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सोने के गहने खरीदने की है तैयारी तो ठहर जाइए, इस नियम को लेकर हो सकता है बड़ा फैसला

ज्वेलर्स को तीन हॉलमार्क वाले ज्वेलरी ही बेचने की अनुमति होगी.

ज्वेलर्स को तीन हॉलमार्क वाले ज्वेलरी ही बेचने की अनुमति होगी.

लॉकडाउन में करीब तीन महीने तक ज्वेलरी सेल्स बुरी तरह प्रभावित रहा. ज्वेलर्स का कहना कि सेल्स को एक बार फिर से ट्रैक पर आने के लिए 3 महीने तक का समय लग सकता है. इसी को देखते उन्होंने सरकार से हॉलमार्किंग की डेडलाइन आगे बढ़ाने की मांग की है.

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    नई दिल्ली. सोने शुद्ध को लेकर हॉलमार्किंग (Hallmarking) नियमों की डेडलाइन बढ़ाने के लिए ज्वेलर्स ने मांग की है. ज्वेलर्स का कहना है कि भारत जैसे देश में सोने की शुद्धता (Gold Purity Rules) के लिए तीन स्टैंडर्ड्स पर्याप्त नहीं है क्योंकि कुछ बाजार में इसे लेकर दिक्कते आएंगी. कोविड-19 की वजह से होने वाले नुकसान पर भी उन्होंने कहा कि सरकार अगले साल तक हॉलमार्किंग की डेडलाइन को आगे बढ़ा दे.

    जनवरी 2021 ये अनिवार्य होना है हॉलमार्किंग नियम
    पिछले साल नंबर में ही सरकार ने घोषणा की थी कि 15 जनवरी 2021 से देशभर गोल्ड ज्वेलरी और आर्टिफैक्ट्स की शुद्धता के लिए हॉलमार्किंग ​अनिवार्य कर दी जायेगी. सरकार ने ज्वेलर्स का एक साल से अधिक समय दिया था ताकि वो हॉलमार्किंग के सिस्टम को अपना लें और ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) में रजिस्ट्रेशन करा लें. उन्हें तीन हॉलमार्क्ड गोल्ड को ही बेचने की अनुमति होगी. ये तीन हॉलमार्क 14, 18 और 22 कैरेट का होगा. अगर इस नियम को पालन नहीं किया जाता है तो ज्वेलर्स को पेनाल्टी या जेल हो सकती है.

    लॉकडाउन से सेल्स बुरी तरह प्रभावित
    ऑल इडिया जेम एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक काउंसिल के वाइस चेयरमैन और सेन्को गोल्ड एंड डायमंड्स के सीएमडी शानकर सेन ने बताया, 'लॉकडाउन की वजह से ज्वेलर्स को तीन महीने तक सेल्स व ऑपरेशंस का नुकसान उठाना पड़ा है. सेल्स को पटरी पर लौटने में अभी भी 3 से 4 महीने लग सकते हैं. ऐसे में इस बात की पूरी संभावना है कि उनके पास कुछ ऐसी ज्वेलरी बच जाएगी, जिनपर हॉलमार्किंग नहीं होगी.'

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    केवल 40 फीसदी ज्वेलरी ही प्रमाणित
    ज्वेलर्स के मुताबिक, उन्हें अपना स्टॉक खत्म करने के लिए अगला 6 महीना पर्याप्त नहीं होगा. हॉलमार्किंग सेवा प्रदाता भी इस डेडलाइन को बढ़ाने के पक्ष में हैं. ज्वेलरी इंडस्ट्री में करीब 40 फीसदी गोल्ड बिना हॉलमार्क के हैं. इंडियन एसोसिशन ऑफ हॉलमार्किंग सेंटर्स के अध्यक्ष उदय शिंदे ने कहा, 'इस सीजन में करीब ढाई महीने के लिए रिटेल ज्वेलरी के सेल्स में भारी गिरावट आया है. किसी को भी यह नहीं पता है कि अगले 6 महीने में क्या होने वाला है. हम यह भी सिफारिश करते हैं कि सरकार इस डेडलाइन को बढ़ा दे.'

    उन्होंने कहा कि अब और ज्यादा हॉलमार्किंग स्टैंडर्ड्स की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि वो ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स से इस संबंध में बात करेंगे. इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन ने भी हॉलमार्किंग अनिवार्य करने की डेडलाइन को बढ़ाने की मांग की है.

    क्या है हॉलमार्क?
    सोने की शुद्धता को प्रमाणित करने के लिए हॉलमार्क किया जाता है. प्रमाणित ज्वेलरी पर बीआईएस का चिन्ह होता है और यह प्रमाणित करता है कि ज्वेलरी भारतीय मानक ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड पर खतरा उतरता है. अगर सोने की ज्वेलरी पर हॉलमार्क है तो इसका मतलब है कि उसकी शुद्ध प्रमाणित है. असली हॉलमार्क पर भारतीय मानक ब्यूरो का तिकोना निशान होता है. उस पर हॉलमार्किंग सेंटर के लोगो के साथ सोने की शुद्धता भी लिखी होती है. उसी में ज्वेलरी निर्माण का साल और उत्पादक का भी लोगो होता है. अगर गोल्ड ज्वेलरी की शुद्धता को लेकर संदेह होता है तो किसी भी हॉलमार्किंग सेंटर जाकर इसकी जांच करवाई जा सकती है. देशभर में करीब 900 हॉलमार्किंग सेंटर हैं. इनकी लिस्ट आप bis.org.in पर देख सकते हैं.

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