ये 4 कंपनियां ही बचा सकती हैं अब जेट एयरवेज को...

देश की 25 साल पुरानी एविएशन कंपनी जेट एयरवेज ने बुधवार रात को अपनी आखिरी फ्लाइट संचालित की और गुरुवार से सभी उड़ानें अस्थायी रूप से बंद करने का फैसला लिया है.

News18Hindi
Updated: April 18, 2019, 3:34 PM IST
ये 4 कंपनियां ही बचा सकती हैं अब जेट एयरवेज को...
देश की 25 साल पुरानी एविएशन कंपनी जेट एयरवेज ने बुधवार रात को अपनी आखिरी फ्लाइट संचालित की और गुरुवार से सभी उड़ानें अस्थायी रूप से बंद करने का फैसला लिया है.
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Updated: April 18, 2019, 3:34 PM IST
देश की 25 साल पुरानी एविएशन कंपनी जेट एयरवेज ने बुधवार रात को अपनी आखिरी फ्लाइट संचालित की और गुरुवार से सभी उड़ानें अस्थायी रूप से बंद करने का फैसला लिया है. बैंकों की ओर से जेट को 400 करोड़ रुपये की इमरजेंसी मदद नहीं मिलने के चलते ये फैसला लिया है. एक्सपर्ट्स बताते हैं इस माहौल में जेट को बचाने के लिए सिर्फ दो ही ऑप्शन है.

इन चार कंपनियों के पास है जेट को बचाने की चाबी- पुराने कर्ज़ का भुगतान नहीं करने के चलते कंपनी पर अब बैंकों का नियंत्रण है. बैंकों ने हिस्सा बिक्री के लिए बोली मंगाई है. इन बोली लगाने वालों में  एतिहाद एयरवेज, राष्ट्रीय निवेश कोष एनआईआईएफ, निजी क्षेत्र के टीपीजी और इंडिगो पार्टनर है. अगर इनमें से कोई भी कंपनी हिस्सा खरीद लेती है, तो फिर से एयरलाइंस अपना ऑपरेशन शुरू कर देगी. (ये भी पढ़ें-सातवें आसमान पर हवाई किराया! 37 हजार वाली टिकट का दाम 2 लाख हुआ)



 प्राइवेट एयरलाइंस जेट एयरवेज (Jet Airways) भारी नकदी संकट से जूझ रही है जिसकी वजह से जेट एयरवेज बंद होने के कगार पर पहुंच गई है. इसके स्टेकहोल्डर्स का एयरलाइन के रिवाइवल को लेकर विश्वास कम होता जा रहा है और लेंडर्स इसे और कर्ज देने से बच रहे हैं. इससे देश की इस पुरानी प्राइवेट एयरलाइन के कामकाज जारी रख पाने को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है.

अप्रैल महीने की शुरुआत में बैंकों के समूह की ओर से एसबीआई कैप ने जेट एयरवेज की 32.1 से लेकर 75 फीसदी तक हिस्सेदारी की बिक्री के लिये बोलियां मंगाई थी. बोलियां 8 अप्रैल से 12 अप्रैल तक मंगाई गई थीं.

(2) अगर बोली लगाने वाली कंपनी हिस्सा नहीं खरीद पाई तो फिर जेट एयरवेज एनसीएलटी में जाएगी. जहां पहले तो कंपनी से रिवाइवल प्लान मांगा जाएगा. अगर कंपनी नहीं सौंपी पाती है तो इसकी नीलामी की प्रक्रिया शुरू होगी. (ये भी पढ़ें-जेट एयरवेज डूबी तो छिनेगी 20 हजार नौकरियां, जानिए क्या है पूरा मामला!)

बुधवार को क्या हुआ- जेट एयरवेज की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि बैंकों के समूह द्वारा 400 करोड़ रुपये का इंस्टेंट लोन नहीं मिलने के बाद  जेट एयरवेज ने अस्थाई तौर पर ऑपरेशन बंद करने का फैसला किया है. कर्जदाताओं और अन्य किसी भी तरीके से एमरजेंसी फंड नहीं मिला है. ऐसे में कंपनी को चलाने कि लिए पैसा खत्म हो गया है. कंपनी ईंधन और दूसरी अहम सेवाओं का भुगतान नहीं कर पा रही है. इस वजह से हम अपनी सभी अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानों को तुरंत प्रभाव से रद्द करने के लिये मजबूर हैं.

बैंकों ने क्या कहा-जेट एयरवेज के कर्जदाताओं ने बयान जारी कर कहा, विचार-विमर्श के बाद हमने फैसला किया है कि जेट एयरवेज के अस्तित्व के लिए सबसे अच्छा तरीका संभावित निवेशकों से बोलियां प्राप्त करना है. 16 अप्रैल को बोली दस्तावेज जारी किए गए हैं. हमें उम्‍मीद है कि पारदर्शी तरीके से बोली प्रक्रिया सफल होगी.(ये भी पढ़ें-Jet Airways के डूबने से ये लोग हुए मालामाल! किराए भी कई गुना बढ़ें)

ग्राहक क्या करेंगे-जेट एयरवेज की उड़ान बंद होने के बाद ग्राहकों की टेंशन बढ़ गई है. इस माहौल में डीजीसीए ने अन्य एविएशन कंपनियों को तुरंत प्रभाव से उड़ानों के फेरे बढ़ाने को कहा है. साथ ही, कंपनियों को ज्यादा फ्लाइट्स चलाने को भी कहा गया है. इसके अलावा जिन ग्राहकों ने जेट एयरवेज के विमान का टिकट कराया है उन्‍हें एयरलाइन की ओर से जल्‍द ही रिफंड किया जाएगा. इस बीच जेट एयरवेज संकट पर नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने ट्वीट कर कहा कि वह जेट के समाधान प्रक्रिया का मौजूदा नियमों के दायरे में रहते हुये समर्थन करेगा.

कंपनी के साथ आखिर क्या हुआ-नरेश गोयल ने जेट एयरवेज की शुरुआत आज से करीब 25 साल पहले की थी. लेकिन साल 2010 के बाद कंपनी पर कर्ज़ बढ़ने लगा. ऐसे में कंपनी मुनाफे से घाटे में आ गई. इसके बाद कंपनी बैंकों के कर्ज़ का भुगतान नहीं कर पाई. साथ ही, ऑपरेशन चलाने के लिए कंपनी के पास पैसा खत्म हो गया. आपको बता दें कि कंपनी पर करीब 8500 करोड़ रुपये का कर्ज़ है.

 
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