बीमा पॉलिसी लेते वक्त जानकारी छुपाना हो सकता है नुकसानदायक, जानें SC का अहम फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद आयोग के फैसले को निरस्त किया. (फाइल फोटो)
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद आयोग के फैसले को निरस्त किया. (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने ऐसे ही एक मामले की सुनवाई करते हुए राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद आयोग (NCDRC) के फैसले को निरस्त कर दिया. जिसमें राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद आयोग ने ब्याज सहित दावे की राशि का भुगतान मृतक की माता को करने का आदेश दिया था.

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  • Last Updated: October 23, 2020, 10:44 AM IST
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नई दिल्ली. बीमा पॉलिसी लेते वक्त यदि आपने कोई जानकारी छुपाई है तो आपका दावा खारिज हो सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे ही एक मामले की सुनवाई करते हुए राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद आयोग के फैसले को निरस्त कर दिया. जिसमें राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद आयोग ने ब्याज सहित दावे की राशि का भुगतान मृतक की माता को करने का आदेश दिया था. इस पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने अपनी राय जाहिर करते हुए कहा कि, बीमा पॉलिसी भारोसे पर आधारित होती है. ऐसे में जीवन बीमा लेने वाले सभी लोगों को हर जानकारी का खुलासा करना चाहिए. जिनका संबंधित मुद्दों पर किसी प्रकार का असर हो सकता है
 'पुरानी बीमारी का खुलासा करना जरूरी'- न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि बीमा पॉलिसी के फार्म में पुरानी बीमारी का अलग से खुलासा करने की जरूरत होती है. जिससे बीमा करने वाली कंपनी जोखिम के आधार पर एक सही निर्णण करने में सक्षम हो सके.

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इस पीठ में न्यायमूर्ति इंदू मल्होत्रा और न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी भी शामिल रहीं. पीठ ने कहा, ‘बीमे का अनुबंध अत्यधिक भरोसे पर आधारित होता है. यह बीमा लेने के इच्छुक हर व्यक्ति का दायित्व हो जाता है कि वह संबंधित मुद्दे को प्रभावित करने वाली सारी जानकारियों का खुलासा करे, ताकि बीमा करने वाली कंपनी बीमांकिक जोखिम के आधार पर किसी विवेकपूर्ण निर्णय पर पहुंच सके.’
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आयोग के फैसले के खिलाफ दायार की थी याचिका- बीमा कंपनी ने आयोग के फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय के समक्ष याचिका दायर की थी. सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने राष्ट्रीय उपभोक्ता शिकायत निवारण आयोग के फैसले को रद्द करते हुए कहा कि बीमा लेने वाले व्यक्ति ने अपनी पुरानी बीमारियों के बारे में जानकारियों का खुलासा नहीं किया था. उसने यह भी नहीं बताया था कि बीमा लेने के महज एक महीने पहले उसे खून की उल्टियां हुई थीं. पीठ ने कहा, ‘बीमा कंपनी के द्वारा की गयी जांच में पता चला है कि बीमा धारक पुरानी बीमारियों से जूझ रहा था, जो लंबे समय तक शराब का सेवन करने के कारण उसे हुई थीं. उसने उन तथ्यों की भी जानकारी बीमा कंपनी को नहीं दी थी, जिनके बारे में वह अच्छे से अवगत था.’
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