लोगों को राहत देना और अर्थव्यवस्था को संभालना, इन दोहरी चुनौतियों से जूझ रहा है RBI

भारतीय रिज़र्व बैंक
भारतीय रिज़र्व बैंक

निवेशकों को हमेशा ही यही उम्मीद रहती है कि सरकार देश में उद्योग व्यापार बढ़ाने वाले काम करती रहे. सरकार और नियामक संस्थाओं के पास वैसी नीतियां बनाने के बहुत से तरीके होते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 27, 2020, 5:07 PM IST
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शुक्रवार को रिजर्व बैंक ने अचानक कई ऐलानों की झड़ी लगा दी. कोरोना के मद्देनजर आरबीआई गवर्नर के ये ऐलान प्रेस कॉन्फ्रेंस करके नहीं दिए गए बल्कि एकतरफा बयान ही थे. लिहाजा उसी समय सवाल जवाबों की गुंजाइश नहीं थी. इसीलिए मीडिया अपने अपने टीवी चैनलों पर रिजर्व बैंक के फैसलों को समझता और समझाता रहा. दरअसल, देश में कोरोना की इमरजंसी को बताकर माहौल ऐसा बनाया जा चुका है कि सरकार और नियामक संस्थाओं के फैसलों का आलोचनात्क विश्लेषण करने से सभी परहेज़ करने लगे हैं. लेकिन रिजर्व बैंक के फैसले इतने सनसनीखेज हैं कि उनके विश्लेषण का काम रोका नहीं जा पाएगा. गौरतलब है कि कोरोना के कारण चैतरफा लाॅकडाउन के बावजूद शेयर बाजार को खोलकर रखा गया है. देश में कोई भी आर्थिक गतिविधि या अर्थजगत के फैसले हों, शेयर बाजार की सुई उसके करंट को फौरन बता देती है. लिहाजा रिजर्व बैंक के फैसलों के असर को जांचना हो तो शेयर बाजार से बेहतर कोई और बैरोमीटर हो नहीं सकता.

क्या रूख दिखाया शेयर बाजार ने
फैसले के दिन यानी शुक्रवार को शेयर बाजार का सेंसेक्स अच्छी खासी बढ़त के साथ खुला था. बाजार के विश्लेषक सबेरे से ही कह रहे थे कि रिजर्व बैंक से खुशखबरियां मिलेंगी. ऐसे मौकों पर खुशखबरियों और राहत के एलान होते ही हैं. सो ताल्कालिक खुशफहमी लाजिमी थी. लेकिन हैरत है कि ढेरों बड़े बड़े ऐलानों के बावजूूद शेयर बाजार गिरने लगा और गिरते गिरते अपनी सारी बढ़त गवां कर हरे से लाल निशान पर आ गया. गवर्नर के प्रेस बयान के पहले सेंसेक्स का जो स्तर 31 हजार को पार कर गया था वह प्रेस काॅन्फेस के बाद लागातर गिरता हुआ सवा 11 बजे डेढ़ हजार नीचे आ चुका था. पूरे दिन रिजर्व बैंक के फैसलों के सकारात्मक प्रभाव के प्रचार प्रसार के बाद भी बाजार वह स्तर हासिल नहीं कर पाया जो उसने रिजर्व बैंक के बयान के पहले बनाया था. आखिर बाजार अपने पहले दिन के स्तर से 131 अंक नीचे यानी 29 हजार 817 अंक पर बंद हुआ. यानी निवेशकों को रिजर्व वैंक की नीतियां पसंद नहीं आईं या यों कहें कि उद्योग व्यापार जगत को रिजर्व बैंक के ऐलान अपनी उममीद के मुताबिक नहीं लगे.

क्या रही होगी उम्मीद
निवेशकों को हमेशा ही यही उम्मीद रहती है कि सरकार देश में उद्योग व्यापार बढ़ाने वाले काम करती रहे. सरकार और नियामक संस्थाओं के पास वैसी नीतियां बनाने के बहुत से तरीके होते हैं. लेकिन रिजर्व बैंक के पास ब्याज के रेट घटाने बढ़ाने और वाणिज्यिक बैंकों के पास जमा पैसे का एक हिस्सा अपने पास जमा करवा लेने का अधिकार होता है. वह व्यापारिक बैंकों को यह छूट कितनी बढ़ाता है या घटाता है इसका असर अप्रत्यक रूप् से शेयर बाजार पर पड़ता ही है. जाहिर है कि बाजार को ऐसे फैसलोे की उम्मीद थी कि उसे बैंकों से ज्यादा और सस्ते कर्ज मिलने की स्थिति बनेगी.



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फैसले मौजूदा हालात के मद्देनजर
केरोना के मद्देनजर ही सरकार को अर्थव्यवस्था संभाले रखने के लिए कई फैसले पहले से ही लेने पड़ रहे थे. एक रोज पहले ही सरकार ने लाॅकडाउन के कारण और ज्यादा धटती आर्थिक गतिविधियों की चिंता में एक लाख 70 हजार करोड़ के राहत पैकेज का ऐलान किया था. हैरत जताई गई कि उस ऐलान में उद्योग व्यावार के लिए कोई बड़ा फैसला नहीं था. स्वाभाविक सी बात है कि पिछली छह तिताहियों से लगातार उतार पर आती जा रही अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए सरकार जिस तरह से बड़े बड़े ऐलान करती रही है उससे वह भी भारी आर्थिक संकट में ही है. आखिर पैसा निकाला कहां से जाएगा. बाजार यही सब देखता है. रिजर्व बैंक के फैसलों को लेकर बाजार को यही देखने का कुतूहल था कि रिजर्व बैंक सरकार की मदद किस तरह करेगा.

