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अमान्‍य घोषित हो जाए ITR, तो क्‍या दोबारा भर सकते हैं? जानिए सारे जरूरी सवालों के जवाब

अमान्‍य घोषित हो जाए ITR, तो क्‍या दोबारा भर सकते हैं? जानिए सारे जरूरी सवालों के जवाब

आईटीआर को आयकर विभाग कई कारणों से अमान्‍य (invalid) करार कर देता है.

आईटीआर को आयकर विभाग कई कारणों से अमान्‍य (invalid) करार कर देता है.

आयकर कानूनों के अनुसार, अगर किसी आईटीआर (ITR) को अमान्‍य करार दे दिया जाता है तो फिर आयकर विभाग उस आईटीआर को ऐसे मानता है जैसे कि वो दाखिल किया ही न गया हो. आईटीआर को आयकर विभाग कई कारणों से अमान्‍य (invalid) करार कर देता है.

हाइलाइट्स

आईटीआर भरने (ITR Filing) के बाद निर्धारित समय में इसका सत्‍यापन बेहद जरूरी होता है.
आयकरदाता रिवाइज्‍ड (Revised ITR) या विलंबित आईटीआर (Belated ITR) फाइल कर सकता है.
ऐसा तभी किया सकता जब रिवाइज्‍ड आईटीआर दाखिल करने की समयसीमा बची हो.

नई दिल्‍ली. एसेसमेंट वर्ष 2022-23 के लिए इनकम टैक्‍स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तिथि बीत चुकी है. आईटीआर फाइल करने के बाद एक महत्‍वपूर्ण काम होता है आईटीआर को सत्‍यापित (ITR Verification) करना. आईटीआर को सत्‍यापित करने के बाद ही यह काम पूरा होता है. आईटीआर के वेरिफाई करने के बाद ही आयकर विभाग इस पर आगे की कार्रवाई करता है.

अगर कोई आयकरदाता आईटीआर भरने (ITR Filing) के बाद निर्धारित समय में आईटीआर को सत्‍यापित नहीं करता है तो आईटीआर अमान्‍य हो जाता है. जिन आयकरदाताओं ने आईटीआर जुलाई 2022 से पहले दाखिल की है, वो आईटीआर दाखिल करने की तिथि से 120 दिन तक आईटीआर वेरिफाई कर सकते हैं. लेकिन, जिन लोगों ने 31 जुलाई के बाद आईटीआर भरा है, उन्‍हें इसे वेरिफाई करने के लिए इस बार केवल 30 दिन मिलेंगे.

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क्‍या करें अगर आईटीआर हो जाए अमान्‍य?
आयकर कानूनों के अनुसार, अगर किसी आईटीआर को अमान्‍य करार दे दिया जाता है तो फिर आयकर विभाग उस आईटीआर को ऐसे मानता है जैसे कि वो दाखिल ही नहीं किया गया. आयकर कानून के जानकारों का कहना है कि अमान्‍य आईटीआर को फिर से दाखिल किया जा सकता है. आयकरदाता रिवाइज्‍ड (Revised ITR) या विलंबित आईटीआर (Belated ITR) फाइल कर सकता है. लेकिन, अगर ऐसा तभी किया जा सकता है, जब रिवाइज्‍ड आईटीआर दाखिल करने की समयसीमा बची हो. लास्‍ट डेट निकलने के बाद आयकरदाता उस असेसमेंट ईयर के लिए आयकर दाखिल करने से वंचित रह जाता है.

incometaxindia.gov.in के अनुसार, ऐसी स्थिति में असेसिंग ऑफिसर आयकर अधिनियम की धारा 144 में प्राप्त शक्तियों का उपयोग करते हुए आयकरदाता को आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए कह सकता है. धारा 144 के तहत अपने सर्वोत्‍तम निर्णय के आधार पर असेसमेंट करने के लिए निर्धारण अधिकारी जिन मामलों में बाध्‍य हैं, वो हैं-

  • जब आयकरदाता, आयकर अधिनियम की धारा 139 (1) के तहत अंतिम तिथि तक आईटीआर दाखिल करने में विफल रहता है.
  • जब आयकरदाता आयकर अधिनिनियम की धारा 139 (4) के अनुसार विलंबित आयकर रिटर्न दाखिल करने में असफल रहता है.
  • जब आयकरदाता धारा 139 (5) के अनुसार रिवाइज्‍ड रिटर्न दाखिल करने में विफल रहता है.
  • जब इनकम टैक्‍सपेयर धारा 139(8ए) के अनुसार एक अपडेटिड आईटीआर भरने में विफल रहता है.

जब आयकरदाता उपरोक्‍त में से किसी भी तरह की आईटीआर को भरने में असफल रहता है और असेसिंग ऑफिसर को लगता है तो आयकरदाता की आय का असेसमेंट होना जरूरी है, तो फिर वह आयकर अधिनियम की धारा 142 (1) के अंतर्गत आयकरदाता को नोटिस जारी कर उसे आईटीआर भरने को कह सकता है. नोटिस मिलने पर आयकरदाता रिवाइज्‍ड या विलंबित आईटीआर भरने की समयसीमा बीतने के बाद भी आईटीआर दाखिल कर सकता है.

Tags: Business news in hindi, Income tax, ITR, ITR filing

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