थोक महंगाई से मिली राहत, आलू सस्ता होने और फ्यूल प्राइस घटने का असर

जून में थोक मंहगाई के मोर्चे पर राहत मिली है. जून में थोक मंहगाई 2.02 फीसदी पर रही है जो मई में 2.45 फीसदी रही थी.

News18Hindi
Updated: July 15, 2019, 12:51 PM IST
थोक महंगाई से मिली राहत, आलू सस्ता होने और फ्यूल प्राइस घटने का असर
थोक महंगाई से मिली राहत, आलू सस्ता होने का असर
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Updated: July 15, 2019, 12:51 PM IST
जून में थोक मंहगाई के मोर्चे पर राहत मिली है. जून में थोक मंहगाई 2.02 फीसदी पर रही है जो मई में 2.45 फीसदी रही थी. आपको बता दें कि अप्रैल की थोक मंहगाई दर 3.07 फीसदी से संशोधित करके 3.24 फीसदी कर दिया गया है. थोक महंगाई दर में गिरावट की प्रमुख वजह खाने-पीने की चीजों, ईंधन और बिजली की दरें कम होना है. इसे देखते हुए रिजर्व बैंक मौजूदा वित्त वर्ष की बाकी अवधि में प्रमुख ब्याज दरें और घटा सकता है.

आंकड़ों पर एक नज़र-

>> महीने दर महीने आधार पर जून में खाने-पीने चीजों की थोक मंहगाई दर 5.10 फीसदी से घटकर 5.04 फीसदी रही है. वहीं प्राइमरी आर्टिकल्स की थोक महंगाई मई के 6.16 फीसदी से बढ़कर 6.72 फीसदी पर बढ़ गई है.
> जून में ईंधन-बिजली की थोक मंहगाई दर में कमी आई है ये मई के 0.98 फीसदी से घटकर -2.20 फीसदी पर आ गई है. महीने दर महीने आधार पर जून में मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की थोक मंहगाई दर 1.28 फीसदी से घटकर 1.94 फीसदी रही है. वहीं नॉन- फूड आर्टिकल्स की थोक मंहगाई 6.23 फीसदी से घटकर 5.06 फीसदी पर आ गई है.




>> महीने दर महीने आधार पर जून में सब्जियों की थोक मंहगाई 33.15 फीसदी से घटकर 24.67 फीसदी पर रही है. वहीं अंडा, मांस और मछली की थोक मंहगाई पिछले महीने के 5.64 फीसदी पर बरकरार रही है.
> महीने दर महीने आधार पर जून में दालों की महंगाई बढ़ती नजर आई है. जून में थोक मंहगाई मई के 18.36 फीसदी से बढ़कर 23.06 फीसदी पर आ गई है. इसी तरह प्याज की मंहगाई दर भी मई के 15.89 फीसदी से बढ़कर 16.63 फीसदी रही है. हालांकि जून में आलू का थोक भाव कम हुआ है जो मई के -23.36 फीसदी से घटकर -24.27 फीसदी रहा है.

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क्या होती है WPI महंगाई दर
भारत में आर्थिक नीतियों को तय करने में थोक मूल्य सूचकांक का बड़ा महत्व होता है. थोक बाजार में वस्तुओं के समूह की कीमतों में सालाना तौर पर कितनी बढ़ोत्तरी हुई है इसका आकलन महंगाई के थोक मूल्य सूचकांक के जरिए किया जाता है. भारत में इसकी गणना तीन तरह की महंगाई दर, प्राथमिक वस्तुओं, ईंधन और विनिर्मित वस्तुओं की महंगाई में बढ़त के आधार पर की जाती है. भारत में वित्तीय और मौद्रिक नीतियों के कई फैसले थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई दर के हिसाब से ही की जाती रही है.



महंगाई दर का अर्थव्‍यवस्‍था पर क्‍या होता है असर
महंगाई दर का असर अर्थव्‍यवस्‍था पर दो तरह से होता है. अगर महंगाई दर बढ़ती है तो बाजार में वस्तुओं की कीमतें बढ़ जाती हैं और लोगों की खरीदने की क्षमता कम हो जाती है. वहीं अगर महंगाई दर घटती है तो बाजार में वस्तुओं के दाम घट जाते और लोगों की खरीदने की क्षमता बढ़ जाती है. महंगाई के बढ़ने और घटने का असर सरकार की नीतियों पर भी पड़ता है. आरबीआई भी ब्याज दरों में बदलाव के लिए महंगाई के आधार पर फैसला लेता है.

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First published: July 15, 2019, 12:51 PM IST
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