चीन से भारत आने वाली दो कंपनियों की मदद करेगा जापान, SCRI के तहत लिया ये फैसला

जापान को दो कंपनियों अब चीन से बाहर निकलकर भारत आ रही हैं.
जापान को दो कंपनियों अब चीन से बाहर निकलकर भारत आ रही हैं.

गुरुवार को पीएम मोदी द्वारा ग्लोबल इन्वेस्टर्स राउंडटेबल को संबोधित करने के बाद जापान ने चीन से बाहर निकलने वाली दो कंपनियों को वित्तीय मदद करने का ऐलान किया है. ये दोनों कंपनियां Toyota-Tsusho और Sumida हैं, जो भारत आ रही हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 6, 2020, 3:08 PM IST
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नई दिल्ली. चीन से बाहर निकलने वाली दो कंपनियों को वित्तीय मदद देने के लिए जापान सहमत हुआ है. ये दोनों कंपनियां Toyota-Tsusho और Sumida है. जापान की तरफ से इन दोनों कंपनियों को मदद की पेशकश इसलिए की गई है ताकि वो भारत में अपने मैन्युफैक्चरिंग बेस का विस्तार कर सकें. हाल ही में जापान ने चीन से बाहर निकलने वाली कंपनियों को मदद करने का ऐलान किया था. गुरुवार को पीएम मोदी द्वारा ग्लोबल इन्वेस्टर्स राउंडटेबल को संबोधित करने के बाद इसका ऐलान किया गया. Toyota-Tsusho भारत रेयरअर्थ मेटल फैसिलिटी सेटअप करने की योजना बना रही है. Sumida ऑटोमोटिव पार्ट्स बनाने वाली एक कंपनी है.

SCRI के तहत जापान करेगा मदद
हाल ही में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र (Indo-Pacific Region) में व्यापार को लेकर भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के मंत्रालयों ने सितंबर महीने के पहले सप्ताह में ही 'Supply Chain Resilience Initiative' (SCRI) की शुरुआत की थी. इसी पहले के तहत भारत ने जापान से कंपनियों को वित्तीय सहायता प्रदान करने का आग्रह किया था. भारत-जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच इस खास पहल के जरिए सप्लाई सोर्सेज के विस्तार के अलावा कई सेक्टर्स को प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी. साथ ही इस क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को आकर्षित करने में भी मदद मिलेगी.

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क्या है SCRI का लक्ष्य?


मोटे तौर पर देखें तो इस पहल से व्यापार और निवेश को प्रोमोट कर उन्हें विस्तार दिया जाएगा. इसके लिए ट्रेड डॉक्युमेंट्स के डिजिटलीकरण, ट्रेड और इन्वेस्टमेंट प्रोमोशन, सहयोग के लिए सेक्टर्स को​ चिन्हित करने, क्षमता का​ विस्तार, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाने और अन्य देशों को इस पहल के साथ जोड़ने की दिशा में काम किया जाएगा. ASEAN-Japan Economic Resilience Action Plan” और “भारत-जापान औद्योगिक प्रतिस्पर्धा पार्टनरशिप” जैसे द्विपक्षीय फ्रेमवर्क तैयार करने की दिशा में भी काम किया जाएगा.

तीनो देशों के ​मंत्रालयों ने बीते 1 सितंबर 2020 को एक ज्वाइंट स्टेटमेंट भी जारी किया था. इस स्टेटमेंट में एक स्वतंत्र, निष्पक्ष, समावेशी, गैर-भेदभावपूर्ण, पारदर्शी, पूर्वानुमानित और स्थिर व्यापार और निवेश वातावरण देने के लिए नेतृत्व के काम के बारे में जानकारी है. साथ ही, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आपूर्ति श्रृंखला को बढ़ावा देने की भी बात कही गई है. अधिकारी तुंरत नई पहल के विवरण पर काम करेंगे और उन देशों को भी इस पहल से जोड़ने की दिशा में काम किया जाएगा, जो उपरोक्त विचार साझा करते हैं.



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सरकार के अलावा इनकी भागीदारी पर जोर
SCRI इसमें सरकारों के अलावा इंडस्ट्री और एकेडिमिया को भी शामिल करने की योजना बना रहा है. सभी श्रेणी की वस्तुओं के वॉल्युम को के नजरिए से भी कई सेक्टर्स को शामिल किया जाएगा. इसमें इन सेक्टर्स के लिए कच्चा माल, मध्यवर्ती, पूंजी और कंज्यूमर गुड्स शामिल होंगे. शुरुआती दौर में ​जिन सेक्टर्स को चिन्हित किया गया है, उनमें पेट्रोलियम एंड पेट्रोकेमिकल्स, ऑटो व ऑटो कंपोनेन्ट्स, स्टील व इससे बनने वाले उत्पाद, दवाएं, फार्मास्युटिकल्स और मेडिकल डिवाइसेज, टेक्सटाइल्स, मरीन उत्पाद, टूरिज्म एंड ट्रैवल सर्विसेज, फाइनेंशियल सर्विसेज और आईटी सर्विसेज शामिल हैं.
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