आम आदमी को मिली बड़ी राहत- खाने-पीने की चीजों की महंगाई में आई गिरावट, दूसरे महीने बेहतर हुए IIP आंकड़े

आम आदमी को मिली बड़ी राहत- खाने-पीने की चीजों की महंगाई में आई गिरावट, दूसरे महीने बेहतर हुए IIP आंकड़े
दिसंबर के मुकाबले जनवरी में IIP ग्रोथ -0.30 फीसदी से बढ़कर 2 फीसदी पर पहुंच गई है.

सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक फरवरी में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स इन्फेलशन (CPI inflation) 7.6 फीसदी से गिरकर 6.58 फीसदी पर आ गई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 12, 2020, 6:23 PM IST
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नई दिल्ली. आर्थिक मोर्चे पर राहत की खबर आई है. जनवरी में खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने के बाद आम लोगों की जेब पर बोझ बढ़ गया. लेकिन फरवरी में इससे कुछ राहत मिली है. सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक फरवरी में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स इन्फेलशन (CPI inflation) 7.6 फीसदी से गिरकर 6.58 फीसदी पर आ गई है. आपको बता दें कि इससे पहले जनवरी में महंगाई दर बढ़कर 6 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी. यह लगातार पांचवां महीना है जब खुदरा महंगाई भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के महंगाई लक्ष्य 4 फीसदी के ऊपर गई है.

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (CSO) ने बुधवार को आंकड़े जारी किए है.  सब्जियों और खाने-पीने की चीजों की कीमतों में आई गिरावट की वजह से महंगाई घट गई है. आंकड़ों के मुताबिक, कंज्यूमर फूड महंगाई दर 13.63 फीसदी से गिरकर 10.81 फीसदी पर आ गई है. वहीं, सब्जियों की महंगाई दर 50.19 फीसदी से गिरकर 31.61 फीसदी पर आ गई है.





 
हालांकि, फ्यूल और लाइट महंगाई दर 3.66 फीसदी से बढ़कर 6.36 फीसदी पर पहुंच गई है. जबकि, हाउंसिग महंगाई दर में खास बदलाव नहीं हुआ है. ये 4.20 फीसदी से बढ़कर 4.24 फीसदी हो गई है.इसके अलावा दालों की महंगाई दर 16.71 फीसदी से गिरकर 16.61 फीसदी पर आ गई है.

IIP में आंकड़ों में लगातार दूसरे महीने हुआ सुधार- दिसंबर के मुकाबले जनवरी में IIP ग्रोथ -0.30 फीसदी से बढ़कर 2 फीसदी पर पहुंच गई है.



प्राइमरी गुड्स ग्रोथ 2.2 फीसदी से घटकर 1.8 फीसदी पर आ गई है. वहीं, इंटरमीडिएट गुड्स ग्रोथ 12.5 फीसदी से बढ़कर 15.8 फीसदी हो गई है. इसके अलावा कंज्यूमर ड्यूरेबल्स ग्रोथ -6.7% से बढ़कर -4% पर पहुंच गई है.

क्या होता है आईआईपी (What is IIP)-औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) का किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में खास महत्व होता है. इससे पता चलता है कि उस देश की अर्थव्यवस्था में औद्योगिक वृद्धि किस गति से हो रही है.आईआईपी के अनुमान के लिए 15 एजेंसियों से आंकड़े जुटाए जाते हैं. इनमें डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड प्रमोशन, इंडियन ब्यूरो ऑफ माइंस, सेंट्रल स्टेटिस्टिकल आर्गेनाइजेशन और सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी शामिल हैं

इंडेक्स में शामिल वस्तुओं को तीन समूहों-माइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रिसिटी में बांटा जाता है. फिर इन्हें बेसिक गुड्स, कैपिटल गुड्स, इंटरमीडिएट गुड्स, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स जैसी उप-श्रेणियों में बांटा जाता है.

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