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आरोग्य संजीवनी पॉलिसी के तहत होगा कोरोना का इलाज, जानें कितना हेल्थ कवर है जरूरी

News18Hindi
Updated: April 2, 2020, 6:58 PM IST
आरोग्य संजीवनी पॉलिसी के तहत होगा कोरोना का इलाज, जानें कितना हेल्थ कवर है जरूरी
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Coronavirus: क्लेम के मुताबिक, कोरोना मरीजों की हालत के हिसाब से कोविड-19 के इलाज पर खर्च 50,000 रुपये से 4.5 लाख रुपये के बीच हो सकता है.

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नई दिल्ली. देश में कोरोना वायरस (Coronavirus) संक्रमितों की संख्या काफी तेजी से बढ़ रही है. कोरोना वायरस संक्रमण के चलते अगर अस्पताल में भर्ती होना पड़ा तो ऐसे समय में हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी काम आता है. हेल्थ इंश्योरेंस खरीदने में दिक्कतों को कम करने के लिए इंश्योरेंस रेगुलेटर एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (Irdai) ने इस साल जनवरी में सभी हेल्थ और जनरल इंश्योरेंस कंपनियों को 1 अप्रैल, 2020 से एक स्टैंडर्ड प्रोडक्ट आरोग्य संजीवनी पॉलिसी ( Arogya Sanjeevani policy) को पेश करने के लिए कहा था. कम से कम 29 कंपनियां अब पॉलिसी को देना शुरू किया है जिसमें अधिकतम 5 लाख रुपये का हेल्थ इंश्योरेंस कवर मिलता है.

देश में कोरोना वायरस महामारी फैलने के साथ ही इंश्योरर्स का ध्यान हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने की तरफ बढ़ा है. Irdai ने 4 मार्च को जारी अपने सर्कुलर में कहा था कि हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में कोविड-19 इलाज का खर्च शामिल होगा और सीधे इंश्योरेंस कंपनियों से खरीदा जा सकता है.

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सरकार ने कहा है कि पहले से चल रही हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों में कोविड-19 का इलाज भी शामिल होगा. प्राइवेट अस्पताल में कोरोना का इलाज कर रहे मरीज अपनी हेल्थ इंश्योरेंस का फायदा ले सकते हैं. हालांकि प्राइवेट लैब्स में कोविड-19 की जांच करने के लिए सरकार ने कीमत तय कर दी है लेकिन प्राइवेट हॉस्पिटल में इसके इलाज में होने वाले खर्च पर कोई लिमिट तय नहीं है. कोरोना मरीजों की हालत के हिसाब से कोविड-19 के इलाज पर खर्च 50,000 रुपये से 4.5 लाख रुपये के बीच हो सकता है.



कितना हेल्थ कवर जरूरी?
अगर आप कोरोना वायरस के खिलाफ हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने की सोच रह रहे हैं तो आपको यह जानना जरूरी है कि कितने सम-एश्योर्ड की पॉलिसी लें. लाइव मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोग्य संजीवनी पॉलिसी में कमरे के किराए की सीमा को इंश्योरेंस की राशि का 2 फीसदी या 5000 रुपये, जो भी कम हो, वह रखा गया है. इसी तरह इंटेनसिव केयर यूनिट (ICU) के खर्च को राशि का 5 फीसदी जो अधिकतम 10,000 रुपये तक का हो सकता है, का कवर मिलेगा. इसके अलावा, कुल क्लेम रकम में 5 फीसदी को-पेमेंट अनिवार्य है. इसके साथ ही, इंश्योरर्स इस पॉलिसी में कोई अन्य सर्विस को नहीं जोड़ सकते हैं.

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पारामाउंट हेल्थ सर्विसेज (TPA) के मैनेजिंग डायरेक्ट नयन सी शाह के मुताबिक, किसी एक मेट्रो सिटी के अस्तपाल में भर्ती के बदले अगर मरीज सेंकेंडरी केयर अस्पताल में भर्ती होता है तो इलाज का खर्च कम आएगा. अगर कोई मेट्रो में रहता है तो 5 लाख रुपये का कवर काफी कम है, खासकर अगर यह फैमिली फ्लोटर प्लान है. वहीं, हेल्थ इंश्योरेंस एक्सपर्ट महावीर चोपड़ा का कहना है कि अगर आप हेल्थ इंश्योरेंस खरीद रहे हैं तो 5 लाख रुपये कवर तक सीमित न रहें. आप लंबे समय के नजरिए पॉलिसी खरीदें. मेडिकल इंफ्लेशन को ध्यान में रखते हुए 5 लाख रुपये का हेल्थ कवर 10-15 साल तक आपकी मदद नहीं करेगा

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First published: April 2, 2020, 6:26 PM IST
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