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​Jio ने टेलिकॉम मंत्री को लिखा लेटर, कहा- COAI नहीं, सुप्रीम कोर्ट की बात माने सरकार

रिलायंस जियो

रिलायंस जियो

COAI द्वारा दो टेलिकॉम कंपनियों को बकाया राशि चुकाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के फैसले के बाद भी राहत देने की मांग की थी. पहले भी विरोध जता चुके जियो ने एक बार फिर रविशंकर प्रसाद को नया लेटर​ लिखा है.

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    नई दिल्ली. सेल्युलर ऑपरेशन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI) द्वारा रिलायंस जियो (Reliance Jio) के लेटर को नंजरअंदाज करने के बाद अब एक बार फिर जियो ने टेलिकॉम मंत्री रविशंकर (Ravi Shankar Prasad) को चिट्ठी लिखी है. इस लेटर में जियो ने अपना पक्ष दोबारा मजबूती से रखते हुए कहा कि COAI जियो को नजरअदांज करते हुए दो टेलिकॉम कंपनियों को बचाने में लगा हुआ है. जियो ने टेलिकॉम मंत्री को लिखे गए इस लेटर में कहा है कि एक तय एजेंडे के तहत COAI दो टेलिकॉम कंपनियों (एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया) के हितों को बचाने की कोशिश कर रहा है.

    सुप्रीम कोर्ट के फेसले के खिलाफ जाने की कोशिश
    जियो ने अपने पहले लेटर का हवाला देते हुए कहा है कि COAI अपनी इस कोशिश से सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) के फैसले के विरुद्ध जाने की कोशिश कर रहा है. इस लेटर में रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड (RJIL) ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दे दिया है, ऐसे में इन दोनों कंपनियों पर सरकार सख्त हो. बता दें कि उपरोक्त दोनों टेलिकॉम कंपनियों की दलीलों को सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में खारिज करते हुए तीन माह के अंदर हर्जाना भरने को कहा था.

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    दोनों ऑपरेटर्स बकाये का भुगतान करने में सक्षम
    जियो ने इस लेटर में जोर देते हुए कहा है कि दोनों सर्विस प्रोवइडर्स के पास पर्याप्त वित्तीय क्षमता है कि वो सरकार का बकाया जमा कर सकें. दोनों कंपनियां अपनी मौजूदा निवेश या संपत्ति को मौद्रिकरण या फ्रेश इक्विटी जारी कर इसका भुगतान कर सकती है. जियो ने कहा, 'हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर COAI द्वारा इन दोनों टेलिकॉम कंपनियों को राहत देने की मांग को रिजेक्ट करने का अनुरोध करते हैं. सभी ऑपरेटर्स को 3 माह के अवधि में बकाये का भुगतान करना ​अनिवार्य होना चाहिए.'



    क्या है मामला
    गौरतलब है कि बीते दिनों COAI के डायरेक्टर जनरल राजन एस मैथ्यू ने टेलीकॉम मंत्री रवि शंकर प्रसाद से इन कंपनियों की खराब वित्तीय हालात का हवाला देते हुए 1.42 लाख करोड़ रुपये बकाये को माफ करने मांग की थी. दरअसल AGR (Adjusted Gross Revenue) के तहत टेलीकॉम कंपनियां सरकार के साथ लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज शेयरिंग करती हैं. AGR में क्या क्या शामिल होगा इसकी परिभाषा को लेकर टेलीकॉम कंपनियां और सरकार के बीच विवाद चल रहा था. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इन टेलीकॉम कंपनियों (Telecom Companies) को निर्देश दिया था कि वे तीन माह के अंदर ब्याज के साथ मूलधन और पेनल्टी को जमा करें.

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    एयरटेल की मांग को ही COAI ने दोहराया
    मैथ्यू ने टेलीकॉम मंत्री को यह भी लिखा, 'अगर सरकार के​ लिए पूरी रकम माफ करना संभव नहीं है तो वो कम से कम ब्याज, पेनल्टी और पेनल्टी पर लगने वाले ब्याज को माफ कर दे. क्योंकि, बीते 14 साल से इसका भुगतान नहीं किया गया, ऐसे में हम अनुरोध करते हैं कि पिछले बकाये को चुकाने के लिए 2 साल की मोहलत दी जाए.

    आपको बता दें कि COAI की तरफ से यह मांग बिल्कुल वही है जो भारती एयरटेल के मालिक सुनील भारती मित्तल (Sunil Bhart Mittal) व उनके भाई राजन ​मित्तल (Rajan Mittal) ने रविशंकर प्रसाद और टेलीकॉम सेक्रेटरी अंशु प्रकाश से मिलकर की थी.

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    रविशंकर को लेटर लिखकर जियो ने जताया था विरोध
    जियो ने टेलीकॉम मंत्री रविशंकर प्रसाद को अलग से एक लेटर लिखकर टैक्सपेयर्स की कीमत पर इन टेलीकॉम कंपनियों को राहत देने का विरोध किया है. जियो ने इस बात पर भी जोर दिया है कि COAI को टेलीकॉम इंडस्ट्री के प्रतिनीधि के तौर पर नहीं देखना चाहिए.

    (डिस्क्लेमर: हिंदी न्यूज़ 18 डॉट कॉम रिलायंस इंडस्ट्रीज की कंपनी नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट लिमिटेड का हिस्सा है. नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट लिमिटेड का स्वामित्व रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास ही है.)

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