Mutual Fund में पैसा लगाने वालों के लिए जरूरी खबर, मोटा रिटर्न पाने के लिए बेहद जरूरी है Rolling Return

म्यूचुअल फंड को मापने में रोलिंग रिटर्न्स कैसे अपनी भूमिका निभाता है
म्यूचुअल फंड को मापने में रोलिंग रिटर्न्स कैसे अपनी भूमिका निभाता है

आइए जानते हैं कि म्यूचुअल फंड को मापने में रोलिंग रिटर्न्स कैसे अपनी एक आदर्श भूमिका निभाता है और इक्विटी म्यूचुअल फंड (Equity Mutual Fund) को चुनने का सबसे पहला और साधारण पैमाना क्या हो सकता है?

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 20, 2020, 1:30 PM IST
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नई दिल्ली.म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में रोलिंग रिटर्न (Rolling Return) को लेकर अगर आप असमंजस की स्थिति में है और आप इसके गुणा भाग से परिचित नहीं हैं तो आइए जानते हैं कि म्यूचुअल फंड को मापने में रोलिंग रिटर्न्स कैसे अपनी एक आदर्श भूमिका निभाता है और इक्विटी म्यूचुअल फंड (Equity Mutual Fund) को चुनने का सबसे पहला और साधारण पैमाना क्या हो सकता है? इसके लिए अधिकांश निवेशक पिछले रिटर्न (Rolling Return) पर ही क्यों हामी भरते हैं. खुदरा निवेशक इक्विटी स्कीम का चुनाव करने से पहले एक, तीन और पांच साल के पिछले रिटर्न के परिणाम पर गौर करना जरूरी समझते हैं. क्योंकि इनके आंकड़े आसानी से मिल जाते हैं. दरअसल, अच्छा रिटर्न पाने के लिए इक्विटी फंड में निवेश करना ही बेहतर विकल्प माना जाता है.

स्कीम के गुणा भाग को समझने की है जरुरत-मान लीजिए कि आपको दो लार्ज कैप फंडों के बीच चयन करना है। एक बड़ी आकार की योजना है जिसने पिछले तीन वर्षों में 2.3 प्रतिशत रिटर्न दिया है. अन्य एक पुरानी योजना है और उसी अवधि में 5.7 प्रतिशत दिया है. जाहिर है कि आप दूसरी स्कीम के साथ जाना पसंद करेंगे. लेकिन यहां आपको थोड़ा गहन अधय्यन करने की जरुरत है. क्योंकि पहली स्कीम ने वास्तव में आपको 14.8 फीसदी रिटर्न दिया है यदि आप पिछले सात साल की अवधि में तीन साल के रिटर्न की श्रृंखला को देखते हैं. इसी समय सीमा में दूसरी स्कीम आपको कुल 12 प्रतिशत का रिटर्न देती है. देखा जाए तो अब पहली स्कीम ही फायदे का सौदा है.

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क्या है रोलिंग रिटर्न्स-म्यूचुअल फंड विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रेलिंग रिटर्न पर स्थिति पूरी तरह से साफ नहीं हो पाती है. यदि पुराने प्रदर्शन (Previous Performance) के आधार पर स्कीम को चुनना चाहते हैं तो वातस्व में निवेशकों के लिए रोलिंग रिटर्न (Rolling Return) ही एकमात्र बेहतर विकल्प है. बता दें कि ट्रेलिंग रिटर्न में गिरावट का समाधान भी रोलिंग रिटर्न को ही माना जाता है. क्योंकि रोलिंग रिटर्न लंबी अवधि में रिटर्न की एक श्रृंखला का औसत होता है. यह एक तय समय के लिए दैनिक सिप की तरह होता है.
समझें रोलिंग रिटर्न का महत्व-मान लीजिए आप 15 साल के लिए पांच साल का रिटर्न टेस्ट करना चा रहे हैं. ऐसे में एक्सेल शीट में सेंसेक्स (Sensex) के दैनिक मूल्य (Daily Value) दर्ज करता रहेगा. इसके बाद रिटर्न की गणना की जाएगी. अगर वह 1 अप्रैल 2005 को सेसेंक्स में पांच साल के लिए निवेश करता है तो इसका सीधा सा मतलब है कि सिप 31 मार्च 2020 को खत्म होगी. फिर अगले दिन से रिटर्न की गणना फिर से दोहराएगी जाएगी, यदि वह 2 अप्रैल 2005 से पांच साल के लिए फिर से सिप शुरू करने की योजना कर रहा है. बता दें कि इसकी अवधि भी 15 साल की ही होगी. ऐसे में इस अवधि में उन्हें सेंसेक्स के रिटर्न के करीब चार हजार नमूनें मिल जाएंगे और इन रिटर्न का औसत रोलिंग पांच साल रिटर्न होगा क्योंकि इसे 15 साल के लिए दैनिक आधार पर रोल किया जाता है.

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रिटर्न साप्ताहिक और मासिक आधार पर भी होते रोल-इस पूरी स्कीम का फायदा सिर्फ यहीं नहीं रुकता है. क्योंकि इस पूरी प्रक्रिया में आपको समय समय के अंतराल में इस बात की भी जानकारी मिलती रहेगी कि आपकी स्कीम ने तय समय में कितने पॉजिटिव और नेगेटिव रिटर्न दिए हैं. साथ ही आपको इस बात का भी अनुमान होगा कि कितनी अवधि में स्कीम ने मंहगाई को पछाड़ा है. साथ ही यह भी पता चलेगा कि 15 साल की अवधि के अंतराल में पांच साल की अवधि में स्कीम का सर्वाधिक और न्यूनतम रिटर्न कितना हो चुका है. जाहिर है कि यह आपको भविष्य की संभावनाओं का भी एक अनुमान देने में सक्षम है. हां, यह थोड़ा मुश्किल हो सकता है, क्योंकि इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि स्कीम पुराना बेहतरीन पर्दशन करने में दोबारा कामयाब होगी कि नहीं.

बता दें कि रोलिंग रिटर्न से बाजार के समय के प्रभाव को भी कम किया जा सकता है. ऐसा करके स्कीम में आप अपना अनुमानित प्रदर्शन करने में कामयाब हो सकते हैं. हैं.
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