क्या किया रिजर्व बैंक ने
बैंक ने बीसियों फैसलों का ऐलान किया. टुकड़ों टुकड़ों में उनके असर का आकलन सबेरे से ही हो रहा है. लेकिन लब्बोलुआब यह है कि रिजर्व बैंक के फैसलों से तीन लाख 74 हजार करोड़ की वह रकम सक्रिय होकर बाजार में आ जाएगी जो भविष्य आर्थिक सुरक्षा के लिए रिजर्व बैंक के कड़े नियंत्रण में रहती है. बहरहाल, रिजर्व बैंक ने नीतिगत दरों में भारी फेरबदल करते हुए किसी तरह पौने चार लाख करोड़ की रकम को बाजार में गतिमान करने का इंतजाम किया है. हालांकि यह इंजमाज करते हुए बड़ी सावधानी बरती गई कि बैंकों की हालत और उनकी परेशानियों का बिल्कुल भी जिक्र न किया जाए. खासतौर पर कहा गया कि लाॅकडाउप के कारण जो कर्जदार अपनी ईएमआई नहीं चुका पाएंगे उन्हें तीन महीने तक डिफाल्टर न माना जाए और वह रकम एनपीए न मानी जाए, इस तरह के फैसले ने बाजार पर क्या असर डाला इसे बारीकी से देखने की जरूरत पड़ेगी. फिर भी पहली नज़र में यह फैसला कर्जदारों को एक तात्कालिक राहत तो है ही. और बैंकों को भी है क्योंकि एनपीए के आंकड़े उजागर होते जाने से उनकी साख पर कई तिमाहियों से बहुत ही बुरा असर पड़ रहा है. लेकिन यह समस्या का कोई समाधान नहीं बल्कि कोरोना के कारण लाॅकडाउन और उससे अचानक मची आर्थिक दहशत कम करने का एक टोटका भर ही समझा जाएगा. वैसे समाधान रिजर्व बैंक कर भी नहीं सकता था. यह काम सरकारी फैसलों से ही संभव बन सकता है.

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और क्या कर सकता था रिजर्व बैंक
रिजर्व के तय कई कामों में एक यह भी है कि आर्थिक आपातकाल की स्थिति में वह अंतिम उपाय के कर्जदाता के रूप् में वाणिज्यिक बैंकों को आर्थिक मदद देता है. उसकी इस भूमिका के रूप् में क्या इस समय यह उम्मीद लगाई जा रही थी कि वह मुश्किल हालात में फंसे बैंकों को मदद का एलान करेगा? ऐसी उम्मीद ज़ाहिर भले न की जा रही हो लेकिन बहुत संभव है उद्योग व्यापार जगत यही उम्मीद लगाए हो कि रिजर्व बैंक यह व्यवस्था कर दे तो काॅरपोरेट जगत को और ज्यादा कर्ज मिलने का प्रबंध हो जाए.

अब क्या सरकार कुछ नया करेगी
सरकार और सरकारी निकायों को लगातार ही कुछ न कुछ आर्थिक फैसलों का ऐलान करना पड़ रहा है. वित्तमंत्री की आखिरी प्रेस काॅन्फैस जिसमें एक लाख 70 हजार करोड़ के राहत पैकेज का ऐलान हुआ वह भी उम्मीद के मुताबिक असर पैदा नहीं कर पाया था. इसीलिए सरकारी पक्ष के विश्लेषकों को दिलासा देना पड़ा कि जरूरत पड़ने पर आगे और भी एलान किए जाएंगे. यानी उद्योग व्यापार जगत की उम्मीद कायम है कि आगे उसे बड़ी खुशखबरी सुनने को मिलेगी.

सब कुछ कोरोना के नाम पर
पलट कर जरूर देख लेना चाहिए कि देश की आर्थिक गतिविधियां कम होने की चिंता सिर्फ कोरोना के बाद ही पैदा नहीं हुई है. अलबत्ता पहले से चली आ रही आर्थिक चिंता बढ़ती जरूर दिखाई दे रही है. जिन विश्लेषकों ने हिसाब लगाकर बताया है कि कोरोना के कारण देश की जीडीपी को कोई नौ लाख करोड़ का नुकसान होगा उन्हें एक बार फिर हिसाब लगाकर देखना चाहिए. बेशक लाॅकडाउन एक डेढ़ महीने के लिए उद्योग व्यापार को बहुत धीमा करेगा. लेकिन उसके बाद उसकी रफतार उसी तेजी से बढ़ाई भी जा सकती है. लेकिन गौर इस बात पर होना चाहिए कि कोरोना के वजूद के पहले तक आर्थिक स्थितियां क्या रही थीं. खासतौर अर्थव्यवस्था में कृशि क्षेत्र के योगदान का सही सही आकलन इन हालात में हमारे बहुत काम आ सकता है.

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