार, जारी की जाने वाली अन्य प्रकार की पूंजी (ओएफसी) किसी बीमा कंपनी के नेटवर्थ या चुकता शेयर पूंजी का 50 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए.

Tags: Insurance, Insurance Regulatory and Development Authority

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